कश्मीर: अल्लाह और पैग़ंबर मोहम्मद का वास्ता देती रहीं मां पर लेकिन नहीं पसीजे चरमपंथी- ग्राउंड रिपोर्ट

  • 24 मार्च 2019
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Image caption अब्दुल हामिद मीर

भारत प्रशासित कश्मीर के मीर मोहल्ला इलाक़े के हाजन में लगभग बर्बाद हो चुके एक मकान के बाहर भारी भीड़ जुटी है.

ये मकान मोहम्मद शफ़ी मीर का है जिनके 12 साल के बेटे आतिफ़ अहमद मीर को उनके चाचा के साथ चरमपंथियों ने उस वक़्त बंधक बना लिया था, जब सुरक्षाबलों ने गुरुवार को इस मकान को घेर लिया था और फिर यहाँ छिपे हुए चरमपंथियों से मुठभेड़ हुई.

आसपास के लोग यहाँ शोक संतप्त परिवार को सांत्वना देने आए हैं. कहा जा रहा है कि चरमपंथियों ने 12 साल के बच्चे को रिहा करने की तमाम अपीलों को ठुकराते हुए उसकी हत्या कर दी.

आतिफ़ के पिता पास में ही लगाए गए एक टेंट में बैठे हुए हैं और बिल्कुल चुप हैं. टेंट इसलिए लगाया गया है कि गुरुवार को चरमपंथियों और सुरक्षाबलों के बीच गोलीबारी में मीर का मकान रहने लायक नहीं बचा है.

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Image caption आतिफ़ अहमद मीर छठी कक्षा में पढ़ते थे

आतिफ़ की मां शमीना बानो महिलाओं से घिरी हुई हैं और वे बेटे की मौत पर ज़ार-ज़ार रो रही शमीना को सांत्वना देने की कोशिश कर रही हैं.

मीर उन पलों को याद करते हैं जब उनके बेटे को चरमपंथियों ने बंधक बनाया था.

मीर बताते हैं, "गुरुवार का दिन था, जब सुरक्षाबलों ने उनके घर को चारों तरफ़ से घेर लिया. उस वक़्त कुल मिलाकर हम आठ लोग घर के अंदर थे. परिवार के छह लोग किसी तरह घर के बाहर आने में कामयाब रहे. मेरा बेटा और मेरा भाई अब्दुल हामिद मीर को चरमपंथियों ने घर के बाहर नहीं जाने दिया और उन्हें बंधक बना लिया.''

''हमने उन्हें घर से बाहर निकालने की बहुत कोशिश की, लेकिन उन्होंने (चरमपंथियों) एक नहीं सुनी. गुलज़ार नाटकीय रूप से घर से बाहर निकलने में कामयाब रहा, लेकिन मेरा बेटा उनके चंगुल से नहीं छूट सका. हमने माइक के ज़रिए आतंकवादियों से कई अपीलें कीं कि वो मेरे बेटे को बाहर आने दें, लेकिन उन्होंने एक नहीं सुनी."

मीर ने बताया कि पुलिस अधीक्षक और पुलिस उपाधीक्षक ने भी बेटे को मुक्त कराने की हरसंभव कोशिश की. यहाँ तक कि आतिफ़ की माँ ने भी कई अपील की, गांव की वक़्फ़ कमेटी ने भी अपील की, लेकिन सब बेकार गया.

ये पूछे जाने पर चरमपंथियों ने उनके बेटे और भाई को बंधक क्यों बनाया था, मीर ने कहा, "उन्होंने (चरमपंथियों) ने सोचा होगा कि उन्हें बंधक बनाकर, सुरक्षाबल उन्हें नहीं मारेंगे. वो शाम होने का इंतज़ार कर रहे थे और मैं सोचता हूँ कि उनकी कोशिश रही होगी कि वे मेरे बेटे और भाई को ढाल बनाकर वहाँ से भाग जाएंगे, लेकिन मैं तो यही कहूँगा कि मेरा बेटा मारा गया."

पुलिस के मुताबिक़ मुठभेड़ में मारे गए दोनों चरमपंथी अली और हबीब लश्कर-ए-तैयब्बा से जुड़े थे.

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Image caption मुठभेड़ में तबाह हुआ मीर का घर

आतिफ़ की माँ का चरमपंथियों से बेटे को रिहा करने की गुज़ारिश करने का एक वीडियो भी वायरल हो रहा है. वीडियो में दिख रहा है कि शरीफ़ा बानो सेना के जवानों की मौजूदगी में चरमपंथियों से बेटे को रिहा करने की अपील कर रही हैं.

वो कहती हैं, "अल्लाह के वास्ते, पैग़ंबर मोहम्मद के वास्ते, उन्हें छोड़ दो. मैं आपसे गुज़ारिश करती हूं. मैं तुम्हें खाना दिया करती थी, अल्लाह के वास्ते, उन्हें छोड़ दो."

लेकिन घर में छिपे बैठे चरमपंथियों की तरफ़ से कोई जवाब नहीं आता है.

अतीफ़ के चाचा, गुलज़ार अहमद मीर, जो चरमपंथियों के चंगुल से बच निकलने में सफल रहे थे, एक वीडियो जो सोशल मीडिया पर चल रहा है, उसमें गुलज़ार अपनी कांपती हुई आवाज़ में बताते हैं, "मैंने दरवाज़ा बाहर से बंद कर दिया और किसी तरह घर से बाहर निकलने में कामयाब रहा. वे हमसे कहते रहे कि हम उनके साथ ही रहें. वे दोनों (चरमपंथी) घायल थे. जब मैं घर से भागा तब तक अतीफ़ ठीक था."

अब्दुल हामिद मीर कैमरा पर आकर कुछ नहीं बताना चाहते. उन्होंने मुझसे कहा, "वे हमसे कहते रहे कि हमारे (चरमपंथियों) साथ रुके रहें."

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Image caption आतिफ़ के पिता मोहम्मद शफ़ी मीर

आतिफ़ के एक और रिश्तेदार ने नाम उजागर न करने की शर्त पर कहा, "उन्होंने हमारे आतिफ़ को कितनी निर्ममता से मारा. वे जिहाद नहीं कर रहे हैं. वे दरिंदे थे."

आतिफ़ छठी क्लास में पढ़ता था और अपने परिवार में दो बहनों के बाद सबसे छोटा था. एक दशक में ये पहला मौक़ा है जब चरमपंथियों ने किसी नाबालिग को बंधक बनाया.

आतिफ़ का अंतिम संस्कार शुक्रवार को हुआ और इसमें बड़ी संख्या में लोगों ने हिस्सा लिया.

वायरल वीडियो में आतिफ़ और अब्दुल के एक और रिश्तेदार उन्हें रिहा करने की अपील करते हुए कहते हुए दिख रहे हैं, "उन्हें जाने दो. क्या ये जिहाद है? ये किस तरह का जिहाद है? अल्लाह तुम्हें यहाँ भी और वहाँ भी जलील करेगा."

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बांदीपोरा के पुलिस अधीक्षक राहुल मलिक ने शुक्रवार को मीडिया को इस मुठभेड़ की जानकारी दी.

उन्होंने कहा, "ये अचानक हुई मुठभेड़ थी. शुरुआत में हमने पहले दो घंटों में छह लोगों को बचाया. फिर हमें पता चला कि दो और लोग घर के अंदर हैं और उन्हें दो आतंकवादियों ने बंधक बना लिया है. इन हालात में हमने उन्हें बाहर निकालने की कोशिश की और इसके लिए हमने कई कोशिशें कीं.''

''एक बंधक बाहर आया था, हमें उससे पता लगा कि अली (चरमपंथी) ने आतिफ़ को बंधक बना रखा है और उसे बाहर नहीं आने दे रहा है. जब हमने बिल्डिंग को उड़ाया, उससे पहले ही उन्होंने लड़के की हत्या कर दी थी."

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पुलिस अधीक्षक ने ये भी बताया, "अली (चरमपंथी) किसी लड़की से शादी करना चाहता था और चाहता था कि लड़की इस मकान में आए. लेकिन परिवार के लोगों ने लड़की को कहीं और भेज दिया था.''

''उसका कहना था कि वो तभी इस घर से बाहर जाएगा, जब लड़की को यहाँ लाया जाएगा. जब हमें आतंकवादियों के मीर के इस मकान में छिपे होने की जानकारी मिली, उस वक़्त तक ये बातें चल रही थीं. इसके बाद हमने इस घर को घेर लिया."

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पुलिस ने दावा किया कि अली कई नागरिकों की हत्या में शामिल था और इस इलाक़े में साल 2017 से सक्रिय था.

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