चीन की 'नौका वाली सेना' को लेकर इतना हंगामा क्यों मचा है

  • 18 अप्रैल 2019
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अमरीकी रक्षा मंत्रालय ने कहा है कि वह चीन के 'मछली पकड़ने वाले समुद्री बेड़े' को वास्तव में नौसेना का हिस्सा मानेगी.

दरअसल, अप्रैल महीने की शुरुआत में जब चीन और फिलीपींस प्रशासन, साउथ चाइना सी के मुद्दे पर आपस में 'अच्छे नतीजे' वाली बातचीत कर रहे थे, तब विवादास्पद क्षेत्र में फिलीपींस अधिकृत द्वीप के आसपास दर्जनों मछली पकड़ने वाली चीनी नौकाएं जमा हो गईं थीं.

फिलीपींस की सेना के मुताबिक जनवरी से टीटू द्वीप (फिलीपींस में पागासा और चीन में झोंजेई नाम से जाना जाने वाला द्वीप) के आसपास सैंडी काय एरिया में ऐसी 275 नौकाएं मौजूद थीं.

फिलीपींस के अधिकारियों के मुताबिक ये नौकाएं, कथित तौर पर चीन के उस समुद्री बेड़े का हिस्सा हैं जो समुद्र में मछली पकड़ने का काम करती हैं लेकिन अंतरराष्ट्रीय नौसेना विशेषज्ञों के मुताबिक ये बेड़े मछली पकड़ने के अलावा भी बहुत कुछ करते हैं.

इसे चीन का थर्ड सी-फोर्स भी कहा जा रहा है जो पीपल्स लिबरेशन आर्मी नेवी (पीएलएएन) और चाइनीज कोस्ट गार्ड (सीसीजी) के साथ तालमेल में काम करता है. हालांकि चीन की सराकर ने ऐसे किसी बेड़े के अस्तित्व से इनकार किया है और इन समुद्री नौकाओं के कामों में किसी तरह से संलिप्ता की बात का खंडन किया है.

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समुद्र में गुरिल्ला युद्ध

फिलीपींस के राष्ट्रपति रोड्रिगो ड्यूटेर्टे के शासनकाल में फिलीपींस और चीन के आपसी संबंध काफी बेहतर हुए हैं, ऐसे में मौजूदा घटनाक्रम को अप्रत्याशित रूप में देखा जा रहा है.

फिलीपींस ने अपनी अप्रसन्नता जाहिर करते हुए चीन के इन नौकाओं की मौजूदगी को गैर कानूनी बताया है. फिलीपींस के मुताबकि चीन के इस रवैए से उसकी नीयत पर सवाल उत्पन्न होते हैं और उद्देश्यों को पूरा करने के लिए उसकी बलपूर्वक नीतियों को दर्शाते हैं.

मनीला ने चार अप्रैल को कहा है, "चीन की सरकार ने ऐसी गतिविधियों से इनकार नहीं किया है, ऐसे में लग रहा है कि उन्होंने ऐसी रणनीति को अपनाया है."

फिलीपींस की मीडिया में ऐसी भी खबरें आ रही हैं जिसके मुताबिक चीनी समुद्री नौकाएं दो अन्य द्वीपों - कोटा द्वीप और पानाटाग द्वीप के आसपास भी मौजूद हैं.

यूनिवर्सिटी ऑफ़ फिलीपींस, इंस्टीट्यूट फॉर मैरीटाइम अफेयर्स एंड लॉ बाय द सी के डायरेक्टर जे बाटोंगबाकाल के मुताबिक ये नौकाएं चीन सरकार की सहायता और अनुदान से चलने वाले बेड़े का हिस्सा हैं, जो चीनी सेना के नियंत्रण और तालमेल से अपना काम करती हैं.

चार अप्रैल को एबीएस-सीबीएन चैनल को दिए गए इंटरव्यू में बाटोंगबाकाल ने कहा कि अगर चीन सैंडी काय एरिया में जहाजों से नॉन मिलिट्री नौकाओं के बेड़े को नहीं हटाता है तो फिर फिलीपींस टीटू द्वीप पर अपना नियंत्रण खो देगा क्योंकि तब द्वीप तक पहुंचना संभव नहीं होगा. बाटोनगबाकाल इसे समुद्र में गुरिल्ला युद्ध के तौर पर देख रहे हैं.

लेकिन चीन के फिलीपींस में तैनात राजनयिक जहाओ जिआनहुआ कहते हैं कि ये समुद्री नौकाएं केवल मछली पकड़ने वाली नौकाएं हैं और ये सशस्त्र नहीं हैं.

चाइनीज एकेडमी ऑफ़ सोशल साइंसेज के विद्वान शू लिपिंग इस घटना को लेकर चीन के उद्देश्यों के बारे में एकदम स्पष्टता से बताया है. उनहोंने 13 अप्रैल को हांगकांग के अख़बार साउथ चाइना मार्निंग पोस्ट (एससीएमपी) से कहा है कि फिलीफींस जो टिटू द्वीप में निर्माण कार्य कर रहा है, उसे देखते हुए ये नौकाएं चीन की ओर से नरमी भरी चेतावनी थी.

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दबी छुपी रणनीति

नौसेना विशेषज्ञों के मुताबिक ऐसी रणनीति के जरिए कई उद्देश्यों को पूरा किया जाता है, जिसमें अपनी सीमा रेखा को बढ़ाना, दूसरे देश की सीमाओं की निगरानी, विदेशी जहाजों का डराना और विवादास्पद क्षेत्र में किसी दूसरे देश के प्रवेश को रोकना शामिल है.

ऐसे में ये भी माना जा रहा है कि चीन और फिलीपींस के बीच मौजूदा संकट ये बताता है कि इस तरह के अनियिमित सैन्य बलों से निपटना आसान नहीं होता है.

इन नावों का इस्तेमाल ट्राइपवायर के तौर पर किया जा सकता है, यानी पीपल्स लिबरेशन आर्मी नेवी (पीएलएएन) की किसी योजना को पूरा कर सकते हैं. 2012 में ऐसा हो चुका है जब चीन ने स्कारबरा शोएल पर कब्जा किया था.

रक्षा विशेषज्ञों के मुताबिक इन नावों पर जब कोई कार्रवाई नहीं होती है तो ये धीरे धीरे विवादास्पद क्षेत्र में अपनी संख्या बढ़ाते रहते हैं और एक समय ऐसा आता है जब किसी दूसरे के लिए उस क्षेत्र में प्रवेश करना मुमकिन नहीं रह जाता है. इस ग्रे ज़ोन ऑपरेशन कहते हैं यानी बिना कोई फायरिंग किए फायदा उठा लिया जाता है.

अमरीकी थिंक टैंक रैंड कारपोरेशन के वरिष्ठ रक्षा विश्लेषक डेरेक ग्रॉसमैन बीबीसी मॉनिटरिंग से कहते हैं, "नाव के बेड़े के रूप में सैनिकों की मौजूदगी से कंफ्यूजन की स्थिति पैदा होती है, विरोधी इसे बेहतर तरीके से कैसे डील करें, ये उलझन पैदा हो जाती है."

राष्ट्रपति रोड्रिगो ड्यूटेर्टे की चीन संबंधी नीतियों के कटु आलोचक और फिलीपींस के सांसद गैरी अलेजानो इसी चीन की कैबेज स्ट्रेटजी ( जो रणनीति कई स्तर पर एक साथ काम करती हो) का हिस्सा बताते हैं.

उन्होंने नौ फरवरी को साउथ चाइना मार्निंग पोस्ट से कहा था, "कैबेज की तरह, चीनी नौकाएं हमारी सीमा के आसपास जमा है, उनका उद्देश्य हमारे सैनिकों को धमकाना और अपने द्वीप पर हमारे प्रभावी नियंत्रण को रोकना है."

ऐसी एक स्थिति 2014 में तब देखने को मिली थी जब ऐसी नौकाओं ने पीएलएएन और सीसीजी के साथ मिलकर एक बड़े तेल टैंकर वाले चाइनीज जहाज पर हमला करने के उद्देश्य से आने वाले वियतनामी नौकाओं के बेड़े को रोक दिया था, यह तेल टैंकर वियतनाम के विशेष आर्थिक जोन में मौजूद था.

हालांकि एस. राजारत्नम स्कूल ऑफ इंटरनेशनल स्टडीज (आरएसआईएस) के रिसर्चर जैंग होंगजाओ कहते हैं सभी मछुआरों को सैनिक के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए. उन्होंने तीन मार्च को साउथ मार्निंग चाइना पोस्ट से कहा, "इस नैरेटिव को अगर ओवरप्ले किया गया तो सभी मछुआरों को नौसैनिकों की तरह देखा जाना लगेगा."

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मछुआरों का इस्तेमाल

बीते कई दशकों से इस तरह के समुद्री सैनिकों की बात हो रही है, लेकिन विशेषज्ञों के मुताबिक अब ये सेना जो रणनीतिक उद्देश्यों को पूरा करने के लिए कहीं ज्यादा सक्षम हो चुकी है.

आरएसआईएस के रक्षा विशेषज्ञ कोलिन कोह स्वी लीन बताते हैं कि इन समुद्री सैनिकों की शुरुआत चाइनीज सिविल वॉर के समय से ही हो गई थी. लीन ने बीबीसी मॉनिटरिंग को बताया, "पीएलएएन और सीसीजी के गठन के बाद भी समुद्री नौ सैनिक प्रभावी पुलिस फोर्स बने रहे."

डेरेक ग्रोसमैन कहते हैं कि पीएलएएन इन नौकाओं को प्रशिक्षिण, उपकरण और अनुदान सब मुहैया कराता है.

चीनी ने अपनी नौसेना का पूरी तरह से आधुनिकीकरण किया है, लेकिन उसने इन नौकाओं का इस्तेमाल भी जारी रखा है. इसकी एक वजह तो यही है कि इसे बहुत आसानी और बहुत तेजी से बनाया जा सकता है.

कोलिन बताते हैं, "अब नौकाओं के बेड़े कहीं ज्यादा अत्याधुनिक हैं, खासकर उनमें मौजूद हथियारों की रेंज जिस तरह से बेहतर हुई है, उसके चलते सेना कुछ समय के लिए खुले समुद्र में इन नौकाओं के जरिए अपना अभियान चला सकती है."

हालांकि चीनी सरकार इन नौकाओं के अस्तित्व को कमतर बताने की कोशिशों में जुटी है लेकिन चीन की सरकारी मीडिया (एकाध बार ही सही) ने इनके कामकाज के बारे में इन्हें समुद्र से लड़ने वाले किले या हल्की फौज बताया है.

चाइना डेली ने 2016 के अपने एक लेख में बताया है, "पीपल्स लिबरेशन आर्मी अपनी नौ सेना को मजबूत कर रहा है. इसके लिए दर्जनों नए जहाज और नौकाएं तैनात की गई हैं, यह ऐसी सेना है जिस पर लोगों की ज्यादा नजर नहीं गई है. यह अपनी ऑपरेशनल क्षमता को भी बेहतर कर रही है. इस सेना में अधिकांश स्थानीय मछुआरों को शामिल किया गया है."

2014 में चीन के आधिकारिक सैन्य समाचार पत्र पीएलए डेली ने इस पर दो टूक लिखा था, "क्षद्म आवरण में ये सैनिक जैसे हैं. लेकिन आवरण हटाने पर ये कानून का पालन करने वाले मछुआरे हैं."

अमरीकी नेवल वॉर कॉलेज में रणनीति मसलों के प्रोफेसर एंड्रूय इरिक्सन ने इन सैनिकों के लिए एक नया शब्द गढ़ा है- लिटिल ब्लू मैन. इस शब्द का चयन उन्होंने रूस और यूक्रेन के उन सैनिकों के आधार पर किया है, जिनकी पहचान स्पष्ट नहीं होती है- उन्हें लिटिल ग्रीन मैन कहा जाता है.

एंड्रूय इरिक्सन के मुताबिक ऐसी स्थिति से निपटने का सबसे बेहतरीन तरीका तो यही है कि नौकाओं की गतिविधियों के बारे में ज्यादा से ज्यादा प्रचारित करें और उस क्षेत्र में अपनी उपस्थिति को कायम रखें.

इरिक्सन मुहावरे के जरिए कहते हैं, "सूर्य की रोशनी ही सबसे बेहतर कीटाणुनाशक होती है."

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