'हिंदू गुरु से सीखी पहलवानी, जेल में मिला ये सिला'

  • 23 अप्रैल 2019
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तिहाड़ जेल में विचाराधीन क़ैदी शब्बीर की पीठ पर 'ओम' गोदने के मामले में अब कड़कड़डूमा अदालत में 30 अप्रैल को सुनवाई होगी क्योंकि जेल प्रशासन, अदालत में अपनी जांच रिपोर्ट पेश करने में असमर्थ रहा है.

पहले अदालत ने जांच रिपोर्ट पेश करने के लिए 22 अप्रैल का दिन तय किया था.

मगर तिहाड़ जेल की तरफ से कोर्ट में मौजूद अधिकारी ने जांच की रिपोर्ट पेश करने के लिए दो सप्ताह का समय मांगा जिसे अदालत ने ख़ारिज करते हुए अगले एक सप्ताह के भीतर ही रिपोर्ट पेश करने का आदेश दिया है.

विचाराधीन क़ैदी के घरवालों का आरोप है कि उसे जेल में पहले से ही प्रताड़ित किया जा रहा था.

जेल के अधिकारी कहते हैं कि मामले की जांच चल रही है और तबतक मीडिया के साथ कुछ भी साझा नहीं किया जा सकता है.

अधिकारी कहते हैं कि जांच पूरी होने तक आरोपित जेल अधीक्षक के ख़िलाफ़ कोई कार्रवाई नहीं की जा सकती है.

तिहाड़ जेल के अतिरिक्त पुलिस महानिरीक्षक राज कुमार ने बीबीसी से बात करते हुए कहा कि अदालत ने 30 अप्रैल तक का वक़्त दिया है और तब तक जांच की रिपोर्ट सौंप दी जाएगी.

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जेल प्रशासन की अनाकानी

उनका कहना है कि जांच पूरी नहीं होने तक अधिकारी के ख़िलाफ़ कोई कार्रवाई नहीं की जा सकती है. ये तो अदालत ही तय करेगा कि आगे क्या किया जाना है.

दिल्ली के सीलमपुर के रहने वाले विचाराधीन क़ैदी शब्बीर के खिलाफ 'आर्म्स एक्ट' का मामला अदालत में लंबित है.

शब्बीर के पिता अय्यूब ने घटना के बारे में जानकारी देते हुए कहा कि सबसे पहले उनके बेटे ने अपनी पत्नी और भाई को बताया कि किस तरह उसे जेल में प्रताड़ित किया गया.

वो कहते हैं, "जब उसके पत्नी और भाई मिलने गए तो शब्बीर ने अपनी पीठ पर बने निशान को दिखाया और बताया कि उसे जेल में प्रताड़ित किया जा रहा है. तब हमने अपने वकील से संपर्क किया जिन्होंने अदालत में याचिका दायर की."

अय्यूब का कहना है कि उनका परिवार पहलवानों का है और उनके गुरु भी हिन्दू हैं जिनके अखाड़े में उन्होंने दंगल के गुण सीखे. इस घटना से वो आहत हुए हैं.

बीबीसी से बात करते हुए शब्बीर के वकील जगमोहन ने आरोप लगाया कि तिहाड़ जेल के प्रशासन ने जांच रिपोर्ट पेश करने में आनाकानी शुरू कर दी और अदालत की तय की गई सीमा में उन्होंने रिपोर्ट पेश नहीं की.

अप्रैल की 22 तारीख को जब अदालत में मामले की सुनवाई हो रही थी तो जिस अधिकारी को पेश होना था वो आये ही नहीं.

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जेल अधीक्षक पर गंभीर आरोप

जबकि, जो अधिकारी अदालत में उपस्थित हुए, उन्हें मामले के बारे में कोई जानकारी थी ही नहीं. हालांकि जगमोहन कहते हैं कि अदालत के निर्देश के बाद शब्बीर को दूसरी जेल में स्थानांतरित कर दिया गया है.

जगमोहन कहते हैं कि प्रताड़ना के अलावा जेल अधीक्षक पर धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने का भी आरोप है.

वो कहते हैं कि उन्हें जेल प्रशासन की रिपोर्ट का इंतज़ार है जिसके बाद वो आगे की क़ानूनी कार्यवाही करेंगे. उनका कहना है कि जब जेल के अधीक्षक पर गंभीर आरोप लगाए गए हैं, ऐसे में जेल प्रशासन द्वारा ही जांच करना अनुचित है.

उनकी ये भी मांग है कि मामले की जांच किसी निष्पक्ष एजेंसी द्वारा की जाए तो ही सच्चाई सामने आ सकती है.

इस माले में अदालत 30 अप्रैल को अपना अगला आदेश सुनाएगी. तिहाड़ जेल प्रशासन की जांच रिपोर्ट के बाद ही तय होगा कि आरोपित जेल अधीक्षक के ख़िलाफ़ क्या कार्यवाही की जाती है.

हलाकि जेल प्रशासन का आरोप है कि विचाराधीन क़ैदी दूसरी जेल में जाने के लिए इस तरह के आरोप लगाता आया है.

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