ब्रुनेई में गे-सेक्स करने वालों को पत्थर मारकर ली जाएगी जान

  • 3 अप्रैल 2019
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Image caption समलैंगिकता ब्रूनेई में ग़ैरक़ानूनी है.

ब्रुनेई में बुधवार से समलैंगिकता विरोधी नए क़ानून लागू हो गए हैं जिनके तहत गे-सेक्स के लिए पत्थर मारकर मौत की सज़ा दी जा सकती है.

साथ ही अलग अलग अपराधों के लिए भी कड़ी सज़ा का प्रावधान है, जैसे चोरी के लिए हाथ काटना.

गे-सेक्स के अपराध में किसी को सज़ा तभी दी जाएगी, जब वो खुद कबूल करेगा या उसे ऐसा करते हुए कम के कम चार गवाहों ने देखा हो.

दक्षिण-पूर्वी एशियाई देश ब्रुनेई के नए इस्लामिक क़ानूनों की अंतरराष्ट्रीय निंदा हो रही है.

हॉलीवुड के मशहूर अभिनेता जॉर्ज क्लूनी समेत कई हस्तियों ने ब्रुनेई के सुल्तान के आलीशान होटलों का बहिष्कार करने का आह्वान किया है.

लंदन में 'स्कूल ऑफ़ ओरियंटल एंड अफ़्रीकन स्टडीज़' के छात्रों ने स्कूल की इमारत का नाम ब्रुनेई गैलरी से हटाकर कुछ और करने की मांग की है.

बेशुमार दौलत के मालिक ब्रुनेई के सुल्तान

बुधवार को एक सार्वजनिक भाषण में ब्रुनेई के सुल्तान ने और कड़े इस्लामिक क़ायदे क़ानून को लागू करने की बात कही थी.

समाचार एजेंसी एएफ़पी के अनुसार सुल्तान हसनल बोल्किया ने कहा, "मैं इस देश में इस्लामिक शिक्षाओं को और मज़बूत होते देखना चाहता हूं."

ब्रुनेई में समलैंगिकता पहले से ही प्रतिबंधित है और इसके लिए अधिकतम 10 साल की सज़ा हो सकती है.

ब्रुनेई के गे समुदाय ने इस तरह के क़ानून और मध्ययुगीन सज़ा के तरीके पर आश्चर्य व्यक्त किया है.

बिना नाम ज़ाहिर किए एक गे व्यक्ति ने बीबीसी को बताया, "आपको पता चलता है कि आपका पड़ोसी, आपका परिवार या एक शालीन महिला जो सड़क के किनारे खोमचे लगाती है, वो हो सका है कि एक दिन आपको इंसान न माने, पत्थर मारने से उसे कोई फर्क न पड़े. ये सिहरा देने वाली बात है."

अमीर देश

बोर्नियो द्वीप पर स्थित ब्रुनेई में सुल्तान हसनल का शासन है और तेल और गैस के निर्यात से ये देश बहुत सम्पन्न होता गया है.

72 साल के सुल्तान ब्रुनेई के इनवेस्टमेंट एजेंसी के मुखिया भी हैं. इस एजेंसी के पोर्टफ़ोलियो में दुनिया के शीर्ष होटलों में शुमार लंदन में डोरचेस्टर और लॉस एंजेल्स का बेवर्ली हिल्स होटल शामिल है.

ब्रुनेई का सत्तारूढ़ शाही परिवार बेशुमार दौलत का मालिक है और इस देश की अधिकांश मलय आबादी को सारी सरकारी सुविधाओं मिलती हैं और उन्हें टैक्स भी नहीं देना पड़ता.

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Image caption ब्रुनेई के सुल्तान हसनल बोल्किया यहां के प्रधानमंत्री भी हैं जिनका नाम दुनिया के सबसे धनी व्यक्तियों में शामिल हैं.

बुधवार से शरीया क़ानून लागू

इस देश की 4 लाख 20 हज़ार की आबादी में दो तिहाई मुस्लिम हैं.

ब्रुनेई ने मौत की सज़ा को बरकरार रखा लेकिन 1957 से कोई मौत की सज़ा नहीं दी गई.

चौतरफा आलोचनाओं के बाद में देश में पहली बार 2014 में शरीया क़ानून लागू हुआ और इस तरह यहां दो तरह के क़ानून हैं, एक शरीया और दूसरे सामान्य क़ानून.

तब सुल्तान ने कहा था कि नया क़ानून आने वाले सालों में पूरी तरह लागू किया जाएगा.

पहले चरण में जुर्माने और जेल की सज़ा वाले अपराधों से संबंधित कानूनों को 2014 में लागू किया गया.

इसके बाद ब्रुनेई ने अंतिम दो चरण, जिसमें अंग भंग और पत्थर से मौत की सज़ा शामिल है, को लागू करने में थोड़ी देरी की.

लेकिन शनिवार को सरकार ने अपनी वेबसाइट पर एक बयान जारी कर कहा कि शरिया पीनल कोड को बुधवार से पूरी तरह लागू कर दिया जाएगा.

इसके बाद पूरी दुनिया में इसकी आलोचना शुरू हो गई और इसे वापस लिए जाने की मांग होने लगी.

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कानून के तहत सज़ा

एमनेस्टी इंटरनेशनल में ब्रुनेई के शोधार्थी शोवा हावर्ड ने कहा, "जब पांच साल पहले इस बारे में चर्चा शुरू हुई थी तो इन प्रावधानों की चौतरफा निंदा हुई थी."

उनके अनुसार, "ब्रुनेई के पीनल कोड में बहुत सारे दोषपूर्ण कानून हैं जिनके कई नियम मानवाधिकार का उल्लंघन करते हैं."

संयुक्त राष्ट्र ने भी इस क़ानून को 'क्रूर, अमानवीय और अपमानजनक' बताया है.

रेप, व्याभिचार, गे सेक्स, लूट और ईश निंदा जैसे अपराधों में मौत की सज़ा का प्रावधान है.

भ्रूण हत्या के लिए सार्वजनिक रूप से पिटाई का भी इसमें प्रावधान किया है. जबकि चोरी के लिए हाथ पैर काटने का प्रावधान है.

इसके अलावा नए कानून में नाबालिक मुस्लिम बच्चों को इस्लाम से अलग किसी और धर्म के लिए प्रेरित या प्रोत्साहित करने को भी आपराधिक मामला बना दिया गया है.

ये क़ानून सामान्य तौर पर मुस्लिमों पर लागू होंगे, हालांकि कुछ मामलों में गैर मुस्लिम भी इसके दायरे में आ सकते हैं.

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Image caption ब्रुनेई 1984 में ब्रिटेन से आज़ाद हुआ था.

ब्रुनेई में प्रतिक्रिया

कनाडा में शरण मांगने वाले ब्रुनेई के एक 40 साल के गे व्यक्ति ने कहा कि नए क़ानून का असर अभी से ब्रुनेई में दिखने लगा है.

सरकार की आलोचना करने वाले एक फ़ेसबुक पोस्ट के कारण देशद्रोह का सामना करने वाले एक पूर्व सरकारी कर्मचारी ने पिछले साल ब्रुनेई छोड़ दिया था.

उसने कहा कि 'लोग डरे हुए हैं.'

शखिरन एस शाहरानी ने बीबीसी को बताया, "ब्रुनेई की गे कम्युनिटी पहले गोपनीय हुआ करती थी लेकिन जब ग्रिंडर नाम का एक डेटिंग ऐप आया तो इसने लोगों को एक दूसरे से मिलाने में मदद की. लेकिन अब मैंने सुना है कि अब शायद ही इसे कोई इस्तेमाल करता है."

उन्होंने कहा, "वे डरे हुए हैं कि कहीं पुलिस को कोई न बता दे. अभी तक ऐसा नहीं हुआ है लेकिन नए कानून के कारण लोग डरे हुए हैं."

ब्रुनेई का एक और व्यक्ति, जो गे तो नहीं है लेकिन इस्लाम को नहीं मानता है, उन्होंने बताया कि वो कानून के लागू होने को लेकर डरे हुए हैं.

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23 साल के एक व्यक्ति ने कहा, "हम आम लोग शरीया कानून को लागू होने से रोक नहीं सकते"

"शरिया क़ानून के तहत, मुझे धर्म छोड़ने के लिए मौत की सज़ा का सामना करना पड़ेगा."

एक अन्य गे व्यक्ति को उम्मीद है कि शायद ये कानून व्यापक रूप से लागू न हो.

उसके अनुसार, "ईमानदारी से कहूं तो मुझे बहुत डर नहीं है क्योंकि यहां की सरकार अक्सर कड़ी सज़ा का झाँसा देती रहती है. लेकिन ये हो सकता है और हो रहा है, भले ही ये घटनाएं इक्का दुक्का हों."

(बीबीसी के एवेट टान की रिपोर्ट)

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