मेजर गोगोई का कोर्ट मार्शल पूरा हुआ, मिलेगी यह सज़ाः प्रेस रिव्यू

  • 1 अप्रैल 2019
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2017 में 'मानव ढाल' विवाद की वजह से सुर्खियों में आए मेजर लीतुल गोगोई के ख़िलाफ़ कोर्ट मार्शल की प्रक्रिया पूरी कर ली गई है.

इंडियन एक्सप्रेस में प्रकाशित समाचार के अनुसार पिछले साल श्रीनगर में एक स्थानीय महिला के साथ दोस्ती करने के लिये सजा के तौर पर उन्हें वरिष्ठता में कटौती का सामना करना पड़ सकता है. उन्हें वरिष्ठता में 6 माह का नुकसान उठाना पड़ सकता है.

अख़बार के मुताबिक अधिकारियों ने यह जानकारी दी है. अपनी यूनिट से अनधिकृत रूप से अनुपस्थित रहने के लिये उनके वाहन चालक समीर मल्ला के कोर्ट मार्शल की प्रक्रिया भी हाल ही में कश्मीर घाटी में पूरी हुई है और उसे कड़ी फटकार लगाई जा सकती है.

अब एसपी की निगरानी में चलेगा सीआरपीएफ़ का काफिला

पुलवामा में 14 फ़रवरी को हुए हमले के बाद अर्धसैनिक बलों की सुरक्षा को लेकर एक बड़ा फैसला हुआ है.

नवभारत टाइम्स में प्रकाशित समाचार के अनुसार केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) मुख्यालय की ओर से लिए गए एक निर्णय के अनुसार, अब कश्मीर में केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) के काफिलों का नेतृत्व अब से एसपी रैंक का अधिकारी करेगा और काफिले में एक समय पर अधिकतम 40 वाहन शामिल होंगे.

पुलवामा हमले के बाद केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल के मुख्यालय की ओर से जवानों को एक एसओपी जारी की गई है, जिसके तहत कुछ ज़रूरी दिशा-निर्देश दिए गए हैं.

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Image caption पुलवामा में सीआरपीएफ़ काफिले पर हुए हमले में 40 से अधिक जवानों की मौत हो गई थी.

लिंचिंग के अभियुक्त योगी की रैली में दिखे

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने रविवार को गौतमबुद्ध निगर के बिसहड़ा गांव में एक रैली की. इसी गांव में साल 2015 में मोहम्मद अखलाख की पीट-पीट कर हत्या कर दी गई थी.

द हिंदू में प्रकाशित समाचार के अनुसार योगी आदित्यनाथ की इस रैली में अखलाख को पीट-पीट कर मारने की हत्या में अभियुक्त बनाए लोग भी देखे गए. विशाल नामक मुख्य अभियुक्त अन्य अभियुक्तों के साथ इस रैली में सबसे पहली पंक्ति में बैठे हुए थे.

अखबार लिखता है कि इन अभियुक्तों ने कहा कि उन पर झूठे आरोप लगाए गए थे. इसके साथ ही उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा कि अब वे ज़मानत पर बाहर हैं अब उनके साथ कुछ नहीं होगा.

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Image caption मोहम्मद अखलाख

नोटबंदी के बाद संदिग्ध लेन-देन की संख्या बढ़ी

नोटबंदी के बाद संदिग्ध लेन-देन की संख्या में अब तक की सर्वाधिक वृद्धि दर्ज की गई है.

जनसत्ता में प्रकाशित समाचार के अनुसार एक रिपोर्ट के मुताबिक साल 2016 में नोटबंदी के कदम से संदिग्ध लेन-देन की संख्या बढ़कर 14 लाख तक पहुंच गई है.

बैंकों और अन्य वित्तीय संस्थानों की तरफ से बताई गई यह संख्या पहले के मुकाबले 14 गुना बढ़ गई है.

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