लोकसभा चुनाव 2019: पश्चिम बंगाल में उधार के उम्मीदवारों के भरोसे बीजेपी

  • 17 मार्च 2019
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Image caption पश्चिम बंगाल में बीजेपी का पोस्टर

"कृपया उधार मांग कर शर्मिंदा न करें."

यह शब्द तृणमूल कांग्रेस अध्यक्ष ममता बनर्जी के हैं. अपनी पार्टी के उम्मीदवारों की सूची जारी करते समय बीजेपी पर कटाक्ष करते हुए उन्होंने यह कहा था.

अब बंगाल के बीजेपी नेतृत्व ने भी मान लिया है कि उधार के यानी दूसरे दलों से पार्टी में शामिल होने वाले नेता ही उनका सहारा हैं.

मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने व्यंग्य करते हुए कहा है, "कहां तो बीजेपी बंगाल की 42 में से 23 सीटें जीतने का सपना देख रही है और कहां उम्मीदवारों का ही टोटा है."

प्रदेश अध्यक्ष दिलीप घोष भी मानते हैं कि पार्टी में जीत सकने लायक पर्याप्त उम्मीदवार नहीं हैं. इसलिए हाल में दूसरे दलों से आने वालों को मैदान में उतारने पर विचार चल रहा है.

हाल में तृणमूल कांग्रेस के दो सांसदों और एक विधायक अर्जुन सिंह के अलावा कांग्रेस और सीपीएम के भी एक-एक विधायक बीजेपी में शामिल हुए हैं और पार्टी उन सबको लोकसभा चुनाव का टिकट देने पर विचार कर रही है. इससे पार्टी के निचले स्तर के नेताओं और कार्यकर्ताओं में असंतोष बढ़ रहा है.

बीजेपी में तृणमूल कांग्रेस और दूसरे दलों के नेताओं के शामिल होने की शुरुआत बीते महीने हुई थी. दरअसल, आगे की राह मुश्किल जान कर ही पार्टी के कुछ नेता दूसरे दलों के नेताओं को अपने पाले में करने की कवायद में जुटे थे.

उनको अपनी इस मुहिम में कुछ कामयाबी तो मिली है. लेकिन अपनी मूल पार्टी से अलग होने वाले यह नेता बीजेपी को कितना फ़ायदा पहुंचाएंगे, यह साफ़ नहीं है.

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Image caption टीएमसी विधायक अर्जुन सिंह बीजेपी में शामिल होते हुए

बाहरी उम्मीदवारों से कितना फ़ायदा

तृणणूल कांग्रेस के दो निवर्तमान सांसदों—सौमित्र ख़ान और अनुपम हाजरा हाल में बीजेपी में शामिल हुए हैं. लेकिन उन दोनों के ख़िलाफ़ पार्टी-विरोधी गतिविधियों के आरोप में तृणमूल नेतृत्व ने कार्रवाई की थी और अबकी बार उनका पत्ता साफ़ होना तय था.

ऐसे में अपने राजनीतिक वजूद की रक्षा के लिए उनके सामने बीजेपी का हाथ थामने के अलावा कोई चारा नहीं था.

दूसरी ओर, बीजेपी को भी ऐसे ही नेताओं की तलाश थी जो अपने बूते उसे सीटें न सही, कुछ वोट ज़रूर दिला सकें.

बोलपुर से सांसद हाजरा को साल की शुरुआत में 9 जनवरी को तृणमूल कांग्रेस से निकाल दिया गया था. बीते सप्ताह उनके अलावा सीपीएम विधायक खगेन मुर्मू और दुलाल चंद्रबर भी बीजेपी में शामिल हो गए.

कोलकाता से सटे उत्तर 24-परगना की भाटापाड़ा सीट से चार बार विधानसभा चुनाव जीतने वाले तृणमूल कांग्रेस नेता अर्जुन सिंह की इलाके के जूट मिलों में काम करने वाले हिंदीभाषियों पर खासी पकड़ है.

वे इस बार बैरकपुर संसदीय सीट से चुनाव लड़ना चाहते थे. लेकिन पार्टी नेतृत्व ने जब वहां दिनेश त्रिवेदी को ही दोबारा मैदान में उतारने का फैसला किया तो अर्जुन सिंह ने बीजेपी में शामिल होने का मन बना लिया.

पार्टी उनको बैरकपुर सीट पर अपना उम्मीदवार बनाएगी. बीजेपी में शामिल होने के मौक़े पर उनका कहना था, "मैं महाभारत के अर्जुन की तरह हूं और तृणमूल कांग्रेस के नेताओं को बीजेपी में लाने के प्रयास में जुटे मुकुल राय कृष्ण की."

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Image caption पूर्व टीएमसी सांसद सौमित्र ख़ान बीजेपी में शामिल हुए

पार्टी में योग्य उम्मीदवारों का अभाव

बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष दिलीप घोष मानते हैं कि पार्टी के पास योग्य उम्मीदवारों का अभाव है. इसी वजह से दूसरे दलों से योग्य लोगों को पार्टी में शामिल किया जा रहा है.

जहां तक अर्जुन सिंह के पार्टी में शामिल होने का सवाल है, घोष कहते हैं कि वर्ष 2014 के लोकसभा चुनावों में भाटापाड़ा विधानसभा इलाके में बीजेपी पहले स्थान पर थी.

घोष का कहना है, "अर्जुन का बीजेपी में शामिल होना दोनों के लिए फायदेमंद है. लेकिन उनको सिर्फ़ भाटापाड़ा ही नहीं बल्कि बैरकपुर संसदीय क्षेत्र के सातों विधानसभा क्षेत्रों में जीत हासिल करनी होगी."

पार्टी अपने पुराने नेताओं व कार्यकर्ताओं को टिकट देने की बजाय दूसरे दलों से आने वालों को अपना उम्मीदवार क्यों बना रही है?

इस सवाल पर घोष कहते हैं, ''पुराने नेता तो विधानसभा और पंचायत चुनाव लड़ चुके हैं. लोकसभा चुनाव में टिकट उनको ही दिया जाएगा जो इसके योग्य हैं. इस मामले में इस पर ध्यान नहीं दिया जाएगा कि कौन बाहर से आया है और कौन पार्टी का पुराना नेता है.''

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Image caption पश्चिम बंगाल में बीजेपी की रैली

वैसे, दिलीप की दलील है कि बीजेपी के लगातार बढ़ते जनाधार की वजह से ही दूसरे राजनीतिक दलों के नेता पार्टी में शामिल हो रहे हैं.

दूसरे दलों से आने वाले नेताओं को तरजीह मिलते देख पार्टी के एक गुट में भारी असंतोष है. लेकिन प्रदेश नेतृत्व के सामने दूसरा कोई विकल्प नहीं है.

एक नेता नाम नहीं छापने की शर्त पर कहते हैं, "केंद्रीय नेतृत्व को खुश करने के लिए बंगाल से कई सीटे जीतनी होंगी. इसके लिए तृणमूल कांग्रेस के बागी नेताओं को टिकट देने के अलावा कोई रास्ता नहीं है. लेकिन इससे पार्टी के पुराने नेता नाराज़ हैं."

बीजेपी के वरिष्ठ नेता मुकुल राय दावा करते हैं, "विभिन्न राजनीतिक दलों के सांसद और विधायकों समेत कई नेता पार्टी में शामिल होने के इच्छुक हैं."

पार्टी के महासचिव कैलाश विजयवर्गीय का आरोप है कि दूसरे दलों से पार्टी में आने वालों के ख़िलाफ़ झूठे मामले दायर किए जा रहे हैं.

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दूसरी ओर, पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस अध्यक्ष ममता बनर्जी ने पार्टी छोड़ कर बीजेपी में शामिल होने वालों को विश्वसाघाती करार देते हुए कहा है कि वोटर ही ऐसे लोगों को समुचित जवाब देंगे.

वह कहती हैं, "बीजेपी के पास चुनाव लड़ने लायक उम्मीदवार नहीं हैं. इसलिए पार्टी के नेता हाथों में टिकट लेकर घर-घर भीख मांगते हुए लोगों से चुनाव लड़ने की अपील कर रहे हैं. एक विश्वासघाती पहले ही बीजेपी में जा चुका है और अब वही दूसरों को पार्टी में ले जा रहा है."

ध्यान रहे कि ममता ने अर्जुन सिंह को रोकने का प्रयास किया था. सूत्रों के मुताबिक उनको चुनावों के बाद मंत्री पद देने का भी प्रस्ताव दिया गया था. लेकिन वह नहीं माने.

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