दक्षिण एशियाई देशों को दहलाने वाले चरमपंथी हमले

  • 22 अप्रैल 2019
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श्रीलंका में रविवार को आठ सिलसिलेवार आत्मघाती हमले ने देश को हिला कर रख दिया है. देश में हालात को देखते हुए कर्फ़्यू लगा दिया गया है. इस हमले की ज़िम्मेदारी अब तक किसी ने नहीं ली है ना ही हमलावरों को पकड़ा जा सकता है.

दक्षिण एशिया के देश कई बड़े चरमपंथी हमलों से पीड़ित रहे हैं. इन देशों में भारत, पाकिस्तान, अफ़गानिस्तान और अब श्रीलंका का नाम भी शामिल हो चुका है.

पिछले कुछ साल में हुए ऐसे ही बड़े चरमपंथी हमलों के बारे में हम आपको बता रहे हैं.

पेशावर हमलाः 16 दिसंबर, 2014 को पाकिस्तान के पेशावर में एक आर्मी स्कूल में हुआ था. इस हमले में 141 लोगों की मौत हुई थी जिसमें 132 बच्चे थे. इस हमले के पीछे तालिबान का हाथ था.

बीबीसी उर्दू से उस वक़्त बातचीत में तालिबान के प्रवक्ता ने कहा था कि इस आर्मी स्कूल को सेना के ऑपरेशन के जवाब में निशाना बनाया गया था.

इस हमले से पहले उत्तरी वज़ीरिस्तान और ख़ैबर इलाके में पाकिस्तानी सेना के ऑपरेशान में सैकड़ों तालिबान लड़ाकों की मौत हो गई थी.

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मुंबई ताज हमलाः 26 नवंबर साल 2008 को मुंबई में कई जगहों पर चरमपंथी हमले किए गए. इस हमले में 174 लोगों की मौत हुई थी. ये हमले 60 घंटों तक जारी रहे थे.

उन तीन दिनों में दौड़ता-भागता, जीता-जागता मेट्रोपोलिटन मुंबई शहर ठहर सा गया था. सहम सा गया था. ये न्यू यॉर्क के 9 /11 की तरह मुंबई का 26/11 साबित हुआ.

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मस्तंग हमलाः 16 जुलाई को बलूचिस्तान के मस्तंग में एक चुनावी रैली के दौरान आत्मघाती हमला हुआ था. जिसमें 149 लोगों की मौत हो गई थी. इसे आज़ादी के बाद पाकिस्तान का दूसरा सबसे बड़ा हमला माना गया.

25 जुलाई को पाकिस्तान में आम चुनाव होने थे और इससे ठीक कुछ दिन पहले ही ये हमला हुआ.

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काबुल हमलाः 31 मई 2017 में काबुल स्थित जर्मन दूतावास के पास हुए बम धमाके में 150 लोगों की मौत हुई थी और 300 से ज़्यादा लोग ज़ख्मी हुए थे.

ये हमला काबुल के सबसे रिहायशी इलाके जर्मन दूतावास और अफ़गान प्रसिडेंशिल पैलेस के पास हुआ था. साल 2001 के बाद ये देश में होने वाला सबसे बड़ा धमाका था.

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श्रीलंका ईस्टर हमलाः ईस्टर के दिन श्रीलंका में आठ जगहों पर सिलसिलेवार आत्मघाती हमले में अब तक 290 लोगों की मौत हो गई है. हमले में लगभग 500 लोग घायल हैं. मृतकों में 36 विदेशी नागरिक भी शामिल हैं जिसमें छह भारतीय हैं.

इस पूरे मामले में 24 लोगों की गिरफ़्तारी भी हुई है. हालांकि अब तक हमलावर की पहचान नहीं हो सकी है.

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