मैदान पर धोनी का रहना कप्तान विराट कोहली के लिए कितना अहम

  • 21 मार्च 2019
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पैनी निगाह, फुर्तीले स्टंप्स, गेंदबाज़ों को सलाह, परिस्थितियों की समझ और विकेट के पीछे अकूत अनुभव ये वो कुछ चीज़ें हैं जिनकी कमी ऑस्ट्रेलिया के ख़िलाफ़ अंतिम दो मैचों के दौरान भारतीय टीम ने मैदान में महसूस की.

और इसके लिए जिस एक शख़्स को हर किसी ने याद किया वो हैं महेंद्र सिंह धोनी.

ऑस्ट्रेलिया के ख़िलाफ़ दो वनडे जीतने के बाद अंतिम तीन मैच हार कर कप्तान विराट कोहली सिरीज़ हार गए और उनकी विश्व कप से पहले अंतिम वनडे सिरीज़ में 2-0 की बढ़त के बाद मिली हार से कई सवाल उठने लगे.

हार की वजह यह भी बताई जाने लगी कि आख़िरी दो मैचों में धोनी टीम का हिस्सा नहीं थे.

विशेषज्ञों की नज़र में विराट कोहली के फ़ैसले में मैदान पर धोनी के नहीं होने की कमी झलक रही थी. इस दौरान उनकी जगह टीम में विकेटकीपिंग का ज़िम्मा संभाल रहे ऋषभ पंत ने अहम कैच भी छोड़े.

महेंद्र सिंह धोनी को लेकर पूर्व कप्तान और कोच अनिल कुंबले ने भी कहा है कि जब वो मैदान पर होते हैं तो विराट कोहली को सही फ़ैसले लेने में बहुत मदद मिलती है.

अब जबकि 30 मई से विश्व कप शुरू होने जा रहा है ऐसे में ऑस्ट्रेलिया से अपनी सरजमीं पर मिली हार से भारतीय टीम की तैयारियों और विराट के फ़ैसले को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं.

टीम इंडिया के मुख्य कोच रहे अनिल कुंबले ने कहा, "धोनी की मौजूदगी में विराट ज़्यादा अच्छी कप्तानी करते हैं. विकेट के पीछे धोनी के होने से वो सहज महसूस करते हैं. दोनों के बीच लगातार बातचीत होती रहती है लिहाज़ा विराट अहम फ़ैसले ले पाते हैं."

2014 में धोनी ने टेस्ट क्रिकेट से संन्यास ले लिया था और 2017 में उन्होंने विराट को वनडे की कप्तानी भी सौंप दी थी.

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कुंबले ने कहा विराट को धोनी की कमी खली

कुंबले ने कहा कि धोनी के पास कप्तानी का लंबा अनुभव है और विकेट के पीछे से वो चल रहे खेल को बेहतर समझते हैं.

उन्होंने कहा कि धोनी लाइन लेंथ को लेकर लगातार गेंदबाज़ों से बातें करते रहते हैं. वो फील्ड सेट करने में विराट की मदद करते हैं. उनकी ग़ैरमौजूदगी में कई ग़लतियां हुई हैं.

कुंबले ने क्रिकेट नेक्स्ट से बातचीत में कहा कि अंतिम ओवरों में विराट बाउंड्री पर फील्डिंग करते हैं और धोनी विकेट के पीछे से आख़िरी 10-15 ओवरों में गेंदबाज़ों को सलाह देते हुए दिखते हैं.

ऑस्ट्रेलिया के ख़िलाफ़ चूंकि धोनी अंतिम दो मैच में नहीं खेले तो चाहे गेंदबाज़ों से बात करना हो या फील्डिंग को सेट करना, दोनों में ही विराट को धोनी की कमी खली.

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कुलदीप की गेंदबाज़ी पर धोनी का असर

अपनी विकेटकीपिंग शैली के अलावा धोनी विकेट के पीछे से गेंदबाज़ों को निर्देश भी देते रहते हैं. चाइनामैन कुलदीप यादव एक ऐसे गेंदबाज़ हैं जिन्हें आख़िरी दो मैचों में धोनी की कमी खली.

ऑस्ट्रेलिया के ख़िलाफ़ पांच मैचों की सिरीज़ में 10 विकेट चटकाने वाले चाइनामैन कुलदीप यादव अंतिम दो मैचों में महज दो विकेट ही ले सके.

धोनी जब विकेट के पीछे मौजूद रहते हैं तो वो गेंदबाज़ी के दौरान कुलदीप यादव को सलाह देते देखे जाते रहे हैं.

कुलदीप को सलाह देती धोनी की आवाज़ स्टंप माइक के जरिए भी कई बार कैमरे में क़ैद हुई है.

ख़ुद कुलदीप भी कहते हैं कि धोनी की स्टंप के पीछे मौजूदगी से उनका काम आसान हो जाता है.

वो कहते हैं, "धोनी विकेट के पीछे से हम गेंदबाज़ों का मार्गदर्शन करते हैं. जब भी उन्हें यह महसूस होता है कि कुछ बताना चाहिए तो गेंदबाज़ी के दौरान वो हमारे पास चले आते हैं."

कुलदीप कहते हैं, "कई बार गेंदबाज़ मैच की परिस्थितियों को अच्छी तरह नहीं समझ पाते लेकिन माही भाई स्थिति को अच्छी तरह जानते हैं और यही वजह है कि हम उनके साथ खेलकर ख़ुद को भाग्यशाली समझते हैं."

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ईशांत ने भी कहा- माही से मिली मदद

उधर तेज़ गेंदबाज़ ईशांत शर्मा ने भी कहा है कि कप्तान और सीनियर के रूप में महेंद्र सिंह धोनी ने उनके पूरे करियर के दौरान काफ़ी मदद की है.

ईशांत ने कहा, "माही (धोनी) भाई ने कई बार मुश्किल समय में मेरी मदद की है. अब टीम में सीनियर होने के नाते विराट मेरे पास आते हैं और कहते हैं, 'मुझे पता है कि आप थके हुए हैं, लेकिन एक सीनियर होने के नाते आप को टीम के लिए ऐसा करना होगा."

भारत के लिए अब तक 90 टेस्ट मैचों में 267 विकेट हासिल कर चुके ईशांत ने कहा, "पहले मैं सिर्फ़ अच्छी गेंदबाज़ी करना चाहता था लेकिन अब मैं अच्छा प्रदर्शन करना चाहता हूं और विकेट लेना चाहता हूं."

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धोनी हैं कोहली के 'विराट'

धोनी कितने महत्वपूर्ण हैं इसका अंदाज़ा इसी से चलता है कि धोनी को पूरी दुनिया विकेटकीपिंग से पहले उनकी बल्लेबाज़ी और कप्तानी के लिए जानती है लेकिन यहां बात उनके मैदान में बतौर विकेटकीपर और सूझबूझ की हो रही है.

उनकी विस्फोटक बल्लेबाज़ी ने भारत को कई मैच जिताए हैं.

ऐसे में धोनी का टीम में महत्व कितना है इस पर ऑस्ट्रेलियाई टीम के पूर्व कप्तान माइकल क्लार्क ने कहा कि, "कभी भी धोनी की महत्ता को हल्के में नहीं लें, उनका अनुभव मध्यक्रम में काफ़ी अहम है."

यह धोनी की क्रिकेटिंग स्किल ही थी जिसकी बदौलत भारत ने ऑस्ट्रेलिया के ख़िलाफ़ पहले वनडे में जीत दर्ज की.

99 रन पर चार विकेट खोने के बाद उन्होंने विकेट का एक छोर संभाल लिया और 59 रनों की नाबाद मैच जिताऊ पारी खेली.

341 वनडे खेल चुके धोनी क्रिकेट खेल रहे दुनिया के वर्तमान खिलाड़ियों से कहीं अधिक अनुभवी हैं. इनमें से 200 वनडे में भारत के कप्तान रहते हुए धोनी के पास 110 मैचों को जीतने का अनुभव भी है.

वनडे में 10500 रन बना चुके जिस धोनी की 2018 में 20 मैचों में महज 25 की औसत से रन बनाने पर आलोचना हो रही थी 2019 में अब तक उन्होंने 9 मैचों में 81.75 की औसत से 327 रन बनाए हैं.

इन नौ मैचों में से भारत केवल एक मैच हारा और धोनी ने 51, नाबाद 55, नाबाद 87, नाबाद 48, नाबाद 59 जैसी मैच जिताऊ पारियां भी खेली हैं. यानी मैच फिनिशर के तौर पर भी धोनी विराट के लिए बेहद अहम रहे हैं.

कुल मिलाकर यह कहा जाए कि 68 मैचों में वनडे कप्तानी कर चुके विराट कोहली के लिए भारत के सबसे अनुभवी पूर्व कप्तान धोनी आगामी विश्व कप में एक अहम कड़ी हैं तो यह अतिश्योक्ति नहीं होगी.

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