भारत ने पाकिस्तान के जिस एफ़-16 को 'गिराया' वो अमरीका को कैसे मिल गया: वुसअत का ब्लॉग

  • 8 अप्रैल 2019
एफ़-16 लड़ाकू विमान इमेज कॉपीरइट EPA

चलो जी, अमरीका की फॉरेन पॉलिसी मैगज़ीन ने भी कह दिया कि पाकिस्तान के पास जितने एफ़-16 विमान हैं वो पूरे हैं. खुद पेन्टागन वालों ने एक-दो-तीन कर के गिनती पूरी की है.

अगर ये सच है तो फिर वो कौन सा एफ़-16 था जिसे विंग कमांडर अभिनंदन के मिग बाइसन ने गिरने से पहले पहले मार गिराया.

फॉरेन पॉलिसी मैगज़ीन के मुताबिक एफ़-16 लाइन ऑफ़ कंट्रोल के ऊपर तो डॉग फाइट में इस्तेमाल हुआ और और उसने एआईएम-20 मिसाइल भी फायर किया, मगर ये मिसाइल पाकिस्तानी इलाक़े से आत्मरक्षा में फायर हुआ या भारतीय कश्मीर के अंदर जा कर फायर किया गया, इस बारे में यकीन से कुछ नहीं कहा जा सकता.

मगर मुझ जैसों की ये परेशानी अपनी जगह है कि जो एफ़-16 भारत ने गिराया उसके बाद पाकिस्तान अमरीकियों को आख़िर ये यकीन दिलाने में कैसे कामयाब हुआ कि हमारे पास आपके दिए हुए विमान पूरे हैं. हम रोज़ाना उन्हें धोकर पालिश मारते हैं क्योंकि हमें इन्हें किसी युद्ध में थोड़ी इस्तेमाल करना है. बस 14 अगस्त को स्वतंत्रता दिवस पर या फिर 23 मार्च को पाकिस्तान दिवस पर उड़ाना है.

इस छीछालेदर से जान छुड़ाने का एक तरीका तो ये है कि फॉरेन पॉलिसी मैगज़ीन की इस बात पर यकीन कर लिया जाए कि कोई एफ़-16 तबाह नहीं हुआ, गिनती पूरी है.

दूसरा तरीका ये है कि अपनी बात पर कायम रहा जाए कि नहीं साहब कम-से-कम एक एफ़-16 तो तबाह हुआ है.

मगर फिर ये बताना पड़ेगा कि वो तबाह हो कर गिरा कहां और उसके मलबे का क्या हुआ. कोई खिलौना तो है नहीं कि तुरंत जेब में डाल लिया गया हो.

इस संदर्भ में पिछले तीन-चार दिन में सोशल मीडिया पर कई मज़ेदार थ्योरियां पढ़ रहा हूं.

हो सकता है अमरीकियों को बेवकूफ बनाने के लिए पाकिस्तान ने अपने मित्र तुर्की या जॉर्डन से कहा हो कि 'यार ज़रा अपने बेड़े में से एक एफ़-16 तो हफ्ते भर के लिए भिजवा दो. जैसे ही अमरीकी गिनती पूरी करते हैं हम वापिस कर देंगे.'

ये भी हो सकता है कि पाकिस्तान चूँकि 1982 से एफ़-16 इस्तेमाल कर रहा है, और पिछले 37 वर्ष में दो-चार विमान तो नाकारा हुए ही होंगे, जिनके पुर्ज़े इस्तेमाल के लिए निकाल लिए गए होंगे मगर ऊपरी ढांचे तो कहीं न कहीं ईंटों पर खड़े ही होंगे.

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पाकिस्तान ने ज़रूर ये चतुराई दिखाई है कि एफ़-16 का कोई पुराना चेसिस निकाल उसपर ताज़ा रंग फेर दिया, सीटों पर नकली चाइनीज़ रेक्सिन चढ़ा दिया और इस एफ़-16 में जेएफ़-7 थंडर का इंजन फिट कर के इस इंजन पर से असली नंबर मिटा के किसी पुराने एफ़-16 का नंबर डाल दिया. और फिर पुराने टायर, स्टॉक में पड़े नए टायरों से बदल दिए गए होंगे.

जब अमरीकी टीम से कहा होगा कि अब तमाम एफ़-16 स्टार्ट कर के भी दिखाओ तो 36 के इंजनों से एक आवाज़ आ रही होगी और मगर 37वें का इंजन कोई और आवाज़ दे रहा होगा.

जब अमरीकियों ने पूछा होगा कि 'भईया इसके इंजन से अलग आवाज़ क्यों आ रही है' तो पाकिस्तानियों ने कहा होगा कि 'ये वाला विमान किसी की नहीं सुनता, पूरा जाड़ा इसने हैंगर से बाहर गुज़ारा है इसलिए इसके इंजन का गला बैठ गया है. आप चिंता न करें हम दवा दारू कर रहे हैं ठीक हो जाएगा.'

इस पर ज़ाहिर है अमरीकी मुतमईन हो गए होंगे.

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या फिर पाकिस्तानियों ने ये किया होगा कि अमरीकियों से सारे एफ़-16 विमानों की गिनती रात में कराई होगी और बीच में कोई प्लास्टिक का मॉडल भी खड़ा कर दिया होगा. रात के अंधेरे में वैसे भी क्या पता चलता है 36 असली एफ़-16 के बीच एक प्लास्टिक वाले एफ़-16 का.

अमरीकी वैसे भी उस समय फुल टुन्न होंगे और फिर काम ख़त्म होने के बाद अमरीकी टीम को मसालेदार चिकन बिरयानी खिलवाई गई होगी और उन्होंने खुशी-खुशी एफ़-16 की गिनती रिपोर्ट पर हस्ताक्षर कर दिए होंगे.

तो ये हुआ है सारा चक्कर, कोई और प्रश्न?

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