अखिलेश-मायावती पर भारी पड़ेंगे मोदी के तीन फ़ॉर्मूले?: लोकसभा चुनाव 2019

  • 15 अप्रैल 2019
अखिलेश यादव और मायावती इमेज कॉपीरइट Getty Images

"ये बाबा साहब की कृपा है कि एक चाय वाला देश का प्रधानमंत्री है."

"जब पश्चिमी यूपी जल रहा था. मासूम लोग मारे जा रहे थे तब उसके पीड़ितों की आवाज़ को अनसुना करने वाला कौन था?"

"मोदी का मिशन आतंकवाद को हटाना है."

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के अलीगढ़ रैली के ये तीन बयान उनके तरकश से निकले वो तीन तीर हैं जिनके सहारे वो उत्तर प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी का विजय रथ रोकने एक साथ आए तीन दलों समाजवादी पार्टी, बहुजन समाज पार्टी और राष्ट्रीय लोकदल को मात देना चाहते हैं.

अस्तित्व में आने के बाद से ही गठबंधन में शामिल तीनों दल दावा कर रहे हैं कि वोटों का अंक गणित उनके पक्ष में है और मोदी पश्चिम उत्तर प्रदेश में हिसाब अपने हक़ में साधने के लिए जो फॉर्मूला आजमा रहे हैं, उनमें तीन भावनात्मक मुद्दे अहम हैं. डॉक्टर आंबेडकर, हिंदुओं की सुरक्षा और राष्ट्रवाद.

पश्चिमी उत्तर प्रदेश की कई सीटों पर दलित मतदाता निर्णायक स्थिति में हैं. दूसरे चरण में 18 अप्रैल को पश्चिमी यूपी की जिन आठ सीटों पर मतदान होना है, उनमें से चार सुरक्षित क्षेत्र हैं.

राष्ट्रवाद और सेना का सम्मान

साल 2014 में हिंदुत्व का मुद्दा पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जाटों को भारतीय जनता पार्टी के पक्ष में लाने में कामयाब रहा था. राष्ट्रवाद और सेना के सम्मान का मुद्दा भी 'जाटलैंड' कहे जाने वाले इस इलाके में प्रभावी माना जाता है.

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मोदी ने रविवार की रैली में बात किसानों की भी की और रोज़गार की भी, लेकिन उनके करीब 25 मिनट के भाषण का बड़ा हिस्सा डॉक्टर आंबेडकर के गुणगान, साल 2013 में मुजफ्फरनगर में हुए दंगे के सांकेतिक जिक्र और 'पाकिस्तान को धूल चटाने और पाकिस्तान में घुसकर आतंकियों को मारने' का संकल्प दिलाने के नाम रहे.

मोदी इन मुद्दों पर इतने केंद्रित हैं कि वो उन मुद्दों का ज़िक्र भी नहीं कर रहे हैं जिन्हें भारतीय जनता पार्टी अपने 'कोर इश्यू' बताती है.

रविवार को डाक्टर भीम राव आंबेडकर की जयंती थी. अलीगढ़ और आसपास के इलाकों में कई जगह रविवार को ही रामनवमी भी मनाई जा रही थी. मोदी की रैली में आए कुछ समर्थक राम लीला के पात्रों का रूप भी रखकर आए थे.

लेकिन मोदी ने जिक्र सिर्फ़ डॉक्टर आंबेडकर की जयंती का किया. उन्होंने अपने भाषण की शुरुआत 'जय भीम' के नारे के साथ की और भाषण ख़त्म भी 'जय भीम' बोलते हुए ही किया.

आयोजकों को भी शायद इस आशय के संकेत मिल चुके थे. रैली मंच का जो बैकड्रॉप तैयार किया गया था, उसमें सबसे बड़ी तस्वीर नरेंद्र मोदी की थी और उसके बाद डॉक्टर आंबेडकर की.

मोदी ने ख़ुद के प्रधानमंत्री बनने को भी 'डॉक्टर आंबेडकर की कृपा' बताया. हालांकि इस दौरान मोदी ने उस सवर्ण आरक्षण का कोई जिक्र नहीं किया जिसे कुछ महीने पहले 'मास्टर स्ट्रोक' के तौर पर पेश किया जा रहा था.

उन्होंने ज़िक्र पंडित दीनदयाल उपाध्याय का भी नहीं किया, जिन्हें भारतीय जनता पार्टी अपना आदर्श मानती है और जिनके जन्मस्थान मथुरा की सीमा अलीगढ़ से लगती है.

साल 2017 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में 'कब्रिस्तान और श्मशान' का मुद्दा उठा चुके मोदी ने इस बार इस मुद्दे पर समाजवादी पार्टी को घेरने के लिए संकेतों का सहारा लिया.

समाजवादी पार्टी का नाम लिए बिना साल 2013 के मुज़फ़्फरनगर दंगों और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कथित पलायन के मुद्दे पर मोदी ने उसे कठघरे में खड़ा करने की कोशिश की.

उन्होंने कहा," पश्चिमी यूपी में कितना बडा पाप हुआ. पूरा देश उसका गवाह रहा. कैसे बहन-बेटियों के साथ दुर्व्यवहार हुआ. कैसे लोगों को अपना घर अपना कारोबार छोडना पड़ा. जब पश्चिमी यूपी जल रहा था. मासूम लोग मारे जा रहे थे तब उसके पीड़ितों की आवाज़ को अनसुना करने वाला कौन था? कौन था जिसने गुनहगारों को बचाया?"

मोदी का दावा

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मोदी ने ये भी दावा किया कि सपा और बसपा को यूपी 2014 और 2017 में बता चुका है कि जाति की स्वार्थ भरी राजनीति लोगों को नहीं चाहिए.

हालांकि 2014 और 2017 में मौजूदा गठबंधन अस्तित्व में नहीं था. तीन दलों के करीब आने के बाद से उत्तर प्रदेश में हुए लोकसभा के तीन उपचुनावों में गठबंधन बीजेपी पर भारी रहा है.

अलीगढ़ से लगी मांट विधानसभा सीट से लगातार आठ बार चुनाव जीतने वाले बहुजन समाज पार्टी के नेता श्याम सुंदर शर्मा बीजेपी के गठबंधन पर भारी पड़ने के दावे को ख़ारिज करते हैं.

वो दावा करते हैं, "सामने चाहे जो दिख रहा हो पर्दे के पीछे सिर्फ़ गठबंधन ही है."

गठबंधन को भरोसा सिर्फ़ गणित पर नहीं है. उसे लगता है कि सत्ता विरोधी रुझान भी उसे फ़ायदा देगा. मोदी कई बार कह चुके हैं कि इस चुनाव में एंटी इनकम्बेंसी नहीं दिख रही है.

Image caption श्याम सुंदर शर्मा, बसपा के वरिष्ठ नेता

लेकिन अलीगढ़ के स्थानीय पत्रकार रामचंद्र का दावा कुछ और है. वो बताते हैं कि अलीगढ़ से बीजेपी ने मौजूदा सांसद सतीश गौतम को उम्मीदवार बनाया है. लोकसभा सीट के कई ग्रामीण क्षेत्रों में उन्हें विरोध झेलना पड़ रहा है.

ऐसे ही विरोध की आशंका से बीजेपी ने हाथरस और आगरा के उम्मीदवारों को भी बदल दिया है.

हालांकि, बीजेपी के स्थानीय नेता दावा करते हैं कि वोटर उम्मीदवार नहीं बल्कि मोदी के नाम पर वोट देते हैं.

पश्चिमी उत्तर प्रदेश में मोदी तीसरे भावनात्मक मुद्दे यानी राष्ट्रवाद के मुद्दे को भी ज़ोर-शोर से उठा रहे हैं. दूसरे चरण में पश्चिमी उत्तर प्रदेश की जिन आठ सीटों पर मतदान होना है, वहां आतंकवाद के ख़िलाफ़ मज़बूत सरकार की ज़रूरत बताने वाले कई होर्डिंग लगे हैं.

मोदी की आक्रामकता

मोदी ने अलीगढ़ रैली में इस मुद्दे पर भी प्रमुखता से बात की.

अपने जाने-पहचाने अंदाज़ में उन्होंने लोगों से पूछा," पाकिस्तान में घुसकर आतंकियों को मारना चाहिए कि नहीं मारना चाहिये? हमारे वीर जवानों को खुली छूट मिलनी चाहिए कि नहीं ?आपके चौकीदार ने ठीक किया?"

रैली में आए समर्थक पूरे उत्साह के साथ मोदी के सवालों का जवाब दे रहे हैं, लेकिन गठबंधन के नेता इस मुद्दे पर मोदी और बीजेपी को कठघरे में खड़ा कर रहे हैं.

राष्ट्रीय लोकदल के उपाध्यक्ष जयंत चौधरी कहते हैं, "राष्ट्रीय स्तर पर आज ज्यादा जवान शहीद हो रहे हैं. आतंकवाद बढ़ गया है.जवाबदेही तो सरकार की बनती है. पुलवामा की घटना क्यों हुई? कितना शर्म का विषय है कि देश का प्रधानमंत्री कह रहा है कि पहली वोट दे दें आप शहीद के नाम पर."

वो आगे कहते हैं, "हम बार-बार कह रहे हैं कि इस चुनाव में पाकिस्तान मुद्दा नहीं है किसान मुद्दा है."

पश्चिमी उत्तर प्रदेश में किसान चाहे आलू उगाने वाले हों या गन्ना. दिक्कतें वो भी बयान कर रहे हैं. प्रधानमंत्री मोदी भी किसानों की बात करते हैं, लेकिन 'पाकिस्तान को धूल चटाने' वाली पंच लाइन दिक्कतों की बात को हाशिए पर ला देती है.

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कांग्रेस के उत्तर प्रदेश अध्यक्ष राज बब्बर के साथ विशेष बातचीत

रैलियों में समर्थकों का जोश बढ़ाने और तालियां हासिल करने में तो ये फॉर्मूला हिट है, लेकिन क्या इससे वोट भी मिलेंगे. इम्तिहान 18 अप्रैल को होगा.

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