हेल्थ सप्लीमेंट लेने से हॉस्पिटल क्यों पहुंचा शख़्स

  • 16 मार्च 2019
जिम ट्रेनर
Image caption आशीष चौधरी, जिम ट्रेनर की पुरानी तस्वीर

थोड़ा मर्द की तरह दिखो यार...

इस तरह के वाक्य पुरुषों के लिए आसानी से सुनने को मिल जायेंगे और कुछ युवा अपनी बॉडी में कट्स और शेप लाने के लिए तो, सभी तरह के शॉर्टकट्स अपनाने लगते हैं.

हाल ही में लगभग 26 साल के एक व्यक्ति को हॉस्पिटल में इसलिए एडमिट होना पड़ा क्योंकि उनके शरीर में हेल्थ सप्लीमेंट की मात्रा अधिक हो गई थी.

अब ये हेल्थ सप्लीमेंट क्या है?

हेल्थ सप्लीमेंट यानी शरीर में विटामिन्स और प्रोटीन की कमी को पूरा करने वाली दवाइयां, इंजेक्शन या उनके पाउडर. बॉडी बनाने वाले इसे अधिक मात्रा में खाते हैं ताकि उनकी बॉडी जल्दी शेप में आ जाए.

लेकिन नेचुरल प्रोटीन न लेने पर या इसकी मात्रा अधिक लेने पर कई तरह की दिक्कतें भी होती है. डॉक्टर के मुताबिक किसी भी व्यक्ति के शरीर में प्रति किलो वजन के हिसाब से दिन में अधिकतम एक ग्राम प्रोटीन लेना चाहिए.

दिल्ली के बीएलके हॉस्पिटल के नेफ्रोलॉजी डिपार्टमेंट के हेड डॉक्टर सुनील प्रकाश का कहना है, ''यदि कोई व्यक्ति 60 किलो का है और उसकी किडनी पूरी तरह स्वस्थ है तो उसे प्रति दिन केवल 60 ग्राम ही प्रोटीन लेना चाहिए. जिसे दाल, मछली, चिकन, मटन और सब्जियों से भी लिया जा सकता है.''

डॉक्टर प्रकाश कहते हैं कि लेकिन अधिकतर युवा बॉडी जल्दी बनाने के चक्कर में एक ही दिन में 300-400 ग्राम तक प्रोटीन एक ही दिन में खा लेते हैं जिस से किडनी पर गहरा असर होता है. एक ही दिन में कई अंडे, चिकन, मटन खा एक बार को इतनी दिक्कत नहीं देता जितना प्रोटीन पाउडर, इंजेक्शन, दवाइयां लेने से होता है. इतनी भारी मात्रा में प्रोटीन शरीर पचा नहीं पाता और इसका खामियाज़ा किडनी को भुगतना पड़ता है.

साथ ही वे ध्यान दिलाते हैं कि बाज़ार में मिलने वाले प्रोटीन शेक या हेल्थ सप्लीमेंट का कोई रेगुलेशन और स्रोत पता ही नहीं होता. इनमें कई तरह की मिलावट होती है जो तुरंत किडनी को नुकसान पहुंचाती हैं.

वे इसी में आगे जोड़ते हैं कि जो लोग मेहनत और पसीने वाला काम करते हैं उनमें पानी और भरपूर डाइट की कमी होती है और ऐसे में प्रोटीन की अधिक मात्रा शरीर और किडनी को नुकसान ज़्यादा पहुंचाती है.

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किडनी ख़राब होने के लक्षण

हालांकि डॉक्टर प्रकाश का कहना है कि यदि आपकी किडनी ख़राब हो रही है तो आपको पता नहीं चलेगा क्योंकि इसका कोई एक लक्षण नहीं है.

बदलते लाइफ़स्टाइल की वजह से इस पर सबसे ज़्यादा असर पर रहा है. वक्त पर खाना नहीं खाना, दवाईयों का ज़्यादा इस्तेमाल और पानी की सही मात्रा नहीं लेने जैसी कई चीजें हैं जो किडनी को प्रभावित करती हैं. ऐसे में किडनी पर भार बढ़ता है और यह काम करना बंद कर देती है.

लेकिन अगर ध्यान रखा जाए तो अंदाजा लगाया जा सकता है. जैसे, पेशाब का आना, रात में ज़्यादा पेशाब आना, ख़ून की कमी होना, हड्डियों में दर्द होना और कई महिलाओं को मां बनने में भी दिक्कत होती है. ये सभी किडनी ख़राब होने के शुरुआती लक्षण हैं.

''अगर किडनी फेलियर शुरू हो गई है तो भूख प्यास कम लगेगी, खुजली का होना, कमज़ोरी होना, हाइ ब्लड प्रेशर होना, सांस फूलना, कई बार बेहोशी और दौरे भी आ जाते हैं, उल्टी होना आदि. और यदि किडनी 34 से 35 प्रतिशत तक डैमेज हो जाए तो पुरुषों की प्रजनन क्षमता पर भी असर पड़ता है जिससे परिवार को आगे बढ़ाने में मुश्किल हो सकती है और एनीमिया की शिकायत भी हो सकती है.''

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डॉक्टर प्रकाश इस बात पर जोर देते हैं कि यदि किसी भी व्यक्ति को इस तरह के लक्षण हैं या उन्हें किडनी ख़राब होने की थोड़ा भी संभावना लगती है तो वे अपना यूरिन टेस्ट और ब्लड प्रेशर समय-समय पर चेक करवाएं.

हालांकि डॉक्टर प्रकाश का ये भी मानना है कि ज़रूरी नहीं कि जितने लोग खा रहे हैं उन सबकी किडनी डैमेज होगी. लेकिन जो इसका इस्तेमाल करते हैं वो एक बार टेस्ट ज़रूर करवा लें.

हेल्थ सप्लीमेंट अधिक लेने के कारण जिस व्यक्ति को हॉस्पिटल लाया गया था उनकी हालत काफ़ी ख़राब थी.

डॉक्टर प्रकाश बताते हैं कि उनका बीपी अचानक हाई यानी 240/140 हो गया था, ऐसी हालत में सभी डॉक्टर का मानना है कि ब्रेन स्ट्रोक भी हो सकता है.

वो कहते हैं, "जब वो हमारे पास आये तो हमने पहले उसका ब्लड प्रेशर कंट्रोल किया. उसकी किडनी बहुत ज़्यादा डैमेज हो गई थी जिसके लिए हमने उनकी तुरंत डाइट बदली. प्रोटीन शेक या पाउडर की वजह से उसका प्रोटीन लेवल बहुत बढ़ गया था जिसे कम किया गया और अब वो पहले से बहुत सही हैं. लेकिन अगर उन्होंने दोबारा अब सप्लीमेंट खाए तो ख़तरा काफ़ी बढ़ सकता है."

Image caption आशीष चौधरी

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डॉक्टर ने इस व्यक्ति का नाम और पहचान गोपनीय रखा है क्योंकि वो नहीं चाहते कि उनके बारे में किसी को पता चले.

बीबीसी ने भी उनसे बात करने की कोशिश की लेकिन उन्होंने अपना फ़ोन स्विच ऑफ़ कर दिया.

लेकिन जिम करने वालों का कुछ और ही कहना है.

बीबीसी ने ऐसे ही उन लोगों से भी बात की जो काफ़ी समय से जिम कर रहे हैं. उन्हीं में से एक पायल हैं, जिनकी उम्र 37 साल है और वो सप्लीमेंट भी लेती हैं.

Image caption पायल

वे कहती हैं, ''मैं पिछले कुछ दिनों से दवाइयां खा रही हूं मुझे मेरे ट्रेनर ने ही इसके बारे में बताया. इसे खाने के बाद मुझे अभी कोई नुकसान नहीं है और इसे खाते ही बॉडी बहुत ही रिलैक्स हो जाता है.''

ऐसे ही एक और व्यक्ति का कहना है कि एक्ससाइज़ के साथ प्रोटीन शेक लेना पड़ता है क्योंकि इस कमी को शेक ही पूरा कर सकता है, खाना नहीं.

वहीं जिम ट्रेनर आशीष चौधरी का कहना है कि यदि सही एक्ससाइज़ और डाइट ली जाए तो किसी भी तरह के सप्लीमेंट लेने की ज़रूरत नहीं है. इससे लेने पर शरीर को नुकसान ही पहुंचता है और ये बॉडी को खोखला बनाता है.

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