क्या इस स्कूल में हिंदू और सिख लड़कियों का भी बुर्क़ा पहनना अनिवार्य है? - फ़ैक्ट चेक

  • 6 अप्रैल 2019
वायरल इमेज कॉपीरइट SM Viral Post

बुर्क़ा पहनकर सुबह की प्रार्थना सभा में गीत गातीं स्कूली लड़कियों का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया है.

बताया जा रहा है कि यह वीडियो भारत प्रशासित कश्मीर के श्रीनगर में स्थित किसी स्कूल का है.

इस वीडियो के साथ सोशल मीडिया पर कई तरह के दावे किये गए हैं. इनमें से कई दावे बहुत भ्रामक हैं.

जैसे कि @squintneon नाम के ट्विटर यूज़र ने 3 अप्रैल को क़रीब 130 सेकेंड का यह वीडियो ट्वीट किया था.

इस यूज़र ने वीडियो के साथ लिखा, "ये सऊदी या सीरिया का वीडियो नहीं है. ये श्रीनगर के आरपी स्कूल की मॉर्निंग असेंबली का वीडियो है जहाँ हिंदू और सिख लड़कियाँ भी 'अपनी पसंद' से बुर्क़ा पहन रही हैं!"

इमेज कॉपीरइट Twitter

ट्वीट में यह भी लिखा है कि "इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ़ कश्मीर का बीज बोया जा चुका है, बस एक बार 'राहुल गांधी' कश्मीर से आफ़्सपा हटा लें तो इसकी आधिकारिक स्थापना हो जाएगी."

इस ट्वीट में लगे वीडियो को अब तक 18 लाख से ज़्यादा बार देखा जा चुका है और छह हज़ार से ज़्यादा लोग इस वीडियो को ट्विटर पर शेयर कर चुके हैं.

'हिंदू और सिख छात्रों की मजबूरी'

दक्षिणपंथी रुझान वाले 'Hindus of India' और 'I Support Narendra Modi G' जैसे बड़े फ़ेसबुक ग्रुप्स ने इस वायरल वीडियो को इसी भ्रामक संदेश के साथ पोस्ट किया है.

इस वीडियो को शेयर करने वाले बहुत सारे लोगों ने लिखा है कि मुस्लिम लड़कियों के बीच कई हिंदू और सिख लड़कियाँ भी हैं जो इस स्कूल में पढ़ती हैं और उन्हें बुर्क़ा पहनने के लिए मजबूर किया जाता है.

इमेज कॉपीरइट SM Viral Post

'L'important' नाम की एक फ़्रेंच वेबसाइट है जो सोशल मीडिया पर वायरल होने वाली तस्वीरों और वीडियोज़ को जगह देती है.

इस वेबसाइट ने भी लिखा है कि 'भारत के इस स्कूल में ग़ैर-मुस्लिम लड़कियों के लिए भी बुर्क़ा पहनना अनिवार्य है.'

लेकिन अपनी पड़ताल में हमने इस दावे को बिल्कुल ग़लत पाया है.

दावे की पड़ताल

इस वीडियो के बारे में जब हमने श्रीनगर के मल्ला बाग़ इलाक़े में स्थित रेडिएंट पब्लिक स्कूल के प्रिंसिपल से बात की तो उन्होंने स्वीकार किया कि वायरल वीडियो उन्हीं के स्कूल का है.

प्रिंसिपल डार जी क्यू जिलानी ने कहा कि ये वीडियो इसी हफ़्ते रिकॉर्ड किया गया था और स्कूल के स्टाफ़ ने ही सोशल मीडिया पर इसे पोस्ट किया था.

लेकिन सोशल मीडिया पर इस वीडियो के साथ जो संदर्भ जोड़ा गया, उस पर उन्होंने नाराज़गी ज़ाहिर की.

इमेज कॉपीरइट RP School

जिलानी ने बीबीसी को बताया कि उनके स्कूल में कोई भी सिख या हिंदू छात्र नहीं है.

उन्होंने कहा कि जिस इलाक़े में ये स्कूल स्थित है, वहाँ वैसे भी ग़ैर-मुस्लिम परिवारों की संख्या बहुत कम है.

जिलानी के इस दावे की पुष्टि के लिए हमने श्रीनगर के शिक्षा निदेशालय में बात की.

शिक्षा निदेशालय के प्रवक्ता ने मौजूद डेटा के आधार पर बताया कि आरपी स्कूल में कोई ग़ैर-मुस्लिम छात्र नहीं पढ़ता है.

क्या ग़ैर-मुस्लिम छात्रों को आरपी स्कूल में पढ़ने की मनाही है?

इस सवाल पर स्कूल के प्रवक्ता ने दावा किया कि स्कूल प्रबंधन ने कभी भी अन्य धर्म के लोगों को स्कूल में एडमिशन लेने से नहीं रोका.

इमेज कॉपीरइट SM Viral Post

स्कूल में 'बुर्क़े' का रिवाज?

आरपी स्कूल के प्रवक्ता के अनुसार, उनके स्कूल में रेगुलर कोर्स के अलावा इस्लाम धर्म के बारे में भी पढ़ाया जाता है. स्कूल में लड़कियाँ स्कूल ड्रेस के ऊपर हिजाब पहनती हैं.

लेकिन क्या ऐसा करना इन छात्राओं के लिए अनिवार्य है?

इसके जवाब में स्कूल के प्रिंसिपल जिलानी ने कहा, "हमारे नियमों के अनुसार ग़ैर-मुस्लिम छात्राओं के लिए कोई बाध्यता नहीं है. लेकिन छठी क्लास से छात्राओं को हिजाब पहनने या मुँह ढकने के लिए कहा जाता है. बीते 30 साल से यह नियम बना हुआ है."

इमेज कॉपीरइट RP School
Image caption आरपी स्कूल की श्रीनगर में ही स्थित एक अन्य ब्रांच में लड़के नमाज़ी टोपी पहनते हैं

स्कूल प्रशासन को इस बात की जानकारी है कि उनके स्कूल का वीडियो सोशल मीडिया पर शेयर किया जा रहा है.

सोशल मीडिया पर काफ़ी लोगों ने स्कूल के इस नियम की आलोचना करते हुए लिखा है कि 'गर्मियों में ये नियम इन छात्राओं के लिए कितनी मुश्किल पैदा करता होगा!'

इसके जवाब में जिलानी ने कहा, "लोगों को लग सकता है कि ये नियम गर्मी के मौसम में बच्चों के लिए मुश्किलें पैदा करता होगा. लेकिन हम गर्मियों में छात्राओं की सहूलियत के लिए खुले मैदान में असेंबली नहीं करते हैं."

(इस लिंक पर क्लिक करके भी आप हमसे जुड़ सकते हैं)

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)

बीबीसी न्यूज़ मेकर्स

चर्चा में रहे लोगों से बातचीत पर आधारित साप्ताहिक कार्यक्रम

सुनिए

संबंधित समाचार