नॉट्र डामः फ़्रांस के लिए क्यों है ख़ास

  • 16 अप्रैल 2019
नॉट्र डाम इमेज कॉपीरइट Getty Images

फ़्रांस की मुख्य पहचान आइफ़ल टॉवर है मगर नॉट्र डाम चर्च की बात कुछ और है.

आइफ़ल टावर एक सदी से कुछ ज़्यादा पुराना है. मगर नॉट्र डाम 850 सालों से पेरिस के दृश्यपटल का अभिन्न अंग बना हुआ है, वो पिछली आठ सदी से पेरिस की पहचान रहा है.

अंतरराष्ट्रीय ख्याति के लेखक विक्टर ह्यूगो ने इसी चर्च के नाम पर एक क्लासिक उपन्यास लिखा था - हंचबैक ऑफ़ नॉट्र डाम' - जो फ़्रेंच साहित्य की एक मास्टरपीस कृति माना जाता है.

इससे पहले आख़िरी बार इस चर्च को फ़्रांसीसी क्रांति के वक़्त नुक़सान पहुँचा था जब वहाँ चर्च विरोधियों ने संतों की मूर्तियों को तोड़ डाला था.

इमेज कॉपीरइट Getty Images

दो विश्वयुद्धों का गवाह

मगर 1871 की क्रांति, और दो विश्व युद्धों के बाद भी ये चर्च अपराजेय खड़ा रहा.

ऐसे में इस ऐतिहासिक प्रतीक को धूँ-धूँ जलते देखने पर फ्रांस के लोगों के दिलों पर क्या बीत रही होगी इसे समझना मुश्किल नहीं.

पेरिस में रहनेवाले जब सीन नदी के पास से गुज़रते हैं तो नॉट्र डाम की भव्य इमारत की एक झलक भर उनके भीतर फ़ख़्र का अहसास भर देती है.

ऐसा नहीं है कि पेरिस निवासी अक्सर नॉट्र डाम आया करते हैं.

मैं ख़ुद इस शहर में तीन दशकों से रह रहा हूँ, मगर मैं मुश्किल से तीन या चार बार भीतर गया होउँगा, और वो भी विदेशी पर्यटकों के साथ. और मेरे जैसे कई लोग मिल जाएँगे.

और ये चर्च केवल पश्चिमी यूरोप का सबसे लोकप्रिय पर्यटक स्थल भर नहीं है.

इमेज कॉपीरइट Reuters
Image caption नॉट्र डाम चर्च का मुख्य ढांचा.

आठ सदी बाद, अभी भी यहाँ पूजा होती है, और हर साल लगभग 2000 आयोजन होते हैं.

और नॉट्र डाम की अहमियत केवल पर्यटक स्थल या धार्मिक स्थल तक ही सीमित नहीं.

फ़्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रॉं ने चर्च में आग लगने पर कहा - 'पूरा देश जल रहा है'.

नॉट्र डाम से निकलती लपटों को देख बहुत सारे लोगों की आँखें भर आईं.

इमेज कॉपीरइट EPA

चाहे आस्तिक हों या नास्तिक, सब ग़मज़दा हैं.

एक ऐसे देश में जहाँ वो समय कब का ख़त्म हो गया जब लोग आस्था के नाम पर एकजुट हो जाया करते थे.

प्लेबैक आपके उपकरण पर नहीं हो पा रहा
फ़्रांस की ऐतिहासिक इमारत में लगी आग

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)

बीबीसी न्यूज़ मेकर्स

चर्चा में रहे लोगों से बातचीत पर आधारित साप्ताहिक कार्यक्रम

सुनिए

मिलते-जुलते मुद्दे

संबंधित समाचार