क्या अनिल अंबानी और मुकेश अंबानी में अब सब कुछ ठीक हो गया है

  • 19 मार्च 2019
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मुकेश अंबानी और अनिल अंबानी को अपने पिता धीरुभाई अंबानी से विरासत में एक बड़ा कारोबारी साम्राज्य मिला था. पिता की मौत के बाद दोनों भाइयों के रिश्ते ठीक नहीं रहे.

एक दशक पहले दोनों भाइयों के रिश्ते में आई दरार सोमवार को उस वक़्त भरती दिखी जब अनिल अंबानी ने एक बयान जारी कर कहा कि मुश्किल घड़ी में उनके भैया मुकेश और भाभी नीता ने जेल जाने से बचा लिया.

स्वीडन की कंपनी एरिक्सन को 7.7 करोड़ डॉलर का बकाया अनिल अंबानी को इसी हफ़्ते बुधवार तक चुकाना था. अगर वो नहीं चुकाते तो जेल जाना पड़ता. मुकेश अंबानी मुश्किल वक़्त में अपने भाई का सहारा बने और पैसे चुकाकर जेल जाने से बचा लिया.

मुकेश अंबानी दुनिया के सबसे अमीर उद्योगपतियों में से एक हैं. फ़ाइनैंशियल टाइम्स के अनुमान के मुताबिक़ मुकेश अंबानी के पास कुल 42 अरब डॉलर की संपत्ति है. शुरू में दोनों भाइयों का उभार हुआ और वे टॉप रहे. 2008 में तो अनिल अंबानी भी दुनिया के आठवें अमीर शख़्स थे.

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अभी अनिल अंबानी को भले उनके भाई मुकेश अंबानी ने बचा लिया लेकिन ये भी सच है कि रिलायंस कम्युनिकेशन्स की बर्बादी में मुकेश अंबानी की नई टेलिकॉम कंपनी जियो का भी योगदान रहा.

16 साल पहले धनकुबेर पिता धीरूभाई अंबानी की मौत के बाद दोनों भाइयों में कड़वाहट आ गई थी. धीरूभाई अंबानी ने अपने जीवन में रोज़ी-रोटी की शुरुआत यमन में एक पेट्रोल स्टेशन पर अटेंडेंट के तौर पर की थी.

भारत लौटने के बाद उन्होंने कपड़े का छोटा सा व्यापार शुरू किया और यह व्यापार रिलायंस इंडस्ट्रियल साम्राज्य तक पहुंचा. अनिल अंबानी का जन्म 1959 में हुआ था. उनकी परवरिश एक कारोबारी माहौल और परिवार में हुई.

कहा जाता है कि धीरूभाई अंबानी जब ज़िंदा थे तब से ही दोनों भाइयों की जीवनशैली में काफ़ी अंतर था. मुकेश अंबानी के बारे में कहा जाता है कि उन पर काम का भूत सवार रहता था तो अनिल में एक किस्म की आभिजात्यता थी.

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2002 में पिता की मौत के बाद दोनों भाइयों में कारोबार का बंटवारा होना तय हो गया था. 2005 में इनकी मां ने दोनों भाइयों के बीच रिलायंस के कारोबार का बंटवारा किया. मुकेश को पेट्रोकेमिकल मिला तो अनिल के हिस्से में टेलिकॉम, फ़ाइनैंस और एनर्जी यूनिट्स आईं.

इस बँटवारे के साथ ही दोनों भाइयों के बीच प्रतिद्वंद्विता बढ़ती गई. 2008 में रिलायंस कम्युनिकेशन्स ने दक्षिण अफ़्रीका में एमटीएन के साथ डील किया तो मुकेश अंबानी के लिए यह चौंकाने वाला था.

यह ट्रांसकॉन्टिनेंटल डील थी जिस पर मुकेश अंबानी की कंपनी आरआईएल ने कड़ी आपत्ति जताई थी. मुकेश अंबानी की कंपनी का कहना था कि अभी पारिवारिक सेटलमेंट से जुड़ी समस्याएं हैं इसलिए एमटीएन इस पर आगे नहीं बढ़े.

इसी साल वैश्विक मंदी आई और अनिल अंबानी पर इसकी गहरी मार पड़ी. इस मंदी में एक अनुमान के मुताबिक़ अनिल अंबानी को 31 अरब डॉलर का नुक़सान हुआ.

दोनों भाइयों के बीच क़रार था कि वो एक दूसरे के कारोबार में नहीं आएंगे. 2010 में यह क़रार ख़त्म हो गया. मुकेश अंबानी ने क़रार ख़त्म होते ही अगले सात सालों में टेलिकॉम सेक्टर में 34 अरब डॉलर निवेश करने की घोषणा कर दी.

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'द बिलियनेयर राज' नाम की किताब लिखने वाले और सिंगापुर में ली कुआन येव स्कूल ऑफ पब्लिक पॉलिसी के प्रोफ़ेसर जेम्स कार्बट्री ने ब्लूमबर्ग से कहा है, ''यह बहुत ही बड़ा दांव था. जियो का आना बहुत बड़ी परिघटना साबित हुई.'

इस बात को हर कोई मानता है कि टेलिकॉम में मुकेश अंबानी की जियो के आने से अनिल अंबानी की मुश्किलों का पहाड़ और बड़ा हुआ. तीन साल के भीतर ही जियो के 30 करोड़ यूज़र्स हो गए. टीएसएल, टेलिनॉर और एमटीएस की तरह रिलायंस कम्युनिकेशन्स को भी अपना बोरिया-बिस्तर समेटना पड़ा.

जियो ने 4जी के प्राइस वॉर में सबको पीछे छोड़ दिया. जियो की एंट्री के पहले ही आरकॉम के शेयर में 9.54 फ़ीसदी की गिरावट आई और अक्टूबर 2017 में ऑरकॉम का शेयर 5.20 फ़ीसदी तक पहुंच गया.

2012 में आरकॉम को पीछे छोड़ वोडाफ़ोन दूसरे नंबर पर आ गई. 2016 में आरकॉम चौथे नंबर पर आ गई. सुप्रीम कोर्ट ने कई लाइसेंस रद्द किए तो सीबीआई जांच भी हुई.

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अनिल अंबानी को भी अदालत का चक्कर लगाना पड़ा और स्वीकार किया कि उनकी कंपनी मुश्किल दौर में है. आरकॉम क़र्ज़ के जाल में फंसती गई और 2010 में 25 हज़ार करोड़ का क़र्ज़ 43 हज़ार करोड़ तक पहुंच गया.

शाकाहारी अनिल अंबानी शराब नहीं पीते हैं. मैराथन दौड़ उनका शौक है. लेकिन कारोबार की दौड़ में उनके लड़खड़ाने की कहानी किसी भी उद्योगपति के लिए सबक से कम नहीं है. हिन्दू अख़बार से एक बार अनिल अंबानी ने कहा था कि वो रोज़ दो घंटे ट्रेडमिल पर बिताते हैं और 30 मिनट योग करते हैं.

कहा जाता है कि अनिल अंबानी ने अपने भाई से प्रतिद्वंद्विता को हर स्तर पर बढ़ाया. दोनों ने एक दूसरे के ख़िलाफ़ काम करने के सार्वजनिक तौर पर आरोप लगाए.

कई बार तो यह निचले स्तर तक पहुंच गया. मुकेश अंबानी ने अपनी पत्नी को 5.2 करोड़ डॉलर का एक जेट गिफ़्ट किया था तो अनिल अंबानी ने 8 करोड़ डॉलर का एक लग्ज़री यॉट गिफ्ट में दिया.

अनिल अंबानी के 43.5 अरब डॉलर गंवाने की कहानी

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दोनों भाइयों में लड़ाई गैस के कारोबार को लेकर हुई और इसमें सरकार और कोर्ट को भी दख़ल देना पड़ा. मुकेश अंबानी की रिलायंस इंडस्ट्रीज बंगाल की खाड़ी के डी6 ब्लॉक से गैस की सप्लाई छोटे भाई अनिल अंबानी की कंपनी रिलायंस नैचुरल रिसोर्सेज में तय क़ीमत 2.34 डॉलर प्रति मिलियन थर्मल यूनिट्स पर करती थी.

यह 17 सालों का क़रार था. हालांकि रिलायंस इंडस्ट्रीज ने दावा किया कि यह सरकारी दर थी. 2007 में क़ीमत सीधे दोगुनी कर दी गई. यह क़ीमत सरकार ने तय की थी और तर्क था कि तेल की क़ीमत बढ़ रही है.

अनिल अंबानी इस मामले को कोर्ट में ले गए और मुंबई कोर्ट ने परिवार की मूल डील का समर्थन किया. इसके बाद सरकार भी खुलकर सामने आई और कहा कि गैस इन अरबपतियों की निजी संपत्ति नहीं है बल्कि ये राष्ट्रीय संपत्ति है.

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मुकेश अंबानी मैराथन नहीं दौड़ते हैं पर वो भी शाकाहारी हैं. मुकेश का पसंदीदा भोजन दाल, रोटी और चावल है. न्यूयॉर्क टाइम्स ने अपने एक आलेख में कहा है कि पिछली सदी में महात्मा गांधी भारत के सबसे ताक़तवर शख़्स थे और अभी मुकेश अंबानी.

जिसका भाई इतना ताक़तवर हो उसका भाई जेल कैसे जाता. लेकिन अनिल अंबानी की मुश्किलें केवल एरिक्सन के क़र्ज़ तक ही सीमित नहीं हैं. ऐसे में सवाल उठता है कि क्या मुकेश अंबानी आगे भी अनिल के लिए तैयार रहेंगे.

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