संतों ने कहा- ईसाई हैं प्रियंका गांधी, मंदिर में न जाने दिया जाए-प्रेस रिव्यू

  • 19 मार्च 2019
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नवभारत टाइम्स में छपी एक रिपोर्ट के मुताबिक़ कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी के वाराणसी के विश्वनाथ मंदिर में पूजा के कार्यक्रम को लेकर विवाद खड़ा हो गया है. कुछ लोगों का कहना है प्रियंका ईसाई हैं इसलिए उन्हें मंदिर में प्रवेश नहीं मिलना चाहिए.

वाराणसी के कुछ संत भी प्रियंका के मंदिर जाने के विरोध में हैं. इस मद्देनज़र उन्होंने प्रशासन को चिट्ठी लिखकर आपत्ति जताई है. इस मद्देनज़र अधिवक्ता कमलेश चंद्र त्रिपाठी ने वाराणसी के जिलाधिकारी के ज़रिए उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को इस विषय में चिट्ठी भिजवाई है.

इस चिट्ठी में प्रियंका को काशी विश्वनाथ मंदिर में जाने से रोकने की अपील की गई है. जिलाधिकारी ने इस चिट्ठी के मद्देनज़र मंदिर प्रशासन को ज़रूरी कार्रवाई का निर्देश दिया है.

गंगा महासभा के राष्‍ट्रीय महामंत्री जीतेन्‍द्रानंद ने भी प्रियंका मंदिर जाने के कार्यक्रम का विरोध किया है. उन्होंने कहा कि अगर प्रियंका गांधी की वाक़ई हिंदू धर्म में आस्था है तो उन्हें ख़ुद के हिंदू होने की शपथ हलफ़नामे में लिखकर देनी चाहिए.

पूर्वी उत्तर प्रदेश की प्रभारी प्रियंका गांधी अपने चुनावी अभियान की शुरुआत गांधी परिवार के पैतृक शहर प्रयागराज यानी इलाहाबाद से करेंगी.

18 मार्च से 20 मार्च तक वो प्रयागराज से वाराणसी के बीच गंगा नदी में जलमार्ग से यात्रा करेंगी और इस दौरान उनके जनसंपर्क और कई अन्य कार्यक्रम रखे गए हैं. उनके तय कार्यक्रमों में काशी विश्वनाथ मंदिर में पूजा भी शामिल है.

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'झुग्गी-झोपड़ी वालों का भी शहर पर हक़'

झुग्गी-झोपड़ी में रहने वालों को भी शहर में रहने का अधिकार है. ये कहना है दिल्ली हाईकोर्ट का.

टाइम्स ऑफ़ इंडिया में छपी रिपोर्ट के अनुसार अदालत ने कहा कि ये आवास के अधिकार का हिस्सा है जो सिर्फ़ किसी के पर छत तक ही सीमित नहीं है. इसके दायरे में आजीविका, स्वास्थ्य, शिक्षा, पीने के साफ़ पानी, सीवरेज, परिवहन और खाने के अधिकार जैसे तमाम अधिकार आते हैं.

अदालत ने ये बातें साल 2015 में कांग्रेस नेता अजय माकन द्वारा दायर की गई एक याचिका की सुनवाई के दौरान कहीं.

अजय माकन ने यह याचिका तब दायर की थी जब रेल मंत्रालय और दिल्ली पुलिस ने ठंड के मौसम में शकूर बस्ती में अवैध मकानों को गिराया था. इसमें लगभग 5,000 लोग बेघर हो गए थे और छह महीने एक बच्ची की मौत हो गई थी.

जस्टिस एस. मुरलीधर और जस्टिस विभु बाखरु की एक बेंच ने ये फ़ैसला सुनाया है. अदालत ने अपने फ़ैसले में कहा कि अतिक्रमण रोधी अभियानों के तहत ग़रीबों की झुग्गियां गिराए जाने से पहले एक विस्तृत सर्वे होना चाहिए और इससे प्रभावित होने वाले लोगों से बातचीत करके उनके पुनर्वास की योजना बनानी चाहिए.

हाईकोर्ट ने ये भी कहा कि अपना घर खोने वाले लोगों का पुनर्वास जल्दी से जल्दी से होना चाहिए.

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Image caption सांकेतिक तस्वीर

वेदांता के प्लांट में सुरक्षाकर्मी को ज़िंदा जलाया

इंडियन एक्सप्रेस में ख़बर है कि ओडिशा के कालाहांडी जिले में वेदांता एल्युमिनियम रिफ़ाइनरी के पास हुई हिंसा में भीड़ ने एक सुरक्षाकर्मी को ज़िंदा जला दिया. इस संघर्ष में एक प्रदर्शनकारी की भी जान चली गई.

पुलिस का दावा है कि सोमवार को हिंसा उस वक़्त भड़की जब नौकरी मांग रहे स्थानीय लोगों ने रिफ़ाइनरी परिसर में घुसने की कोशिश की.

पुलिस के मुताबिक प्रदर्शनकारियों और ओडिशा इंडस्ट्रियल सिक्योरिटी फ़ोर्स (OISF) सुरक्षाबलों के बीच हुए संघर्ष में 20 लोग घायल हो गए. पुलिस का कहना है कि स्थानीय प्रदर्शनकारी वेदांता कंपनी के स्कूल में अपने बच्चों के दाख़िले की और अपने लिए नौकरी की मांग कर रहे थे.

घटना के बाद वेदांता ने एक बयान जारी करके कहा कि हिंसा में ओआईएसएफ़ के एक सुरक्षाबल की मौत हो गई है.

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Image caption मनोहर पर्रिकर के अंतिम संस्कार में श्रद्धांजलि देते पीएम मोदी

पर्रिकर को आख़िरी विदाई, बेटे उत्पल ने दी मुखाग्नि

गोवा के पूर्व मुख्यमंत्री और भारत के पूर्व रक्षामंत्री के अंतिम संस्कार की ख़बर और तस्वीरें जनसत्ता समेत सभी अख़बारों में हैं. जनसत्ता की रिपोर्ट के मुताबिक़ सोमवार शाम 5:30 बजे के लगभग गोवा के मीरामार में हज़ारों आम और ख़ास लोगों की मौजूदगी में पर्रिकर को आख़िरी विदाई दी गई.

पर्रिकर के बड़े बेटे उत्पल ने उन्हें मुखाग्नि दी. 63 वर्षीय पर्रिकर एक साल से ज़्यादा वक़्त से अग्नाशय के कैंसर से जूझ रहे थे. रविवार शाम उनका देहांत हो गया था.

पर्रिकर के देहांत पर गोवा में सात दिन का राष्ट्रीय शोक घोषित किया गया है.

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