लोकसभा चुनाव 2019: पीएम मोदी की जाति सवर्ण से बनी थी ओबीसी?

  • 17 अप्रैल 2019
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कांग्रेस पर निशाना साधते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक बार फिर ख़ुद को पिछड़ी जाति का बताया है.

महाराष्ट्र के सोलापुर में एक रैली के दौरान मोदी ने कहा कि 'पिछड़ा वर्ग की वजह से उन्हें निशाना बनाया जा रहा है.'

कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के 'चौकीदार चोर है' और 'सभी चोरों का सरनेम मोदी है' जैसे बयानों को लेकर मोदी ने कहा, "पिछड़ा होने की वजह से, हम पिछड़ों को अनेक बार ऐसी परेशानियां झेलनी पड़ी हैं. अनेक बार कांग्रेस और उसके साथियों ने मेरी हैसियत बताने वाली, मेरी जाति बताने वाली बातें कही हैं."

मोदी ने कहा, "कांग्रेस के नामदार ने पहले चौकीदारों को चोर कहा, जब ये चला नहीं तो अब कह रहे हैं कि जिसका भी नाम मोदी है वो सारे चोर क्यों हैं?"

उन्होंने कहा, "लेकिन वो इस बार इससे भी आगे बढ़ गए हैं और पूरे पिछड़े समाज को ही चोर कहने लगे हैं."

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2002 से पहले मोदी की जाति सवर्ण?

2014 में जब पहली बार नरेंद्र मोदी ने ख़ुद को पिछड़ा वर्ग का बताया था तो इस पर ख़ासा विवाद हुआ था.

तब कांग्रेस ने आरोप लगाया था कि मोदी ने सत्ता में आने के बाद अपनी जाति को अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) में शामिल करा दिया था.

हालाँकि गुजरात सरकार ने सफ़ाई में कहा था कि घांची समाज को 1994 से गुजरात में ओबीसी का दर्जा मिला हुआ है. नरेंद्र मोदी इसी घांची जाति के हैं.

गुजरात कांग्रेस के नेता शक्ति सिंह गोहिल ने मोदी पर आरोप लगाया था कि वह पिछड़ी जाति के नही हैं.

गोहिल के अनुसार, मोदी 2001 में मुख्यमंत्री बने और राजनीतिक लाभ लेने के लिए 2002 में अपनी जाति को पिछड़ी जाति में डाल दिया.

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Image caption गुजरात सरकार का सर्कुलर

गुजरात सरकार का सर्कुलर

गोहिल ने गुजरात सरकार के 2002 के एक सर्कुलर का हवाला देते हुए आरोप लगाया था कि मोदी ने मुख्यमंत्री बनने के बाद अपनी जाति को ओबीसी श्रेणी में शामिल कराने के लिए जोड़तोड़ की थी.

उस समय गोहिल ने बीबीसी को बताया था कि उन्होंने यह पता लगाने के लिए एक आरटीआई याचिका दायर की थी कि घांची जाति को राज्य की ओबीसी सूची में कब लाया गया था.

गोहिल के अनुसार, "मोदी गुजरात राज्य के अमीर और समृद्ध मोढ घांची जाति से हैं. इस बिरादरी को मोदी के मुख्यमंत्री बनने से पहले ओबीसी सूची में कभी शामिल नहीं किया गया था."

गोहिल के मुताबिक, "मोदी ने गुजरात सरकार की व्यवस्था को अपने फ़ायदे के लिए बदला है. मोढ घांची समाज को ओबीसी सूची में डालने की कभी कोई मांग नही थीं पर ख़ुद को पिछड़ी जाति का बताकर वोट बैंक की पॉलिटिक्स कर सकें इसलिए उन्होने ख़ुद को पिछड़ा बना दिया."

बीबीसी हिंदी के पास एक जनवरी, 2002 को गुजरात सरकार की ओर से जारी किया गया वह पत्र है जिसमें मोढ घांची को ओबीसी सूची में शामिल करने की घोषणा की गई थी.

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कांग्रेस के आरोप के जवाब में गुजरात सरकार ने दो दशक पुरानी एक अधिसूचना का ज़िक्र किया जो कहती है कि मोढ घांची (तेली) जाति को अन्य पिछड़ा वर्ग में शामिल किया गया है.

राज्य सरकार के प्रवक्ता नितिन पटेल के मुताबिक, "गुजरात सरकार के समाज कल्याण विभाग ने 25 जुलाई 1994 को एक अधिसूचना जारी की थी जो 36 जातियों को ओबीसी श्रेणी में शामिल करती थी और इसमें संख्या 25 (ब) में मोढ घांची जाति का ज़िक्र है, इस जाति को ओबीसी में शामिल किया गया है."

कौन हैं मोढ घांची?

घांची जिन्हें अन्य राज्यों में साहू या तेली के नाम से जाना जाता है. ये पुश्तैनी तौर पर खाद्य तेल का व्यापार करने वाले लोग हैं. गुजरात में हिंदू और मुस्लिम दो धर्मों को मानने वाले घांची हैं.

इनमें से उत्तर पूर्वी गुजरात में मोढेरा से ताल्लुक रखने वालों को मोढ घांची कहा जाता है. गुजरात के गोधरा हत्याकांड में पकड़े गए ज़्यादातर लोग घांची मुसलमान थे.

जाने-माने सामाज विज्ञानी अच्युत याग्निक का कहना है कि 'यह कहना ग़लत होगा कि मोदी एक फ़र्ज़ी ओबीसी हैं.'

उन्होंने कहा, "कांग्रेस का आरोप इसलिए ग़लत है क्योंकि घांची हमेशा से ही ओबीसी सूची में आते हैं. मोदी जिस जाति से हैं वह घांची की ही एक उपजाति है. इसलिए वह ओबीसी सूची में कहलाएँगे."

गुजरात के राजनीतिक विचारक घनश्याम शाह भी याग्निक की बात से सहमत हैं.

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परिपत्र जारी क्यों किया?

घनश्याम शाह ने कहा, "गुजरात में घांची समाज राज्य के सभी हिस्सों में फैला हुआ है. इसका एक हिस्सा मोढेरा सूर्य मंदिर के आस-पास के इलाकों में है जिसे मोढ घांची कहते हैं."

पर सवाल यह है कि अगर मोदी की जाति ओबीसी सूची में आती थी तो फिर सरकार ने 2002 में यह परिपत्र क्यों जारी किया?

अपना नाम दिए जाने से इनकार करते हुए गुजरात सरकार के एक सीनियर अधिकारी ने बीबीसी हिंदी को बताया था, "समस्या यह थी कि जब घांची समाज को ओबीसी सूची में डाला तब उसकी सभी उपजाति को भी उसमें शामिल कर देना चाहिए था. पर ऐसा नही हुआ. इसलिए गुजारत सरकार ने एक नया परिपत्र जारी करके मोढ घांची का उसमें शामिल कर लिया."

हलांकि जब उनसे यह पूछा गया कि क्या यह मोदी के कहने से हुआ तो उन्होने इस बारे में 'जानकारी नहीं है' कहकर बात समाप्त कर दी.

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