तेज प्रताप को परिवार, पत्नी और आरजेडी से विद्रोह कर क्या मिला

  • 2 अप्रैल 2019
बिहार

लालू प्रसाद यादव के बड़े बेटे तेज प्रताप यादव ने सोमवार शाम पटना में एक प्रेस कांफ्रेंस करके लालू राबड़ी मोर्चा का गठन का एलान किया.

उन्होंने जहानाबाद और शिवहर से अपने उम्मीदवार खड़े करने की घोषणा कर दी. उन्होंने ये भी बताया कि शिवहर से अंगेश कुमार और जहानाबाद से चंद्र प्रकाश उनके मोर्चे के उम्मीदवार हैं.

उन्होंने ये भी कहा कि सारण की सीट लालू की पारंपरिक सीट रही है और वे अपनी माता राबड़ी देवी से अनुरोध कर रहे हैं कि वे वहां से चुनाव लड़ें, ऐसा नहीं होने पर उन्होंने वहां से खुद को चुनाव मैदान में उतारने की बात कही.

Image caption सोमवार को प्रेस कॉन्फ़्रेंस के दौरान तेज प्रताप

सारण से आरजेडी ने तेज प्रताप के ससुर चंद्रिका राय को उम्मीदवार बनाया है.

हालांकि जब पत्रकारों ने तेज प्रताप यादव से पूछा कि क्या वे आरजेडी से अलग हो गए हैं तो उन्होंने कहा कि आरजेडी और लालू राबड़ी मोर्चा एक ही है और तेजस्वी उनके अर्जुन हैं.

तेज प्रताप और तेजस्वी की उम्र में महज एक साल का अंतर है. तेज प्रताप 30 साल के हैं और तेजस्वी 29 साल के.

Image caption तेज प्रताप के नए राजनैतिक फ़्रंट लालू-राबड़ी मोर्चा का पोस्टर

दोनों बेटों को राजनीति में पिता लालू प्रसाद यादव ने 2013 में पटना की परिवर्तन रैली में लॉन्च किया था. मतलब न दोनों की उम्र ज़्यादा है और न ही राजनीति में आए ज़्यादा दिन हुए हैं.

लालू प्रसाद के परिवार को क़रीब से नज़र रखने वाले लोग इस बात को बड़े भरोसे से कहते हैं कि तेजस्वी के प्रति लालू का स्नेह तेजप्रताप की तुलना में हमेशा से ज़्यादा रहा है.

वहीं मां राबड़ी देवी ने इस बात को हमेशा सुनिश्चित करने की कोशिश की कि तेज प्रताप को ऐसा महसूस ना हो कि उसकी उपेक्षा हो रही है.

2015 के बिहार विधानसभा चुनाव में तेजस्वी और तेज प्रताप चुनावी मैदान में उतरे और दोनों ने जीत दर्ज की. तेजस्वी बिहार के उपमुख्यमंत्री बने और तेज प्रताप स्वास्थ्य मंत्री. कहा जाता है कि लालू के इस फ़ैसले से तेज प्रताप ख़ुश नहीं थे और उसके बाद से ही उनके मन में उपेक्षा का भाव घर करने लगा.

लालू प्रसाद यादव जेल में हैं और दोनों भाइयों के रिश्तों कड़वाहट सतह पर आ गई है. तेज प्रताप ने छात्र आरजेडी के संरक्षक पद से इस्तीफ़ा दे दिया है.

अपने पसंद के व्यक्तियों को लोकसभा चुनाव में राष्ट्रीय जनता दल का टिकट नहीं मिलने के कारण तेज प्रताप ने ऐसा किया है. इस्तीफ़ा देने के बाद तेज प्रताप ने ट्वीट कर कहा- नादान हैं वो जो उन्हें नादान समझते हैं.

स्थिति तब और बिगड़ गई जब तेजस्वी यादव ने प्रेस कॉन्फ़्रेंस कर महागठबंधन के उम्मीदवारों की घोषणा की. आरजेडी की इस घोषणा में बताया गया कि पूर्व मंत्री चंद्रिका राय सारण से बीजेपी के राजीव प्रताप रूड़ी को चुनौती देंगे.

कहा जा रहा है कि चंद्रिका राय को टिकट मिलना तेज प्रताप के लिए एक और झटका था. चंद्रिका राय तेज प्रताप के ससुर हैं. तेज प्रताप ने एश्वर्या राय से तलाक़ की अर्जी दे रखी है.

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चंद्रिका राय का नाम सार्वजनिक होते ही अफ़वाह उड़ने लगी कि तेज प्रताप सारण अपने ससुर के ख़िलाफ़ निर्दलीय उम्मीदवार को तौर पर चुनाव लड़ेंगे. हालांकि चंद्रिका राय ने बीबीसी से कहा कि उनके दामाद सारण में उनके ख़िलाफ़ चुनाव नहीं लड़ेंगे. बाद में तेज प्रताप ने भी कहा कि कौन कहां से चुनाव लड़ रहा है यह उनकी चिंता नहीं है.

हालांकि तेज प्रताप ने शिवहर और जहानाबाद से दो प्रत्याशियों को उतारा है. शिवहर से आरजेडी ने अभी तक उम्मीदवार की घोषणा नहीं की है. दोनों भाइयों में मतभेद और विवादों पर तेजस्वी बोलने से बचते हैं. पिछले हफ़्ते शुक्रवार को पत्रकारों ने दोनों भाइयों में कलह पर सवाल पूछा तो तेजस्वी का जवाब था, ''आपको जो कहना है कहिए. इससे मेरे ऊपर कोई प्रभाव नहीं पड़ता है. आप अपनी टीआरपी के लिए ये सब कर रहे हैं.''

चंद्रिका राय का कहना है कि सब कुछ ठीक हो जाएगा. वो कहते हैं, ''जहानाबाद और शिवहर की सीटों को लेकर भी कोई विवाद नहीं है. सारी चीज़ें कुछ दिनों में ठीक हो जाएंगी. परिवार में विवाद का असर राजनीति पर नहीं पड़ेगा. हम मिलकर काम कर रहे हैं और आगे भी ऐसा ही होगा.''

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राष्ट्रीय जनता दल के प्रवक्ता शक्ति सिंह यादव भी ऐसा ही मानते हैं. उनका भी यही कहना है कि आने वाले कुछ दिनों में सब कुछ ठीक हो जाएगा. तेजप्रताप को स्टार प्रचारक नहीं बनाए पर शक्ति यादव कहते हैं कि यह पार्टी का फ़ैसला है.

तेजस्वी अब लालू प्रसाद यादव के स्वाभाविक उत्तराधिकार के रूप में उभर चुके हैं.

आरजेडी के एक और प्रवक्ता का कहना है कि तेजस्वी के स्वाभाविक उत्तारधिकार के रूप में स्थापित होने से तेज प्रताप सहज नहीं हैं. वो कहते हैं, ''उनके मन में इस बात की कसक है कि वो बड़े हैं इसलिए ये ज़िम्मेदारी उन्हें मिलनी चाहिए थी. लेकिन उनको ये बात भी समझनी चाहिए कि नेतृत्व क्षमता उम्र के आधार पर नहीं आती है. लालू जी ने जो फ़ैसला लिया वो किसी से भेदभाव पूर्ण नहीं था बल्कि विवेकपूर्ण फ़ैसला था.''

उस प्रवक्ता ने नाम नहीं बताने की शर्त पर कहा, ''तेज प्रताप की शादी भी लालू परिवार के लिए एक तरह मुसीबत बन गई. अगर हैसियत के लिहाज़ से देखें तो यह बेमेल शादी नहीं है. बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री दारोगा प्रसाद राय तेज प्रताप की पत्नी एश्वर्या के बाबा थे. वो कांग्रेस के बड़े नेता थे और यह परिवार काफ़ी संपन्न रहा है. इस लिहाज से ये शादी बेमेल नहीं है.''

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वो कहते हैं, ''अगर पढ़ाई के लिहाज़ से देखें तो ये शादी बेमेल ज़रूर लगती. तेजप्रताप कॉलेज ड्रॉप आउट हैं जबकि एश्वर्या ने एमबीए किया है. दूसरी बात यह है कि चंद्रिका राय लालू प्रसाद यादव के चेले रहे हैं. तेज प्रताप को बख़ूबी पता होगा कि शादी से पहले चंद्रिका राय की उनके घर में कितनी तवज्जो थी.''

''जब शादी हुई तो रिश्ते बदले. लेकिन तेज प्रताप ने बदले रिश्ते को स्वीकार नहीं किया. एश्वर्या के लिए तेजप्रताप हैसियत में कोई बड़े नहीं हैं जबकि चंद्रिका राय के लिए लालू की हैसियत ज़रूर बड़ी थी. तेजप्रताप लालू की हैसियत के आईने में एश्वर्या को नहीं देख सकते थे क्योंकि एश्वर्या बराबरी के व्यवहार से कम नहीं चाहती होंगी. दिक़्क़त यहीं हो रही है.''

हालांकि वो कहते हैं कि पूरे विवाद में राबड़ी देवी सबसे अहम भूमिका अदा कर रही हैं. लालू परिवार को जानने वाले लोगों का कहना है कि राबड़ी ने चीज़ों को संभाल कर रखा है नहीं तो तेज प्रताप का बागी तेवर और मुश्किल खड़ा कर सकता था.

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पूरे विवाद में आरजेडी के शुभचिंतकों का कहना है कि अगर लालू जेल में ना होते तो सब कुछ नियंत्रण में होता. ये लोग लालू की कमी साफ़ तौर पर महसूस कर रहे हैं.

जहानाबाद से तेज प्रताप ने चंद्र प्रकाश को अपना उम्मीदवार बनाया है जबकि आरजेडी के आधिकारिक उम्मीदवार सुरेंद्र प्रसाद यादव हैं. सुरेंद्र प्रसाद यादव जहानाबाद से आरजेडी के पहले भी सांसद रह चुके हैं.

जहानाबाद के स्थानीय पत्रकार अश्विनी कुमार मानते हैं कि अगर चंद्र प्रकाश चुनाव में डटे रहे तो आरजेडी को नुक़सान हो सकता है. चंद्र प्रकाश भी जाति से यादव ही हैं और इनके बारे में कहा जाता है कि ये तेज़प्रताप के बहुत अच्छे दोस्त हैं. कहा जा रहा है कि तेज प्रताप यहां चुनाव प्रचार करने आएंगे.

चंद्र प्रकाश ने बीबीसी से कहा, ''जहानाबाद में लड़ाई स्थानीय और बाहरी की है. आरजेडी ने सुरेंद्र प्रसाद यादव को उम्मीदवार बनाया है लेकिन वो यहां के नहीं हैं. हमने टिकट को लेकर तेजस्वी जी से भी संपर्क करने कोशिश की थी लेकिन उनसे बात नहीं हुई. कोई बात नहीं बनी तब तेज प्रताप जी ने यह क़दम उठाया.''

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बिहार में इस बात को हर कोई जानता है कि तेज प्रताप अपने बाग़ी तेवर के साथ पार्टी और परिवार में अलग-थलग पड़ गए हैं. तेज प्रताप ने पार्टी और परिवार के बाद पत्नी से भी विद्रोह कर लिया लेकिन यहां भी वो अकेले पड़ गए. आरजेडी के एक प्रवक्ता ने बताया कि राबड़ी देवी एश्वर्या को बहुत मानती हैं और तलाक़ के मामले में पूरा परिवार तेज प्रताप नहीं बल्कि एशवर्या के साथ खड़ा है.

1990 के दशक से लेकर 2015 के बिहार विधानसभा चुनाव तक लालू प्रसाद का बिहार के चुनाव में प्रभावी दख़ल रहा है लेकिन 2019 के आम चुनाव में जब राष्ट्रीय जनता दल सबसे मुश्किल दौर से गुजर रहा है तो लालू जेल में हैं. यह तेजस्वी के लिए भी इम्तिहान है लेकिन तेज प्रताप उनके लिए सबसे बड़ा सवाल बन गए हैं.

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