मोदी जी को बताना है हम जिताना भी जानते हैं और हराना भी: चंद्रशेखर आज़ाद

  • 23 मार्च 2019
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Image caption भीम आर्मी के संस्थापक चंद्रशेखर आज़ाद

भारतीय जनता पार्टी ने गुरुवार को लोकसभा चुनावों के लिए 184 उम्मीदवारों की सूची जारी कर दी है. इसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सीट की भी घोषणा की गई है.

प्रधानमंत्री मोदी इस बार भी अपने लोकसभा क्षेत्र वाराणसी से चुनाव लड़ेंगे.

किसी अन्य दल ने फिलहाल वाराणसी में अपना उम्मीदवार नहीं उतारा है.

वहीं, भीम आर्मी के संस्थापक चंद्रशेखर आज़ाद ने कहा है कि वो नरेंद्र मोदी के ख़िलाफ़ निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर चुनाव लड़ेंगे.

चंद्रशेखर आज़ाद उर्फ़ रावण से अपनी उम्मीदवारी और चुनाव से जुड़े मुद्दों को लेकर तमाम बातचीत की. अहम मुद्दों पर उनके जवाब -

किन मुद्दों पर लड़ेंगे चुनाव

पहला तो ये कि प्रधानमंत्री जी ने जनता से जो वादे किए थे वो उन पर खरे नहीं उतरे हैं.

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दूसरा, इस देश के दलितों, पिछड़ों और मुसलमानों के साथ जो अन्याय किया गया है, वो लोगों से छुपा हुआ नहीं है. सभी लोगों को प्रधानमंत्री से निराशा मिली है.

मुझे पूरी उम्मीद है कि बीजेपी की छल-कपट की राजनीति देश हित में नहीं है इसलिए देश, लोकतंत्र और संविधान को बचाने के लिए हम ये चुनाव लड़ रहे हैं.

मैं स्वतंत्र उम्मीदवार के तौर पर पीएम मोदी के ख़िलाफ़ लडूंगा और मुझे पूरा भरोसा है कि हम उन्हें हराने में कामयाब हो जाएंगे.

अगर वहां से कोई मजबूत प्रत्याशी नहीं उतरता है तो मैं खुद मोदी जी के सामने उतरकर उन्हें बताऊंगा कि हम बहुजन समाज ग्राम के नाम से जाने जाने वाले कमजोर तबके के लोग जिताना भी जानते हैं और हराना भी.

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पीएम के ख़िलाफ़ चुनाव, क्या राजनीतिक करियर दांव पर?

मेरा उद्देश्य राजनीति करना नहीं बल्कि ज़ुल्म, जाति और अन्याय के ख़िलाफ़ अपनी आवाज़ को मजबूत करना है.

लोगों को ये बताना है कि चाहे देश का प्रधानमंत्री हो या कोई और, अगर गलत करेगा तो हम उसके ख़िलाफ़ खड़े होंगे.

भले ही उनके पास धनबल और सरकारी मशीनरी है लेकिन हमारे पास जमीनी तौर पर किया गया काम है. हम कम संसाधानों के साथ ही लड़ेंगे और जीतेंगे.

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Image caption चंद्रशेखर आज़ाद से अस्पताल में मिली थीं कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी

प्रियंका गांधी से मुलाकात और कांग्रेस से टिकट?

मेरी प्रियंका जी से मानवता के नाते मुलाकात हुई थी. मैं बीमार था ओर वो मुझसे मिलने आई थीं. हमारे बीच कोई राजनीतिक चर्चा नहीं हुई. हम सभी लोगों का उद्देश्य इस देश में सांप्रदायिक माहौल के ख़िलाफ़ काम करना है.

मैं नहीं चाहता कि कोई कमजोर आदमी वहां से खड़ा होकर मोदी जी के सामने समर्पण कर दे या चंद पैसों के लालच में बिक जाए. मैं पूरी मजबूती से चुनाव लड़ूंगा.

जो लोग चाहते हैं कि मोदी जी हारें, बीजेपी मुक्त भारत हो, देश का संविधान और लोकतंत्र ज़िंदा रहे, वो उसमें मदद करेंगे.

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किसी पार्टी से टिकट मिला तो लेंगे?

जैसे कि हमारे प्रयास से यूपी में एक मजबूत गठबंधन हुआ तो ऐसे में अगर सभी दल सामूहिक रूप से अपना प्रत्याशी घोषित करते हैं तो वो किसी एक पार्टी का नहीं होता.

मैं स्वतंत्र लड़ूंगा और उम्मीद है कि सब लोग समर्थन करेंगे.

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मायावती की दूरी की वजह

राजनीति में कोई किसी का लंबे समय तक दोस्त या दुश्मन नहीं रहता. बिहार में लालू यादव व नीतीश कुमार और यूपी में सपा-बसपा के मामले में हम ये देख चुके हैं.

बस ये कहना चाहूंगा कि जब संविधान के समर्थन में लड़ाई हो तो अपना निजी हित छोड़कर सभी को एकजुट होना चाहिए.

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