सत्ता में आए तो नीति आयोग ख़त्म कर देंगे: राहुल गांधी

  • 29 मार्च 2019
राहुल गांधी इमेज कॉपीरइट AFP

कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने नीति आयोग की संरचना और भूमिका पर सवाल खड़े करते हुए कहा है कि अगर उन्हें सत्ता मिली तो वे नीति आयोग को ख़त्म कर देंगे.

एक ट्वीट के ज़रिए राहुल गांधी ने कहा कि नीति आयोग से कोई भला नहीं हो रहा है, ये सिर्फ प्रधानमंत्री मोदी के लिए मार्केटिंग प्रेजेंटेशन और झूठे डेटा बनाने का काम करता है.

ट्वीट में राहुल गांधी लिखते हैं कि हम नीति आयोग की जगह एक ऐसा प्लानिंग कमीशन बनाएंगे जिसमें जानेमाने अर्थशास्त्रियों और विशेषज्ञों के साथ स्टाफ की संख्या 100 से भी कम होगी.

इमेज कॉपीरइट Twitter

उल्लेखनीय है कि नीति आयोग अपने मौजूदा स्वरूप में एक जनवरी 2015 से अस्तित्व में आया है जिसे पहले प्लानिंग कमीशन या योजना आयोग के नाम से जाना जाता था.

नीति यानी नेशनल इंस्टीट्यूशन फॉर ट्रांसफॉर्मिंग इंडिया, को भारत सरकार का 'प्रीमियर पॉलिसी थिंक टैंक' माना जाता है.

योजना आयोग का गठन मार्च 1950 में किया गया था. इसका मुख्य कार्य भारत सरकार के लिए पंचवर्षीय योजनाएं बनाना था.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 15 अगस्त 2014 को लाल क़िले से अपने संबोधन में योजना आयोग को अप्रासंगिक बताते हुए उसकी जगह नीति आयोग की शक्ल में नई संस्था बनाने की घोषणा की थी. तब कांग्रेस ने इस पर अपना एतराज़ जताया था.

सोशल मीडिया की प्रतिक्रिया

राहुल गांधी के इस ट्वीट के बाद सोशल मीडिया पर कई तरह की प्रतिक्रियाएं आने लगीं. कई लोग नीति आयोग की कमियां गिनाने लगे तो वहीं कुछ ट्वीटर अकाउंट से राहुल गांधी के इस विचार की आलोचना भी की गई.

दिवेश सिंह ने ट्वीट किया, ''नीति आयोग ने सिर्फ़ मोदी सरकार की अनीतियों का "असफलतापूर्वक" बचाव किया है अपने कार्यकाल में. इनके अधिकारियों की प्रेस कॉन्फ्रेंस अपने आप में एक कॉमेडी होती है. और वैसे भी ....जब चीज़ें बदलती हैं तो सब कुछ बदलता है.''

सीमा त्रिवेदी ने लिखा है, ''राहुल गांधी थोड़ा बड़े हो जाओ और नीति आयोग के बारे में अच्छे से समझो. अपने बगल वाले की बताई बातों को बेवकूफों की तरह मत दोहराओ.''

दिल्ली हाईकोर्ट के वकील सिद ने राहुल गांधी की इस घोषणा की तारीफ की है और लिखा है कि नीति आयोग सिर्फ बीजेपी के प्रोपागैंडा को बढ़ाने का काम करने लगा था.

चौकीदार अंशु नामक ट्विटर हैंडल से लिखा गया, ''अराजकतावादी रागा कभी भी किसी स्वतंत्र संस्था की तारीफ नहीं कर सकते. नीति आयोग में अलग-अलग क्षेत्रों के विशेषज्ञ शामिल हैं.''

नीति आयोग की मौजूदा संरचना

इमेज कॉपीरइट PTI

भारत का प्रधानमंत्री नीति आयोग का अध्यक्ष होता है.

गवर्निंग काउंसिल में राज्यों के मुख्यमंत्री और केन्द्रशासित प्रदेशों के उपराज्यपाल होते हैं.

विशिष्ट मुद्दों और ऐसे आकस्मिक मामले, जिनका संबंध एक से अधिक राज्य या क्षेत्र से हो, को देखने के लिए क्षेत्रीय परिषद होती है. ये परिषदें विशिष्ट कार्यकाल के लिए बनाई जाती हैं.

भारत के प्रधानमंत्री के निर्देश पर क्षेत्रीय परिषदों की बैठक होती है और इनमें संबंधित क्षेत्र के राज्यों के मुख्यमंत्री और केन्द्र शासित प्रदेशों के उपराज्यपाल शामिल होते हैं. इनकी अध्यक्षता नीति आयोग के उपाध्यक्ष करते हैं.

संबंधित कार्य क्षेत्र की जानकारी रखने वाले विशेषज्ञ और कार्यरत लोग, विशेष आमंत्रित के रूप में प्रधानमंत्री द्वारा नामित किए जाते हैं.

पूर्णकालिक संगठनात्मक ढांचे में (अध्यक्ष के तौर पर प्रधानमंत्री के अलावा) एक उपाध्यक्ष होता है जिसे प्रधानमंत्री नियुक्त करते हैं.

इसमें दो तरह के सदस्य होते हैं- पूर्णकालिक और अंशकालिक.

अंशकालिक सदस्यों में अग्रणी विश्वविद्यालय, शोध संस्थानों और संबंधित संस्थानों से अधिकतम दो पदेन सदस्य होते हैं. केन्द्रीय मंत्रिपरिषद से अधिकतम चार सदस्य प्रधानमंत्री द्वारा नामित किए जाते हैं.

इसके अलावा एक मुख्य कार्यकारी अधिकारी होता है जो भारत सरकार के सचिव स्तर का अधिकारी होता है. उसे एक निश्चित कार्यकाल के लिए प्रधानमंत्री नियुक्त करते हैं.

इसके अलावा आवश्यकता के अनुसार एक सचिवालय भी होता है.

बेरोज़गारी की लीक हुई रिपोर्ट पर नीति आयोग की सफ़ाई

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)

बीबीसी न्यूज़ मेकर्स

चर्चा में रहे लोगों से बातचीत पर आधारित साप्ताहिक कार्यक्रम

सुनिए