कन्हैया के लिए जुटे लोग वोट जुटाएंगे?

  • 10 अप्रैल 2019
कन्हैया के समर्थन में उतरे लोग इमेज कॉपीरइट Kanhaiya Kumar, Twitter
Image caption कन्हैया, जिग्नेश मेवाणी के साथ प्रचार करते हुए

बेगूसराय संसदीय क्षेत्र से सीपीआई के प्रत्याशी कन्हैया कुमार ने मंगलवार को अपना नामांकन दाखिल कर दिया. डफली की धाप पर गगनचुम्बी नारों के साथ सड़कों पर उतरे लोगों का हुजूम इसका गवाह बना.

देशद्रोह के मुद्दे पर राष्ट्रीय बहस छेड़ने वाले एक बुलंद आवाज कन्हैया कुमार के समर्थन में देश भर से लोगों का अपार जनसमूह भी उमड़ा था.

उनके नामांकन में वामपंथी दलों के सभी घटक भाकपा, माकपा और माले के कई वरिष्ठ नेताओं हन्नान मोल्लाह, अतुल अंजान, शत्रुघ्न प्रसाद सिंह आदि के साथ- साथ गुजरात के विधायक जिग्नेश मेवाणी, जेएनयू की पूर्व उपाध्यक्ष शहला राशिद, फातिमा नफीस (जेएनयू के लापता छात्र नजीब की माँ), सामाजिक कार्यकर्ता तीस्ता शीतलवाड, गुरमेहर कौर और अभिनेत्री स्वरा भास्कर भी उपस्थित रहीं.

लेकिन, बाहर से आये सामाजिक कार्यकर्ता और नेता कन्हैया कुमार के वोट में कितना इज़ाफा करवा पायेंगे यह बड़ा मुद्दा है.

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Image caption स्वरा भास्कर

स्थानीय पत्रकार विपिन कुमार कहते हैं कि "सबसे ज्यादा भीड़ कन्हैया कुमार के नामांकन में दिखी. इस दौरान युवा वर्ग में विशेष उत्साह देखा गया. लेकिन, नामांकन की भीड़ को वोट में तब्दील कर नहीं देखा जा सकता.

इसके बाद आयोजित सभा में भी लोगों की अच्छी भीड़ जुटी. उनको सुनने के लिए बारिश में भींग कर भी लोगों का डटे रहना और भाषण को सुनना इस बात की ओर इशारा करता है कि उनमें लोगों की रूचि है.

विपिन कुमार बताते हैं, ''बाहर से जो चर्चित लोग आये थे उससे अन्य प्रत्याशियों की नींद खराब हो गई है. अब इसको बनाये रखने में कन्हैया कहाँ तक बनाये रखते हैं यह देखना होगा. जो अल्पसंख्यक- दलित समुदाय के लोग आये थे उन्होंने मंच से कन्हैया के पक्ष में अपील की है. जिग्नेश यहीं कैंप कर रहे हैं.''

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क्या होगा असर

अब इसका कितना प्रभाव मतदान के दिन पड़ेगा यह देखना होगा.

वहीँ नामांकन में उपस्थित रहने वाले रंगकर्मी अनिश अंकुर का मानना है कि नामांकन ने एक आख्यान रचा है. वे कहते हैं कि हर चुनाव में यहाँ धर्म- जाति का झंडा उठाया जाता रहा है. एक उम्मीद दिखी है एक परिघटना की तरह जो चुनाव में आम तौर में नहीं दिखती.

नामांकन के बाद चुनावी रैली में सामाजिक कार्यकर्ताओं को प्रमुखता दी गयी. ये सभी चेहरे गैर- राजनीतिक हैं और इसको लेकर लोगों में अत्यधिक उत्साह दिखा.

बेगूसराय संसदीय क्षेत्र में लड़ाई मुख्य रूप से तीन उम्मीदवारों के बीच मानी जा रही है. इनमें सीपीआई से कन्हैया कुमार, भाजपा से गिरिराज सिंह और राजद से तनवीर हसन हैं.

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Image caption गिरिराज सिंह

हालाँकि, भारतीय जनता पार्टी, बेगूसराय के जिला अध्यक्ष संजय कुमार सिंह अपनी पार्टी की जीत का दावा करते हैं और कहते हैं कि वर्षों के संघर्ष के बाद बेगूसराय में वामपंथ को जड़ से समाप्त कर दिया गया है. अब बेगूसराय में वामपंथ जड़ जमाएगी इसकी कल्पना भी बेमानी होगी.

कहीं से किसी के आने से कोई फर्क नहीं पड़ता. नामांकन के समय अपार भीड़ तो हमारे दल के प्रत्याशी के साथ भी थी. उस भीड़ का मुकाबला कन्हैया कहाँ से कर लेंगे.

वहीँ, राष्ट्रीय जनता दल के जिला अध्यक्ष अशोक कुमार यादव का कहना है कि हम भीड़ को नहीं हम जमीन को देखते हैं.

भीड़ और जमीन दो चीज होती है. यह जमीन हमारी है और हमारी जीत निश्चित है.

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कन्हैया बिना महागठबंधन के गिरिराज के लिए कितनी बड़ी चुनौती

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बिहार: कन्हैया को महागठबंधन ने क्यों टिकट नहीं दिया

स्थानीय शिक्षिका अनुपमा बताती हैं कि भीड़ और बाहर से जो लोग आये थे उसका कोई ख़ास असर जनता पर नहीं पड़ेगा. अंतिम समय में मतदान का आधार धर्म और जाति ही बन जाएगा. ऐसा मेरा मानना है.

वहीँ एएन सिन्हा सामाजिक अध्ययन शोध संस्थान के पूर्व निदेशक डा डीएम दिवाकर का कहना है कि जब देश भर से कुछ अच्छे लोग आये तो उसका असर न्यूट्रल मतदाताओं पर प्रभाव पड़ता है. असर कितना होगा यह कहना मुश्किल है.

जिस जाति- धर्म के रफ़्तार में हम जी रहे हैं कन्हैया के लिए यही चुनौती भी है. मुझे लगता है कि कन्हैया इसी के लिए लड़ भी रहे हैं.

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