लोकसभा चुनाव 2019 : केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह के स्वाभिमान पर किसने की चोट?

  • 26 मार्च 2019
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केंद्रीय राज्यमंत्री और बिहार की बेगूसराय सीट से भारतीय जनता पार्टी के उम्मीदवार बनाए गए गिरिराज सिंह नाराज़ हैं.

विरोधियों के ख़िलाफ अपने विवादित बयानों को लेकर चर्चा में रहने वाले गिरिराज सिंह ने इस बार अपनी ही पार्टी के ख़िलाफ मोर्चा खोल दिया है.

गिरिराज सिंह ने सोमवार को भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश नेतृत्व पर अपने 'स्वाभिमान को ठेस पहुंचाने' का आरोप लगाया और सवाल किया कि लोकसभा सीट बदलने के पहले उन्हें भरोसे में क्यों नहीं लिया गया?

साल 2014 में गिरिराज सिंह ने बिहार की नवादा लोकसभा सीट से चुनाव लड़ा था और जीत हासिल की थी. बाद में उन्हें केंद्र सरकार में लघु और सूक्ष्म उद्योग मंत्रालय की जिम्मेदारी भी दी गई. लेकिन इस बार पार्टी ने उन्हें नवादा की जगह बेगूसराय सीट से उम्मीदवार बनाया है.

बिहार में भारतीय जनता पार्टी, नीतीश कुमार की जनता दल यूनाइटेड और राम विलास पासवान की लोक जनशक्ति पार्टी के साथ गठबंधन कर चुनाव लड़ रही है. गठबंधन के बीच हुए सीट बंटवारे में नवादा सीट लोक जनशक्ति पार्टी के हिस्से में है.

गिरिराज सिंह का आरोप है कि प्रदेश नेतृत्व ने सीट बदलने के पहले उन्हें भरोसे में नहीं लिया.

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क्या है शिकायत?

गिरिराज सिंह ने एक टीवी चैनल को सोमवार को दिए इंटरव्यू को अपने ट्विटर अकाउंट से रीट्वीट किया है.

इसमें उन्होंने कहा, "मुझे प्रदेश नेतृत्व से तकलीफ है."

क्या वो चुनाव नहीं लड़ने का एलान भी कर सकते हैं, इस सवाल पर गिरिराज सिंह ने कहा, "बेगूसराय से चुनाव लड़ना मेरे लिए सौभाग्य होगा लेकिन स्वाभिमान के साथ. मैं स्वाभिमान से समझौता नहीं कर सकता."

एक और चैनल से बात करते हुए गिरिराज सिंह ने कहा, "किसी और सांसद या मंत्री को नहीं हटाया गया है. मैं प्रदेश नेतृत्व से ये जानना चाहता हूं कि मुझे किस परिस्थिति में हटाया गया है?"

Image caption बिहार की बेगूसराय सीट से किन-किन जातियों के रहे हैं सांसद

बेगूसराय में चुनौती मुश्किल?

गौरतलब ये भी है कि साल 2014 में गिरिराज सिंह बेगूसराय सीट से चुनाव लड़ना चाहते थे. उस वक़्त उन्हें नवादा सीट से उम्मीदवार बनाया गया और बेगूसराय से भोला सिंह ने बीजेपी के टिकट पर चुनाव लड़ा और लोकसभा के लिए चुने गए. बीते साल भोला सिंह का निधन हो गया और उनकी जगह पार्टी ने गिरिराज सिंह को टिकट दिया है.

बेगूसराय की सीट जातीय समीकरण के लिहाज से गिरिराज सिंह के माकूल मानी जा रही है.

गिरिराज सिंह भूमिहार जाति से हैं. बिहार की बेगूसराय सीट पर भूमिहार वोटरों की बड़ी संख्या है. लेकिन जानकार मौजूदा चुनाव में इस जाति के वोटों में सेंध लगने की आशंका जाहिर कर रहे है.

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सीपीआई ने भूमिहार जाति से ही आने वाले और दिल्ली की जवाहर लाल नेहरू यूनिवर्सिटी छात्र संघ के पूर्व अध्यक्ष कन्हैया कुमार को इसी सीट से अपना उम्मीदवार बनाया है.

टिकट के एलान के साथ ही कन्हैया कुमार ने दावा किया कि उनका मुक़ाबला राष्ट्रीय जनता दल नहीं बल्कि गिरिराज सिंह से है. जानकारों का कहना है कि कन्हैया कुमार अपनी जाति के जितने वोटरों को साथ ले पाएंगे, गिरिराज सिंह का पक्ष उतना ही कमजोर होगा.

ऐसे में कभी सुरक्षित मालूम हो रही ये सीट गिरिराज सिंह के लिए मुश्किल दिखने लगी है.

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बदल गए समीकरण

उनकी सीट बदलने को पार्टी के प्रदेश संगठन में अर्से से चली आ रही राजनीति से भी जोड़कर देखा जा रहा है. साल 2014 के लोकसभा चुनाव के पहले जब नीतीश कुमार ने एनडीए से अलग होने का फ़ैसला किया था, तब गिरिराज सिंह बीजेपी के उन गिने चुने नेताओं में थे जिन्होंने नरेंद्र मोदी के समर्थन में नीतीश कुमार के ख़िलाफ मोर्चा खोला था.

पहली बार सांसद बनने के बाद भी उन्हें नरेंद्र मोदी मंत्रिमंडल में जगह मिली तो इसे भी मोदी के समर्थन में चलाए गए अभियान से जोड़कर देखा गया.

लेकिन अब स्थितियां बदल गईं हैं. नीतीश कुमार एनडीए का हिस्सा हैं और दावा कर रहे हैं कि वो 'नरेंद्र मोदी को दोबारा प्रधानमंत्री बनाने के लिए बिहार में एनडीए को ज्यादा से ज्यादा सीटों पर जीत दिलाएंगे.'

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नाराज़गी से क्या हासिल

हालांकि, भारतीय जनता पार्टी के नेता गिरिराज सिंह की नाराज़गी के मुद्दे पर खुलकर कुछ भी कहने को तैयार नहीं हैं.

बीजेपी के एक और कद्दावर नेता शत्रुघ्न सिन्हा ने पहले ही पार्टी के ख़िलाफ मोर्चा खोला हुआ है. बीजेपी ने पटना साहिब सीट से सिन्हा की जगह केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद को उम्मीदवार बनाया है. उसके बाद से ऐसी चर्चाएं ज़ोर पकड़ चुकी हैं कि शत्रुघ्न सिन्हा किसी और पार्टी के टिकट पर उन्हें चुनौती देते दिख सकते हैं.

बदली परिस्थितियों में बीजेपी के प्रदेश स्तरीय नेता गिरिराज सिंह को लेकर साफ़-साफ़ कुछ भी कहने से बच रहे हैं.

बीजेपी प्रवक्ता निखिल आनंद ने बीबीसी के सहयोगी नीरज प्रियदर्शी से कहा, जहां तक मेरी समझ है गिरिराज सिंह बीजेपी के सबसे लॉयल (वफ़ादार) नेताओं में से एक हैं. अगर पार्टी ने (बेगूसराय से) उनका नाम तय किया है तो वो पार्टी के फ़ैसले के ख़िलाफ कभी नहीं जाएंगे."

नाराज़गी जाहिर करने के साथ गिरिराज सिंह भी ऐसे ही संकेत दे रहे हैं. प्रदेश नेतृत्व को आड़े हाथों लेने वाले गिरिराज कह रहे हैं, "केंद्रीय नेतृत्व से मुझे कोई शिकवा-शिकायत नहीं है."

बीजेपी में ही कई नेता इस बयान को पार्टी की 'पावर पॉलिटिक्स' में भाव बढ़ाने के तरीके के तौर पर देख रहे हैं.

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