जब महागठबंधन के प्रेस कॉन्फ्रेंस में कांग्रेस का इंतज़ार हो रहा था

  • 29 मार्च 2019
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बिहार में शुक्रवार को महागठबंधन के उम्मीदवारों की घोषणा तो हो गई लेकिन इस बार भी प्रेस कॉन्फ़्रेंस को लेकर काफ़ी ऊहापोह की स्थिति रही.

प्रेस वार्ता का वक़्त सुबह 10 बजे तय किया गया था लेकिन इस बार राष्ट्रीय जनता दल के नते तेजस्वी यादवा के अलावा सहयोगी दलों के कोई बड़े नेता नहीं आए. पिछली बार जब प्रेस कॉन्फ़्रेंस हुई थी तो तेजस्वी नहीं आए थे.

पत्रकार नेताओं के इंतज़ार में थे. उनकी बैचेनी से उभरे सवालों के जवाब जीतन राम मांझी की पार्टी 'हम' के प्रवक्ता दानिश दे रहे थे.

मंच पर कुर्सियां सजी थीं, लेकिन ख़ाली. थोड़ी देर बाद विभिन्न घटक दलों के कुछ नेता आने लगे, लेकिन वो पिछली क़तार में लगी कुर्सियों पर बैठे.

सभी को पहली क़तार में बैठने वाले नेताओं का इंतज़ार था. घंटा दर घंटा बीतता गया. इंतज़ार प्रतिपक्ष के नेता तेजस्वी यादव, हम के राष्ट्रीय अध्यक्ष जीतन राम मांझी, वीआईपी पार्टी के मुकेश सहनी, रालोसपा के उपेंद्र कुशवाहा और कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष मदन मोहन झा का हो रहा था.

मीडियाकर्मी अपने साज़ो-सामान के साथ समय पर आ गए थे. वो हर दस मिनट की देरी पर अपनी नाराज़गी जताते.

किसी को दूसरे असाइनमेंट पर जाना था तो किसी की बैटरी नेताजी के इंतज़ार में ख़त्म हो रही थी.

तय समय से एक घंटा बीत जाने के बाद भी प्रेस कॉन्फ्रेंस का कोई अता-पता नहीं था.

इसके पहले भी गुरुवार शाम में छह बजे महागठबंधन की प्रेस वार्ता बुलाई गई थी, लेकिन आख़िरी समय में उसे कैंसिल कर दिया गया.

पत्रकारों को डर था कि कहीं शुक्रवार को बुलाई गई प्रेस कॉन्फ्रेंस भी कैंसिल न कर दी जाए.

दिल्ली के मीडिया दफ्तरों से यहां मौजूद पत्रकारों के पास एक के बाद एक कॉल आ रहे थे. तरह-तरह के क़यास लगाए जाने लगे थे.

काफ़ी इंतज़ार के बाद सभी दलों के प्रतिनिधि यहां पहुंचे सिवाय कांग्रेस के. क़यासों का बाज़ार गर्म होने लगा था, बात पार्टी की नाराज़गी पर होने लगी थी.

बेसब्र मीडिया को हर दो मिनट पर कहा जाता, "थोड़ा इंतज़ार कीजिए. आख़िरी वक़्त की बातचीत चल रही है. सबकुछ विधिवत होगा."

11 बजे के बाद ये ख़बर फ्लैश हुई कि तेजस्वी यादव के आवास पर सभी घटक दलों के शीर्ष नेताओं की बातचीत चल रही है.

वार्ता आख़िरी दौर में है और वहां से तेजस्वी उन तमाम नेताओं के साथ सीधे होटल आएंगे और प्रेस से मुख़ातिब होंगे.

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थोड़ा इंतज़ार...

आख़िर क्या बातचीत बाक़ी रह गई थी जो अब तक नहीं हो पायी थी? ये सवाल हमनें वहां मौजूद लगभग तमाम नेताओं से पूछा. सबका एक ही जवाब मिला कि "थोड़ी देर में सबकुछ स्पष्ट हो जाएगा."

लेकिन अंदरख़ाने से जो ख़बर निकलकर आ रही थी वो ये कि कांग्रेस, रालोसपा और वीआईपी पार्टी के बीच अभी तक सीटों को लेकर सहमति नहीं बन पायी हैं.

इसी मौर्या होटल में प्रेस वार्ता कर समझौते के तहत राजद को 20 सीटें (कोटे से एक भाकपा माले को), कांग्रेस को नौ, रालोसपा को 05, हम को तीन और वीआईपी पार्टी को तीन सीट देने की घोषणा की गई थी.

इसके बाद अलग-अलग मौक़ों पर महागठबंधन ने पहले और दूसरे चरण के अपने उम्मीदवारों की घोषणा भी की.

लेकिन कथित रूप से सामाजिक न्याय, समाजवादी सरोकार और घर्म निरपेक्षता के महागठबंधन में शुरु से लेकर अब तक काफ़ी खींचतान देखने को मिली है. कभी सीटों के बंटवारे को लेकर तो कभी उम्मीदवार और उम्मीदवारी को लेकर.

स्थानीय मीडिया में महागठबंधन के टूट की कई बार ख़बरें आयीं. लेकिन हर बार गठबंधन के नेता इन ख़बरों से इनकार करते रहे. लेकिन वही नेता दूसरे मौक़ों पर सीटों के बंटवारे और उम्मीदवारों के चयन पर नाराज़गी भी जता चुके हैं. कई बार महागठबंधन के अंदर असंतोष के स्वर उभरे हैं.

दो चरणों के नामांकन हो जाने के बाद भी अभी तक कुछ ऐसी सीटें और उम्मीदवार थे, जिनपर घटक दलों के बीच लगातार जिच चली हैं. वो जिच आज तक क़ायम है.

मसलन कन्हैया कुमार की महागठबंधन के उम्मीदवारी का मसला काफ़ी सुर्खियों में रहा था. हालांकि, कन्हैया को फिर सीपीआई ने बेगूसराय से अपना उम्मीदवार घोषित कर सारी जिरहों पर विराम लगा दिया और उसी दिन यह स्पष्ट भी हो गया कि लेफ्ट पार्टियां महागठंबधन से ख़ुश नहीं हैं.

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जब दरभंगा सीट के लिए घोषणा हुई

यह प्रेस कॉन्फ्रेंस इसलिए भी महत्वपूर्ण था क्योंकि राजद, कांग्रेस और लेफ्ट पार्टियों के बीच काफ़ी समय से कुछ सीटों को लेकर विवाद चल रहा था. इनमें दरभंगा, मधुबनी, सुपौल, बेगूसराय, खगड़िया और काराकाट लोकसभा सीटें शामिल थीं.

क़रीब डेढ़ घंटे की देरी के बाद तेजस्वी यादव सहयोगी दलों के तमाम नेताओं के साथ मौर्या होटल पहुंचे. लेकिन अब भी कांग्रेस नेतृत्व का कोई बड़ा चेहरा मंच पर नहीं दिख रहा था. हालांकि नरेंद्र सिंह बतौर कांग्रेस के प्रतिनिधि प्रेस वार्ता में मौजूद थे.

प्रेस वार्ता शुरु हो गई. तेजस्वी यादव ने देरी के लिए क्षमा मांगते हुए आते ही मंच से यह ऐलान किया कि वे कांग्रेस और रालोसपा के उम्मीदवारों के नाम नहीं घोषित करेंगे. उनका केंद्रीय नेतृत्व ख़ुद यह काम करेगा.

इसके बाद एक-एक करके तेजस्वी ने सीटों के नाम पढ़ने शुरु कर दिए. कई नाम तो पहले से तय माने जा रहे थे. लेकिन ये देखना अभी भी बाक़ी था कि महागठबंधन उन नामों पर औपचारिक मोहर लगाता है या नहीं.

महागठबंधन की सबसे चर्चित दरभंगा सीट से उम्मीदवार के नाम के एलान का इंतज़ा सबको था, क्योंकि वहां से भाजपा के कीर्ति आज़ाद का टिकट कटा है.

उन्होंने टिकट की आस में कांग्रेस का दामन थामा, मगर दरभंगा सीट समझौते में राजद के खाते में चली गई. सीट शेयरिंग के फ़ैसले के बाद कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष समेत तमाम नेताओं के बयान आ चुके हैं कि दरभंगा सीट कांग्रेस के खाते में जानी चाहिए थी.

प्रेस वार्ता में तेजस्वी यादव ने दरभंगा सीट पर उम्मीदवार का नाम अब्दुल बारी सिद्दिक़ी घोषित किया. इस तरह महागठबंधन से दरभंगा सीट पर कीर्ति आज़ाद की दावेदारी ख़त्म हो गई.

सीटों पर संग्राम

सुपौल से कांग्रेस उम्मीदवार रंजीत रंजन को लेकर पसोपेश था, क्योंकि उनके पति पप्पू यादव ने मधेपुरा से चुनाव लड़ने के लिए नामांकन करा लिया है. जहां वे महागठबंधन के उम्मीदवार शरद यादव के ख़िलाफ़ लड़ेंगे.

राजद का इसपर कहना है कि पप्पू यादव और रंजीत रंजन अलग नहीं है, अगर पप्पू मधेपुरा में शरद यादव के ख़िलाफ़ लड़ेंगे तो राजद सुपौल में रंजीत रंजन के ख़िलाफ़ भी अपना उम्मीदवार उतारेगा.

लेकिन इन तमाम अटकलों पर विराम लगाते हुए सुपौल सीट से बतौर कांग्रेस उम्मीदवार रंजीत रंजन के नाम का ही एलान हुआ, जबकि मधेपुरा सीट से राजद ने शरद यादव को अपना उम्मीदवार बनाया है.

इसी तरह खगड़िया की लोकसभा सीट लेफ्ट पार्टियां अपने लिए मांग रही थीं, जबकि महागठबंधन में वो सीट वीआईपी पार्टी के खाते में गई है.

यहां से मुकेश सहनी को औपचारिक रूप कैंडिडेट बनाया गया है. जबकि लेफ्ट राजद की निलंबित नेत्री कृष्णा यादव को अपना उम्मीदवार पेश कर रही थी. हालांकि कृष्णा ने शुक्रवार की सुबह ही प्रेस रिलीज़ जारी कर सीपीआई से चुनाव लड़ने से मना कर दिया था.

राजद के कोटे की एकमात्र सीट जो सीपीआई (माले) के खाते में गई है, वो आरा है. जहां से राजू यादव उम्मीदवार होंगे.

सबसे बड़ा बदलाव पटना साहिब की सीट पर हुआ है, जो सीट पहले राजद के खाते में थी, लेकिन अब कांग्रेस के खाते में चली आई है.

हालांकि यहां से उम्मीदवार कौन होगा इसकी घोषणा अभी तक नहीं हुई है. ऐसी चर्चा है कि शत्रुघ्न सिन्हा के कांग्रेस में शामिल होने के कारण पटना साहिब सीट कांग्रेस को दी गई है.

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