लोकसभा चुनाव 2019: बनारस में मोदी के ख़िलाफ़ 111 किसान लड़ेंगे चुनाव

  • 24 मार्च 2019
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अपनी मांगों को लेकर दिल्ली में बीते काफ़ी समय से अलग-अलग ढंग से विरोध प्रदर्शन करने के बाद तमिलनाडु के 111 किसानों ने आगामी लोकसभा चुनाव 2019 में बनारस लोकसभा सीट से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ख़िलाफ़ चुनाव लड़ने का फ़ैसला किया है.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने साल 2014 में वाराणसी और वड़ोदरा से चुनाव लड़कर दोनों जगहों से जीत हासिल की थी. इस चुनाव में भी प्रधानमंत्री मोदी बनारस से ही चुनाव लड़ने जा रहे हैं.

किसानों के नेता पी. अय्याकन्नू ने बीबीसी के साथ बातचीत में कहा है कि वह बनारस के लोगों को दिखाना चाहते हैं कि देश के किसान किस हालत में अपनी ज़िंदगी जी रहे हैं.

हालांकि, उन्होंने ये भी कहा है कि अगर बीजेपी ने अपने घोषणापत्र में उनके मुद्दों को शामिल करने का आश्वासन दिया तो वे अपने फ़ैसले को टाल देंगे.

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किसान क्यों कर रहे हैं विरोध?

तमिलनाडु से बनारस आकर चुनाव लड़ने का फ़ैसला करने वाले 111 किसानों के दल के नेता पी. अय्याकन्नू ने कहा, "मैं नेशनल साउथ इंडियन रिवर इंटर लिंकिंग फार्मर असोशिएसन का प्रदेश अध्यक्ष हूं. हम 400 किसानों ने दिल्ली जाकर 140 दिनों तक खेती से जुड़े उत्पादों के लिए मुनाफे़ वाली क़ीमत की मांग करते हुए विरोध प्रदर्शन किया."

"हमारी मांगों में किसानों का क़र्ज़ माफ़ करने की मांग भी शामिल थी. 2014 के चुनाव के दौरान हमारे प्रधानमंत्री ने ऐलान किया था कि अगर वह प्रधानमंत्री बनते हैं तो वह खेती से जुड़े उत्पादों को दुगनी क़ीमत देंगे."

"पूरे देश में किसानों ने सिर्फ़ 75 हज़ार करोड़ रुपये का लोन लिया है. लेकिन सरकार ने कॉरपोरेट सेक्टर का चार लाख करोड़ रुपये माफ़ किया है. लेकिन वो किसानों की कोई मदद नहीं कर रहे हैं."

"हमने इसी वजह से दिल्ली में 140 दिनों तक विरोध प्रदर्शन किया था. इसके बाद हमारे उप वित्त मंत्री पी राधाकृष्णन हमारे पास पांच बार आए और उन्होंने हमारी मदद करने का वादा किया. लेकिन अब तक हमें किसी तरह की मदद नहीं मिली है. ऐसे में हम अब वाराणसी जाकर नामांकन दाखिल करेंगे. हमारे पास पैसा नहीं है. इसलिए हम बनारस की गलियों में जाकर चुनाव लड़ने में खर्च होने वाली रक़म हासिल करने के लिए भीख मांगेगे. हम 24 अप्रैल को वाराणसी पहुंचेंगे और 25 अप्रैल को पर्चा दाखिल करेंगे."

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तमिलनाडु के किसानों ने कहा कि उनके साथी आत्महत्या कर रहे हैं

चुनाव जीतने की अपेक्षा?

पी. अय्याकन्नू के साथ बातचीत करके जब ये बात समझने की कोशिश की गई कि क्या मोदी के ख़िलाफ़ चुनाव लड़कर वे जीतने की उम्मीद रखते हैं तो इसके जवाब में अय्याकन्नू कहते हैं कि उनके पास किसी तरह का राजनीतिक समर्थन नहीं है.

वह बताते हैं, "हमारे पास कोई पॉलिटिकल सपोर्ट नहीं है. लेकिन हम अपनी स्थिति बनारस की जनता को दिखाना चाहते हैं. चुनाव के दौरान राजनीतिक दलों के लिए किसान भारत की रीढ़ की हड्डी होते हैं लेकिन चुनाव के बाद राजनीतिक दल हमारे साथ दासों जैसा व्यवहार करते हैं. ऐसे में हम भारत के लोगों को दिखाना चाहते हैं कि हम कौन हैं और मोदी कौन हैं. क्योंकि वह किसानों का साथ नहीं दे रहे हैं. ऐसे में हम उनका विरोध कर रहे हैं."

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तमिलनाडु के किसानों का दिल्ली के जंतरमंतर पर अनोखा धरना प्रदर्शन

विरोध का अनोखा तरीका

जंतर-मंतर पर अपने प्रदर्शन के दौरान इन किसानों ने विरोध के कई अलग-अलग तरीकों को आज़माया था.

सबसे पहले किसानों ने नर खोपड़ियों के साथ प्रदर्शन किया. उनके दावे के अनुसार, ये खोपड़ियां आत्महत्या करने वाले किसानों की हैं.

फिर इन किसानों ने एक दिन अर्द्ध-नग्न होकर भी प्रदर्शन किया. भारी गर्मी में किसानों ने सड़क पर लेट कर अपना विरोध दर्ज कराया. किसानों ने सिर के आधे बाल और आधी मूंछ कटाकर भी प्रदर्शन किया.

उस प्रदर्शन के दौरान उनके प्रमुख मांगों में कर्ज़ माफ़ी, फ़सल के न्यूनतम समर्थन मूल्य को बढ़ाने की थी.

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