लोकसभा चुनाव 2019: भव्य बनाम दुष्यंत: देवी लाल बनाम भजन लाल एक बार फिर

  • 24 अप्रैल 2019
भव्य विश्नोई, दुष्यंत चौटाला इमेज कॉपीरइट FACEBOOK

बात 30 साल पुरानी यानी 1989 की है.

हरियाणा के मुख्यमंत्री देवी लाल को उप प्रधानमंत्री बनाया जा रहा था और मुख्यमंत्री की कमान दे दी गई उनके पुत्र ओम प्रकाश चौटाला को.

प्रेस कांफ्रेंस में किसी ने देवी लाल से सवाल किया कि पार्टी में क्या कोई और नेता नहीं है कि आप परिवार के कुनबे से बाहर नहीं निकल पा रहे हैं और अपने पुत्र को ही आगे बढ़ाने में लगे हैं. अपने अंदाज़ में देवी लाल ने कुछ ऐसा जवाब दिया: अपने छोरे को आगे न बढ़ांऊ तो थारे छोरे को बढाऊँ क्या.

तीस सालों में न केवल देवी लाल के पुत्र और पोते राज्य की राजनीतिक गलियारों में काफी सक्रिय रहे बल्कि बाकी दोनों 'लाल' यानी भजन लाल और बंसी लाल के वंशज भी लगातार राजनीति में सक्रिय रहे.

इन तीनों लालों की आपसी प्रतिद्वंद्विता के बिना हरियाणा की राजनीति अधूरी है. इनकी प्रतिद्वंद्विता अगली पीढ़ी में भी पहुँची और फिर दूसरी से तीसरी पीढ़ी में.

रविवार को इनकी प्रतिद्वंद्विता में एक और अध्याय जुड़ गया जब कांग्रेस के नेता और गैर जाटों के दिग्गज माने जाने वाले भजन लाल के पोते और कुलदीप बिश्नोई के बेटे भव्य बिश्नोई को कांग्रेस ने हिसार से टिकट दे दिया. उनका मुकाबला होगा देवी लाल के बेटे यानी चौटाले के पोते दुष्यंत चौटाला से, जिसे राजनीति पर नज़र रखने वाले एक बड़ी लड़ाई की तरह देख रहे हैं.

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Image caption पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर और विश्वनाथ प्रताप सिंह के साथ चौधरी देवी लाल

1982 विधानसभा चुनाव

खास तौर पर इसलिए भी क्योंकि दोनों परिवारों की प्रतिद्वंद्विता बड़ी और दिलचस्प हुआ करती थी. लोग अभी भी याद करते हैं साल 1982 के विधानसभा चुनाव जब भजन लाल की कांग्रेस पार्टी को 90 में से 35 सीटें मिली थी जबकि लोक दल के देवी लाल को 31 और बीजेपी जिसके साथ उनका गठबंधन था उनके पास छह सीटें थी.

सरकार बनाने की कवायद तेज़ थी. जहां देवी लाल अकाली दल के अपने मित्र प्रकाश सिंह बादल की मदद से अपने विधायकों को हिमाचल के परवाणु शहर के पहाड़ों के बीच एक होटल में पहुँचा रहे थे वहीं भजन लाल अपने बीचक्राफ्ट जहाज़ से दिल्ली से आए और सीधे राज भवन पहुँचे. कुछ ही घंटों बाद भजन लाल मुख्यमंत्री के तौर पर शपथ ले रहे थे.

एक पूर्व आईएस अधिकारी ने बीबीसी को बताया कि ज़ाहिर है कि देवी लाल इससे बहुत आग बबूला हुए थे. उन्होंने बताया, "मुझे याद है अगले दिन यहाँ अख़बारों में एक तस्वीर छपी थी जो मुझे अभी तक याद है. उस तस्वीर में देवी लाल का हाथ राज्यपाल जीडी तपासे की कमीज़ के कालर पर था जो सारी कहानी बयान कर रहा था."

वे कहते हैं कि कुल मिला कर भजन लाल को हमेशा से एक चतुर नेता माना जाता था. "उनका तरीका यह था कि विरोधियों को अपनी ओर करने के लिए उन्हें कोई फायदे का ओहदा दे देते थे. वे कहते थे कि अपने तो साथ में हैं ही, ज़रूरी है दुश्मनों को बस में करना."

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Image caption ओम प्रकाश चौटाला

बिश्नोई दो फ़ीसदी से भी कम

वह कहते हैं कि शायद यही कारण है कि बिश्नोईयों की राज्य में संख्या दो प्रतिशत से भी कम है और इतना जातिवाद होने के बावजूद भजन लाल तीन बार मुख्यमंत्री बने.

उनका कहना है कि वहीं दूसरी ओर देवी लाल और फिर ऐसे ही ओम प्रकाश चौटाला अपने प्रतिद्वंद्वियों को न तो भूलते थे न ही खुश करने की कोशिश करते थे. देवी लाल दो बार और चौटाला चार बार मुख्यमंत्री बने.

सवाल यह है कि क्या वही प्रतिद्वंद्विता फिर से दोनों परिवारों के युवा पीढ़ी के बीच में दिखने वाली है या फिर वक्त के साथ चीज़ें बदली हैं?

जेजेपी के दुष्यंत चौटाला ने बीबीसी से बातचीत में बताया कि राजनीति में कोई प्रतिद्वंद्वी नहीं होता तो भजन लाल के पोते को वो बस एक और उम्मीदवार की तरह ही ले रहे हैं.

उन्होंने कहा, "यहां तो जो सबसे काबिल है वही रहता है. मेरे लिए वो एक ऐसी पार्टी (कांग्रेस) के उम्मीदवार हैं जिसने दस साल तक अपने राज में लोगों को बहुत लूटा. ठीक वैसे ही जैसे बीजेपी के उम्मीदवार बृजेंद्र सिंह है जिनकी पार्टी ने लोगों को जातपात के नाम पर बाँटने का काम किया."

वैसे पिछले चुनाव में दुष्यंत ने भव्य के पिता कुलदीप बिश्नोई को हिसार में ही हराया था लेकिन भव्य का कहना है कि उनके सामने दुष्यंत कोई चुनौती नहीं हैं.

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कौन हैं भव्य बिश्नोई

मात्र 26 वर्षीय भव्य ने बताया कि वो लंदन स्कूल ऑफ़ इकोनॉमिक्स और फिर आक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी से पढ़े हैं.

भव्य का छोटा भाई चैत्नय बिश्नोई क्रिकेटर हैं और आईपीएल में चेन्नई इंडियंस की टीम से खेलते है और एक छोटी बहन भी है.

वे कहते हैं, "लोगों को उम्मीद थी कि दुष्यंत देश के सबसे युवा सांसद बने हैं पर वो कुछ कर ही नहीं पाए जिससे सारा हिसार उनसे निराश है."

पूछे जाने पर कि क्या अपने दादा भजन लाल जो गैर जाटों के 'आयकन' माने जाते थे उन्हीं की तरह वो भी गैर जाटों के समर्थन की उम्मीद कर रहे हैं तो उन्होंने दावा किया, "मैं जात-पात में विश्वास नहीं करता और मुझे विश्वास है कि मुझे सभी लोगों से समर्थन मिलेगा."

वैसे रविवार को भव्य को टिकट मिलना काफी नाटकीय रहा. टिकट मिलने से पहले ही जिंदल हाउस ने भव्य के प्रत्याशी होने का एलान कर दिया था. पूर्व मंत्री और पार्टी की वरिष्ठ नेता सावित्री जिंदल ने दोपहर को ही इसके बारे में ट्वीट कर दिया जो सोशल मीडिया पर काफी फैला भी जबकि टिकट की सूची रात को जारी की गई.

मुक़ाबला कठिन है. पिछली बार जीतने के बाद कर दुष्यंत अब तज़ुर्बेकार नेता हैं वहीं आईएएस छोड़ कर राजनीति में आए बीजेपी के बृजेंद्र सिंह एक सशक्त दावेदार हैं. जाहिर है कि राजनीति में दिलचस्पी रखने वाले अपनी नज़रें खास तौर पर हिसार पर गड़ाए बैठे हैं.

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