लोकसभा चुनाव 2019: महबूबा मुफ़्ती के ख़िलाफ़ चुनाव क्यों लड़ रही हैं डॉ. रिदवाना सनम

  • 8 अप्रैल 2019
डॉ. रिदवाना सनम इमेज कॉपीरइट Facebook/drridwanasanam786

डॉ. रिदवाना सनम ने जब जम्मू-कश्मीर की अनंतनाग सीट से पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ़्ती के ख़िलाफ़ चुनाव लड़ने का फ़ैसला किया तो उनके परिवारवालों ने इसका काफ़ी विरोध किया.

दिल्ली से लेकर बिहार की राजधानी पटना में अपने क्लीनिक चलाने वाली डॉ. रिदवाना को किसी भी पार्टी की ओर से टिकट नहीं मिला है. इसके बावजूद वह निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में महबूबा मुफ़्ती, ग़ुलाम अहमद मीर और पूर्व जस्टिस हुसनैन मसूदी के ख़िलाफ़ चुनाव लड़ने जा रही हैं.

डॉ. रिदवाना ने अनंतनाग लोकसभा सीट के लिए नामांकन पत्र भी दाखिल कर दिया है.

ऐसे में सवाल उठता है कि आख़िर वो क्या वजह है जिसके फिज़ियोथेरेपी के क्षेत्र में नाम कमा चुकीं डॉ. रिदवाना अब राजनीति में उतरने के लिए तैयार हैं.

इमेज कॉपीरइट Facebook/Dr.Ridwana Sanam

ख़ुद का फैसला

डॉ. रिदवाना एक राजनीतिक परिवार से आती हैं. उनके पिता अब्दुल कबीर पठान पहलगाम से तीन बार सांसद और नेशनल कांफ्रेंस के पुराने नेता रहे हैं.

लेकिन डॉ. रिदवाना के मुताबिक़, वह अपने परिवार की राजनीतिक विरासत को आगे बढ़ाने के लिए नहीं बल्कि अपनी प्रेरणा से राजनीति में उतरी हैं.

डॉ. रिदवाना कहती हैं, "राजनीतिक विरासत के लिए हमारे दो बड़े भाइयों को प्राथमिकता दी जा सकती थी और वो मैच्योर भी हैं. मुझे लगता है कि वर्तमान परिस्थितियों ने मुझे राजनीति में आने के लिए मजबूर किया है. यह खुद से लिया गया फ़ैसला है."

वो कहती हैं, "मैंने देखा है कि कैसे हमारे दक्षिण कश्मीर में खून बह रहा है और यहां के युवाओं और महिलाओं को सुविधाओं की कमी झेलनी पड़ रही है."

प्लेबैक आपके उपकरण पर नहीं हो पा रहा
कश्मीर घाटी में बीजेपी का मुस्लिम चेहरा

पहलगाम में पैदा हुईं डॉ. रिदवाना की शुरुआती शिक्षा उनके गांव में ही हुई. इसके बाद उन्होंने उच्च शिक्षा के लिए श्रीनगर और देश के दूसरे हिस्सों की ओर रुख़ किया.

वो कहती हैं, "मेरे पिता राजनीति से जुड़े थे, इस वजह से हमें गांव छोड़ना पडा. कुछ सालों तक हम श्रीनगर में रहे. फिर हम जम्मू गए, जहां मैंने हाई स्कूल की पढ़ाई पूरी की."

"मेरे परिवार का सपना मुझे एक डॉक्टर के रूप में देखना था. जब मैंने तय किया कि मुझे इसकी पढ़ाई करनी है, तो मैंने फिज़ियोथेरेपी को चुना. मैं खून देखकर डर जाती थी. मुझे लगता था कि मैं खून नहीं देख सकती, इसलिए मैंने फिज़ियोथेरेपी को चुना."

"मैंने साल 2006 में कर्नाटक से इसमें स्नातक की डिग्री हासिल की. इसके बाद दिल्ली के राम मनोहर लोहिया अस्पताल में इंटर्नशिप की."

इमेज कॉपीरइट Facebook/drridwanasanam786

राजनीति में आने का कारण

डॉ. रिदवाना दावा करती हैं कि उन्होंने फिज़ियोथेरेपी के क्षेत्र में कई नए मुकाम हासिल किए हैं और उनकी इस क्षेत्र में अपनी एक अलग पहचान है.

"एम्स से दूसरे कोर्स पूरे करने के बाद मैं फिज़ियोथेरेपी में नए मौके तलाशने लगी. मैं आगे बढ़ी. मैंने अपनी प्रोजेक्ट रिपोर्ट पूरी की. हर कोई मुझे यह कहते हुए हतोत्साहित करता था कि यह (फिज़ियोथेरेपी) एक (चैरिटेबल) सामाजिक काम है और इससे ज़्यादा कुछ नहीं किया जा सकता है."

"लेकिन मैंने उन्हें ग़लत साबित किया. मैंने फिज़ियोथेरेपी के क्षेत्र में भारत का ब्रांड स्थापित किया. मैंने इस बारे में राष्ट्रीय स्तर पर जागरूकता फैलाई. मुझे प्रोफेशनल गोल्फ एसोसिएशन ऑफ इंडिया का सलाहकार भी नियुक्त किया गया."

"इसलिए मैंने सोचा कि जब मैं यह सब कर सकती हूं तो एक राजनेता के तौर पर मैं महिलाओं और युवाओं के जख्मों पर मरहम क्यों नहीं लगा सकती. और यही कारण है कि मैंने राजनीति के मैदान में कदम रखने का फ़ैसला किया."

इमेज कॉपीरइट Facebook/drridwanasanam786

पूर्व राष्टरपति कलाम ने की थी मदद

डॉ रिदवाना कहती हैं कि पूर्व राष्ट्रपति और वैज्ञानिक रहे एपीजे अब्दुल कलाम ने उनके अंतरराष्ट्रीय यात्रा का खर्च उठाया था.

वो कहती हैं, "उनकी (एपीजे अब्दुल कलाम) वजह से मैं जापान देख पाई और वहां पढ़ाई पूरी कर पाई. उन्होंने मेरी दूसरी यात्राओं को भी स्पॉन्सर किया था. कई लोगों ने मुझे दुबई में बस जाने की सलाह दी थी लेकिन मैं अपने देश की सेवा करना चाहती थी. मैं अपनों के साथ रहना चाहती थी, जिनकी मैं मदद कर सकूं."

40 साल की डॉ. रिदवाना ने शादी नहीं की है. उनकी तीन बहनें और दो भाई हैं.

वो कहती हैं कि बिना लोगों से पूछे और उनकी सलाह लिए वो किसी राजनीतिक दल में शामिल नहीं होंगी.

इमेज कॉपीरइट BILAL BAHADUR/BBC

इस बार का मुक़ाबला

कश्मीर क्षेत्र में तीन लोकसभा सीटें हैं- अनंतनाग, श्रीनगर और बारामूला. अनंतनाग लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र में चार जिले अनंतनाग, कुलगाम, शोपियां और पुलवामा आते हैं.

अनंतनाग लोकसभा सीटों के लिए 23 और 29 अप्रैल और 6 मई को तीन चरणों में वोट डाले जाएंगे.

2014 के चुनाव में अनंतनाग सीट पर महबूबा मुफ्ती ने जीत दर्ज की थी. 2016 में राज्य के मुख्यमंत्री बनने के बाद उन्होंने सांसद के पद से इस्तीफा दे दिया था.

सुरक्षा कारणों और हिंसा की घटनाओं की वजह से तब से अब तक यहां उपचुनाव नहीं हुआ.

महबूबा मुफ्ती ने पिछले लोकसभा चुनाव में नेशनल कॉन्फ्रेंस की नेता डॉ. महबूब बेग को हराया था.

यह माना जा रहा है कि अनंतनाग में इस बार का मुकाबला पीडीपी की महबूबा मुफ्ती, कांग्रेस के जीए मीर और नेशनल कॉन्फ्रेंस के नेता रिटायर्ड जस्टिस मसूदी हसनैन के बीच होगा.

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)

बीबीसी न्यूज़ मेकर्स

चर्चा में रहे लोगों से बातचीत पर आधारित साप्ताहिक कार्यक्रम

सुनिए

संबंधित समाचार