छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री रमन सिंह के दामाद के ख़िलाफ़ लुकआउट सर्कुलर क्यों?

  • 6 अप्रैल 2019
रमन सिंह

छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री और बीजेपी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष रमन सिंह के दामाद डॉक्टर पुनीत गुप्ता के ख़िलाफ़ रायपुर पुलिस ने लुकआउट सर्कुलर जारी किया है. उन्हें भ्रष्टाचार के कई मामलों में फ़रार बताया गया है.

पुलिस का कहना है कि उनके विदेश भाग जाने की आशंका के कारण यह सर्कुलर जारी किया गया है.

पुलिस ने यह सर्कुलर ऐसे समय में जारी किया है, जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शनिवार को छत्तीसगढ़ में अपनी पहली चुनावी सभा करने के लिए पहुंचे हैं.

इन मामलों की जांच कर रहे सीएसपी नसर सिद्दीकी ने कहा, "हमारे पास डॉ. पुनीत गुप्ता के ख़िलाफ़ पर्याप्त सबूत हैं. तीन-तीन बार नोटिस दिए जाने के बाद भी वे पूछताछ के लिये उपस्थित नहीं हुए. हमने जांच के लिये छापेमारी की कार्रवाई भी की लेकिन उनका सुराग हमें नहीं मिला."

इधर पूर्व मुख्यमंत्री रमन सिंह ने कहा है कि छत्तीसगढ़ की कांग्रेस पार्टी की सरकार उनकी छवि को ख़राब करने के लिये बदले की भावना से कार्रवाई कर रही है.

पिछले साल नवंबर में रमन सिंह की सरकार के चुनाव हारने के बाद ही सारे मामले दर्ज किये गए हैं.

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Image caption पुनीत गुप्ता

बिना टेंडर करोड़ों की ज़मीनी ख़रीदने का आरोप

रमन सिंह ने कहा, "ये सिर्फ़ और सिर्फ़ षड्यंत्र का हिस्सा है. सारा मामला बेसिर-पैर का है. अदालत में सारा मामला दूध का दूध और पानी का पानी हो जायेगा."

दूसरी ओर राज्य के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल का कहना है कि पूर्व मुख्यमंत्री रमन सिंह के दामाद डॉक्टर पुनीत गुप्ता ने बिना टेंडर के करोड़ों की ख़रीद की.

आरोप है कि उन्होंने बिना टेंडर के करोड़ों का निर्माण कर लिया. उन्होंने बिना विज्ञापन के भर्तियां कर लीं. यहां तक कि सरकारी अस्पताल को भी फर्ज़ी तरीक़े से गिरवी रख दिया.

भूपेश बघेल ने कहा, "रमन सिंह को बताना चाहिये कि अपनी सरकार में क्या उन्होंने अपने दामाद को इतनी छूट दे रखी थी? मेरी तो यही सलाह है कि जब पुलिस जांच कर रही है तो रमन सिंह के दामाद भागे-भागे फिरने के बजाये पुलिस के सामने सारे तथ्य रखें और जांच में सहयोग करें."

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Image caption डीएसके हॉस्पिटल

विवादों से पुराना नाता

राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री रमन सिंह के दामाद डॉक्टर पुनीत गुप्ता पहले भी विवादों में घिरे रहे हैं.

2014 में अंतागढ़ विधानसभा उपचुनाव के दौरान अंतिम समय में कांग्रेस उम्मीदवार मंतूराम पवार ने अपना नामांकन वापस ले लिया था.

उनके अलावा दस दूसरे उम्मीदवार भी चुनाव मैदान से हट गये थे और बीजेपी के भोजराज नाग 50 हज़ार से भी अधिक मतों से चुनाव जीत गये थे.

इस मामले में एक टेप सार्वजनिक हुआ था, जिसमें कथित रूप से डॉक्टर पुनीत गुप्ता ने कांग्रेस प्रत्याशी मंतूराम पंवार को पैसों का प्रलोभन देकर मैदान से हटने के लिये तैयार किया था.

इस साल कांग्रेस प्रवक्ता किरणमयी नायक की रिपोर्ट के आधार पर इस मामले में पुलिस ने डॉ. पुनीत गुप्ता, पूर्व प्रत्याशी मंतूराम पवार, पूर्व मंत्री राजेश मूणत, पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी और उनके बेटे विधायक अमित जोगी के ख़िलाफ़ मामला दर्ज किया है.

मामला दर्ज किये जाने के बाद डॉक्टर पुनीत गुप्ता ने फ़रवरी में रायपुर के जवाहरलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज के ओएसडी पद से इस्तीफ़ा दे दिया था.

इस मामले में ज़िला एवं सत्र न्यायाधीश की अदालत से पुनीत गुप्ता की ज़मानत याचिका ख़ारिज हो चुकी है.

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Image caption मुख्यमंत्री भूपेश बघेल

पांच सितारा होटल जैसा अस्पताल

डॉक्टर रमन सिंह के कार्यकाल में रायपुर में 110 करोड़ रुपये से भी अधिक की लागत से दाऊ कल्याण सिंह सुपर स्पेशिलिटी हॉस्पिटल में पुन-र्निर्माण किया गया था. निर्माण के दौरान ही पांच सितारा होटलों-सी सुविधाओं वाले इस अस्पताल का अधीक्षक डॉक्टर पुनीत गुप्ता को बनाया गया था.

नवंबर में सरकार बदलते ही इस अस्पताल के निर्माण और नियुक्तियों को लेकर की गई शिकायतों की पड़ताल शुरू हुई और फिर इस मामले में अस्पताल के अधीक्षक डॉक्टर पुनीत गुप्ता के ख़िलाफ़ मामला दर्ज किया गया.

इस मामले के शिकायतकर्ता राज्य सरकार के डीकेएस पोस्ट ग्रेजुएट्स इंस्टीट्यूट एंड रिसर्च सेंटर के अधीक्षक डॉक्टर केके सहारे का कहना है कि पुनीत गुप्ता ने अपने पद का दुरुपयोग कर तथा अपनी पहुंच का लाभ उठाते हुये क़रीब 50 करोड़ रुपये की शासकीय राशि का फ़र्ज़ीवाड़ा किया है.

डॉक्टर पुनीत गुप्ता के ख़िलाफ़ छत्तीसगढ़ स्टेट मेडिकल सप्लाई कॉर्पोरेशन की मिलीभगत से करोड़ों रुपये के उपकरणों की ग़ैर-क़ानूनी तरीक़े से महंगी दर पर ख़रीद की भी शिकायत की गई है.

कांग्रेस पार्टी के नेता और छत्तीसगढ़ हॉस्पिटल बोर्ड के अध्यक्ष डॉ. राकेश गुप्ता कहते हैं, "इस अस्पताल में मनमाने तरीक़े से अवैध ख़रीद हुई. अवैध तरीक़े से अस्पताल का निर्माण हुआ और यहां तक की अधिकांश नियुक्तियां मनमाने तरीक़े से की गईं."

इन मामलों की जांच शुरू ही हुई थी कि पता चला कि डॉ. पुनीत गुप्ता के कार्यकाल में इस अस्पताल को पंजाब नेशनल बैंक के पास 69 करोड़ में गिरवी रख दिया गया है. अस्पताल की ज़मीन 1944 में दाऊ कल्याण सिंह ने दान में दी थी.

बैंक के एक अधिकारी ने कहा कि बैंक में जो ऑडिट रिपोर्ट जमा की गई थी, वह फ़र्ज़ी निकली है. इस मामले में बैंक भी एक अपराध की रिपोर्ट दर्ज करवाने की प्रक्रिया में है.

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Image caption रमन सिंह, बेटी अस्मिता और दामाद पुनीत के साथ

डिग्री और नौकरी पर सवाल

पूर्व मुख्यमंत्री रमन सिंह के दामाद डॉक्टर पुनीत गुप्ता की डिग्री को लेकर भी अब जांच शुरू की गई है.

आरोप है कि डॉ. पुनीत गुप्ता ने अक्तूबर 1999 में रायपुर के मेडिकल कॉलेज में रेडियोथेरेपी में पीजी के लिये दाख़िला लिया था. लेकिन चार महीने बाद, फ़रवरी 2000 में उन्होंने अपना विषय बदल कर जनरल सर्जरी की पढ़ाई शुरू कर दी.

इसके पांच महीने बाद उन्होंने इस विभाग को भी बदल दिया और जनरल मेडिसिन विभाग में उन्होंने दाख़िला ले लिया. लेकिन तीन साल के बजाये दो साल चार महीने की पढ़ाई के बाद ही उन्हें डिग्री दे दी गई.

राज्य के चिकित्सा शिक्षा संचालक डॉ. एसएल आदिले का कहना है कि पीजी के लिये 36 महीने का समय निर्धारित है और अगर इसमें एक दिन की भी कमी है तो वह डिग्री मान्य नहीं होगी.

इसके अलावा डॉक्टर पुनीत गुप्ता की नौकरी को लेकर भी शिकायत की गई है.

आरोप है कि उन्होंने अगस्त 2011 में मेडिकल कॉलेज से इस्तीफ़ा दे दिया था. लेकिन 2013 में उन्होंने फिर से उसी पद पर कार्य करना शुरू कर दिया और उनके दो साल के अवकाश को असाधारण अवकाश की स्वीकृति देकर उन्हें बाद में पदोन्नति भी दे दी गई.

हमने इस संबंध में डॉक्टर पुनीत गुप्ता से भी संपर्क कर उनका पक्ष लेने की कोशिश की. लेकिन हमें उनका पक्ष नहीं मिल सका.

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