बिलक़ीस बानो को 50 लाख मुआवज़ा और सरकारी नौकरी

  • मेहुल मकवाना और कमलेश
  • बीबीसी संवाददाता
बिलक़ीस बानो

इमेज स्रोत, CHIRANTANA BHATT

इमेज कैप्शन,

बिलक़ीस बानो

2002 के गुजरात दंगों के दौरान गैंगरेप पीड़ित बिलक़ीस बानो को सुप्रीम कोर्ट ने 50 लाख रुपये मुआवज़ा, सरकारी नौकरी और घर दिए जाने का आदेश दिया है.

इससे पहले गुजरात सराकर ने बिलकीस बानो को 5 लाख रुपये मुआवज़ा देने की पेशकश की थी जिस पर बिलक़ीस बानो ने याचिका दायर करके इसे अपर्याप्त बताया था.

कोर्ट ने सबूत मिटाने के आरोप में आईपीएस आरएस भगोरा को दो पदावनति देने का आदेश भी दिया है.

सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर ख़ुशी जाहिर करते हुए बिलक़ीस बानो ने कहा, "ये फैसला उनके लिए सुकून देने वाला है."

बिलक़ीस के पति याकूब ने बीबीसी से कहा, "आज हमारे और बिलकीस के साथ न्याय हुआ है. बहुत अच्छा आदेश है. पूरा परिवार खुश है. हमारे देश की सर्वोच्च अदालत ने जो भी फैसला दिया है वो हमारे लिए बहुत खुशी की बात है."

इमेज स्रोत, CHIRANTANA BHATT

ज़ुर्माने से संतुष्ट

याक़ूब कहते हैं, "बहुत लंबा सफर रहा और बहुत सारी परेशानियां हुईं. धमकियों के चलते कई बार घर बदलना पड़ा. घर चलाना आसान नहीं था."

बीबीसी से बात करते हुए बिलक़ीस की वकील शोभा गुप्ता ने कहा, "कुछ नुकसान ऐसे होते हैं जिनकी भरपाई कभी नहीं हो सकती. ये मुआवज़े से ज़्यादा सरकार पर एक ज़ुर्माने की तरह है. जो सरकार की तरफ से पेशकश की गई थी ये मुआवज़ा उससे कहीं बेहतर है. अगर ये सब मिल जाता है तो एक तरह से कोर्ट ने बिलक़ीस को पुनर्वास करने और खुश होने का मौका दिया है. अगर सरकार ये सब समय पर नहीं देती है तो हम अगले कदम के बारे में सोचेंगे."

2002 के गुजरात दंगों के दौरान अहमदाबाद के पास रणधी कपूर गांव में एक भीड़ ने बिलक़ीस बानो के परिवार पर हमला किया था.

इस दौरान पांच महीने की गर्भवती बिलक़ीस बानो के साथ गैंगरेप किया गया. उनकी तीन साल की बेटी सालेहा की भी बेहरमी से हत्या कर दी गई. उस वक़्त बिलक़ीस क़रीब 20 साल की थीं.

इमेज स्रोत, Reuters

14 रिश्तेदार मारे गए थे

इस दंगे में बिलक़ीस बानो की मां, छोटी बहन और अन्य रिश्तेदार समेत 14 लोग मारे गए थे.

इस मामले कि सुनवाई की शुरुआत अहमदाबाद में हुई थी लेकिन सबूतों और गवाहों से छेड़छाड़ कीआशंका जताने पर मामले को साल 2004 में बॉम्बे हाई कोर्ट ट्रांसफर कर दिया गया था.

21 जनवरी 2008 को स्पेशल कोर्ट ने 11 लोगों को हत्या और गैंगरेप का दोषी मानते हुए उम्रकैद की सज़ा सुनाई थी. इस मामले में पुलिस और डॉक्टर सहित सात लोगों को छोड़ दिया गया था.

सीबीआई ने बॉम्बे हाई कोर्ट में दोषियों के लिए और कड़ी सज़ा की मांग की थी.

इसके बाद बॉम्बे हाई कोर्ट ने मई, 2017 में बरी हुए सात लोगों को अपना दायित्व न निभाने और सबूतों से छेड़छाड़ को लेकर दोषी ठहराया था.

2002 में हुए गुजरात दंगों में 1,000 से ज्यादा लोग मारे गए थे. इनमें से ज्यादातर मुस्लिम थे.

इन दंगों की शुरुआत गोधरा में 60 हिंदू तीर्थ यात्रियों की मौत के बाद हुई थी, जिनकी मौत साबरमती एक्सप्रेस ट्रेन में आग लगने के कारण हुई थी.

जिसके बाद गुजरात में बड़े पैमाने पर दंगे भड़क गए.

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम और यूट्यूबपर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)