भागलपुर में एसिड अटैक पीड़िता की हालत स्थिर, एसआईटी करेगी जाँच

  • सीटू तिवारी
  • बीबीसी हिन्दी के लिए
घटना को लेकर प्रदर्शन कर रहे लोग

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भागलपुर में एसिड अटैक की घटना के बाद लोगों ने प्रदर्शन किए

" बुधवार को मेरी बच्ची छत पर कपड़ा डालने गई थी. पड़ोस में रहने वाले एक लड़के और उसके दोस्तों ने बच्ची के साथ 'कॉमेडी ' किया. बच्ची ने कुछ नहीं कहा और वहां से चली आई. लेकिन शुक्रवार को इन लोगों ने बच्ची पर घर में घुसकर तेजाब डाल दिया."

बनारस में भागलपुर की एसिड एटैक की इलाजरत पीड़िता के पिता ने बीबीसी से फोन पर बातचीत करते हुए ये बताया.

शनिवार रात उसकी मौत की खबर सोशल मीडिया पर वायरल हुई थी लेकिन 12 वीं में पढ़ने वाली 17 साल की आरती (बदला हुआ नाम) की हालत अब स्थिर है.

क्या है पूरी घटना ?

घटना 19 अप्रैल की बताई जा रही है जब भागलपुर में रहने वाली आरती के घर की छत के रास्ते से तीन नकाबपोश लड़के शाम तकरीबन 6.30 बजे घुसे.

आरती के पिता ने बबरगंज थाने में जो एफ़आईआर दर्ज की है, उसके मुताबिक आरती और उसकी मां खाना बना रही थी. इतने में ये लड़के घुसे और आरती की मां के पिस्तौल सटाकर बेटी के चेहरे पर एसिड डाल दिया जिसके बाद आरती अपने कमरे की तरफ चिल्लाते हुए भागी.

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पीड़िता के घर के बाहर खड़े लोग और पुलिसकर्मी

आरती के साथ-साथ उसकी मां भी शोर करने लगी जिसपर अपराधी अपना एक पिस्तौल आरती के घर की रसोई में ही छोड़ कर भाग गए.

इधर शोर सुनकर पड़ोसियों ने सुनार का काम करने वाले उसके पिता को जानकारी दी. जिसके बाद इलाज के लिए उसे स्थानीय मायागंज अस्पताल में भर्ती कराया गया.

बाद में माता पिता आरती को इलाज के लिए बनारस ले गए. जहां उसका इलाज चल रहा है.

बच्ची के पिता ने बताया कि एसिड से उसका चेहरा और हाथ जल गया है. बाकी शरीर ठीक है. उसकी आंखें सुरक्षित है और वो फिलहाल हल्की-फ़ुल्की बातचीत कर रही है.

वो कहते हैं, " मेरी बच्ची की ज़िंदगी खराब हो गई और उसकी ही क्यों, साथ-साथ हमारी भी ख़राब हो गई. हमारी किसी से दुश्मनी नहीं है. दुश्मनी थी तो मुझसे बदला लेते. बच्ची ने क्या किया था?"

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घटना की जाँच के लिए मौक़े पर पहुँचे पुलिसकर्मी

एफ़आईआर में गैंपरेप की कोशिश का ज़िक्र नहीं

स्थानीय अखबारों में आरती के साथ 'गैंगरेप की कोशिश' का ज़िक्र है लेकिन पिता की ओर से दर्ज एफ़आईआर में इसका ज़िक्र नहीं है. एफ़आईआर में आईपीसी की धारा 307/ 457/326 (ए)/ 34 और आर्म्स एक्ट की 25 (1 -बी)ए/26/35 धारा लगी है.

बीबीसी से बातचीत में पिता ने बताया, " सुबह 9 बजे से शाम 4 बजे तक पढ़ाई के लिए वो बाहर रहती थी. अगर कुछ ग़लत होता तो घटना घर के बाहर घट सकती थी लेकिन घर में घुसकर क्यों ये हमला किया, इसका कोई जवाब मेरे दिमाग में नहीं आ रहा है."

पटना हाईकोर्ट में क्रिमिनल लॉयर सुधा अम्बष्ठ कहती हैं, " पीड़िता के पिता ने घटना को नहीं देखा है. ऐसे में पीड़िता के बयान या सूचक का जो पुनर्बयान होगा, उसका इंतज़ार करना होगा."

एफ़आईआर में मुख्य आरोपी प्रिंस को गिरफ़्तार कर लिया गया है. इसके अलावा दो संदिग्धों से पूछताछ चल रही है. आरती के पिता के मुताबिक घर के अंदर तीन नकाबपोश लड़के घुसे थे, लेकिन घर के बाहर भी नामजद आरोपी के दोस्त खड़े थे.

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मुख्य आरोपी के घर के बाहर लगा ताला

एसआईटी का गठन

वहीं स्थानीय मीडिया में छपी रिपोर्ट के मुताबिक प्रिंस की मां रेणु देवी ने अपने बेटे को निर्दोष बताया है.

भागलपुर रेंज के डीआईजी विकास वैभव ने बीबीसी से बातचीत में बताया, "एसिड एटैक क्यों और किस कारण हुआ इसकी वजह की जांच चल रही है. सिटी एसपी के नेतृत्व में एसआईटी का गठन किया गया है. उम्मीद है कि जल्द ही इस केस को हम सुलझा लेंगे. "

ग़ौरतलब है कि जुलाई 2018 में बिहार कैबिनेट ने पीड़ित प्रतिकार स्कीम को मंज़ूरी दी थी जिसके तहत एसिड एटैक की पीडितों को तीन की जगह सात लाख रूपए मुआवज़ा देने और आजीवन दस हज़ार रूपए प्रति माह सहायता दी जाएगी.

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