चीफ़ जस्टिस रंजन गोगोई की जांच के लिए सुप्रीम कोर्ट ने बनाई कमिटी: पांच बड़ी ख़बरें

  • 24 अप्रैल 2019
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सुप्रीम कोर्ट ने मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई के ख़िलाफ़ यौन उत्पीड़न के आरोपों की जांच के लिए एक आंतरिक समिति का गठन किया है.

इस समिति में तीन सीटिंग जज होंगे, जिनमें जस्टिस एस ए बोबड़े, एन वी रामना और इंदिरा बनर्जी शामिल हैं. जस्टिस बोबड़े रंजन गोगोई के बाद सबसे वरिष्ठ जज हैं.

ये जांच शुक्रवार से शुरू हो जाएगी और ये न्यायिक जांच नहीं बल्कि एक विभागीय जांच होगी.

इस बीच सुप्रीम कोर्ट ने वकील उत्सव बैंस को नोटिस जारी किया है.

उत्सव बैंस ने कोर्ट में हलफनामा दायर कर दावा किया था कि उन्हें सीजेआई पर आरोप लगाने वाली महिला का केस लड़ने और उनके लिए प्रेस कांफ्रेंस करने के लिए रिश्वत की पेशकश की गई थी.

उनका दावा है कि ये सब सीजेआई के ख़िलाफ साजिश के तहत किया गया है, ताकि वो इस्तीफा दे दें.

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'प्रज्ञा को दोषी क़रार देने के लिए पर्याप्त सबूत नहीं'

राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने कहा है कि उसके पास मालेगांव धमाकों की अभियुक्त साध्वी प्रज्ञा को दोषी क़रार दिए जाने के लिए पर्याप्त सबूत नहीं थे.

एनआईए ने ये बात प्रज्ञा ठाकुर को चुनाव लड़ने से रोकने के लिए दाख़िल की गई एक याचिका के जवाब में कोर्ट में कही.

पिछले हफ़्ते निसार बिलाल नाम के एक शख़्स ने स्पेशल एनआईए कोर्ट में अर्ज़ी दायर कर प्रज्ञा ठाकुर के चुनाव लड़ने पर रोक लगाने की अपील की थी.

निसार के बेटे सैयद अहमद की मौत मालेगांव धमाके में हो गई थी. उन्होंने अदालत से कहा कि चूंकि प्रज्ञा के ख़िलाफ़ मुक़दमा अभी चल रहा है इसलिए उन्हें चुनाव लड़ने से रोका जाए.

अपील के जवाब में एनआईए ने अपने चार पन्नों के जवाब में कहा कि प्रज्ञा को चुनाव लड़ने से रोकने या न रोकने का फ़ैसला निर्वाचन आयोग को लेना होगा. साथ ही एनआईए ने ये भी कहा कि प्रज्ञा को दोषी ठहराने के लिए उनके पास पर्याप्त ठोस सबूत नहीं थे.

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'हिंदू विवाह क़ानून में ट्रांसजेंडर भी दुल्हन'

मद्रास हाईकोर्ट ने अपने एक अहम फ़ैसले में कहा है कि हिंदू विवाह क़ानून के प्रावधानों के तहत ट्रांसजेंडर व्यक्ति को भी दुल्हन माना जाना चाहिए.

'दुल्हन' शब्द का इस्तेमाल सिर्फ़ महिलाओं के लिए इस्तेमाल नहीं किया जा सकता.

जस्टिस जीआर स्वामीनाथन ने एक शख़्स और ट्रांसजेंडर महिला की याचिका पर सुनवाई करते हुए ये फ़ैसला दिया. दोनों ने पिछले साल अक्टूबर में शादी की थी लेकिन अधिकारियों ने उनकी शादी रजिस्टर करने से इनकार कर दिया था जिसके बाद दंपती ने अदालत का रुख किया.

अदालत ने अपने फ़ैसले में जोड़े की शादी का पंजीकरण करने का आदेश दिया.

जस्टिस स्वामीनाथन ने कहा, "सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि किन्नरों को खुद अपना जेंडर तय करने का अधिकार है. सरकार की ज़िम्मेदारी बनती है कि वो लगातार जागरूकता अभियान चलाए और लोगों को समझाए कि अगर उनके घर ट्रांसजेंडर बच्चा पैदा होता है तो वो न शर्मिदा हों और न ही परेशान."

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तो हट सकता है टिकटॉक से बैन

सुप्रीम कोर्ट ने मद्रास हाई कोर्ट से आज यानी 24 अप्रैल को टिकटॉक पर सुनवाई करने को कहा था. सुप्रीम कोर्ट ने ये भी कहा कि अगर मद्रास हाई कोर्ट आज सुनवाई करने में विफल रहता है तो इस ऐप पर प्रतिबंध खत्म हो जाएगा.

शीर्ष अदालत के ये निर्देश टिकटॉक के लिए वरिष्ठ वकील अभिषेक मनु सिंघवी की ओर से यह स्वीकार किए जाने के बाद आए हैं कि चीन के इस वीडियो स्ट्रीमिंग ऐप पर अंतरिम प्रतिबंध उच्च न्यायालय द्वारा बगैर सुनवाई के ही लगा दिया गया था.

सिंघवी ने कहा कि रोज़ाना लगभग 10 लाख उपयोगकर्ता वाला यह ऐप प्रतिदिन 4.5 करोड़ रुपये के राजस्व नुकसान से जूझ रहा है.

पिछले सप्ताह सर्वोच्च न्यायालय ने मद्रास उच्च न्यायालय में चल रही प्रक्रिया में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया था.

16 अप्रैल की सुनवाई के दौरान उच्च न्यायालय ने टिकटॉक की पैतृक कंपनी बाइटडांस से लिखित में अनुरोध मांगा है और इसकी अगली सुनवाई 24 अप्रैल को होनी है.

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श्रीलंका: 'ख़ुफ़िया अलर्ट की जानकारी नहीं थी'

श्रीलंका के राष्ट्रपति मैत्रीपाला सिरीसेना ने देश की पुलिस और सुरक्षाबलों में अहम बदलाव करने का वादा किया है.

रविवार को ईस्टर के मौके पर हुए बड़े हमले के बाद उन्होंने ये क़दम उठाया है. अगले चौबीस घंटों में शीर्ष अधिकारियों में बदलाव किए जा सकते हैं.

रिपोर्टों में ये भी कहा गया है कि श्रीलंका गृहयुद्ध के दिनों की तरह हर ज़िले में सुरक्षा समितियां बना सकती हैं.

राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री रनिल विक्रमासिंघे ने हमलों के बारे में पहले से कोई भी ख़ुफ़िया अलर्ट की जानकारी होनों से इनकार किया है.

इसी बीच कथित इस्लामिक स्टेट ने इन हमलों को अंजाम देने का दावा किया है लेकिन पुष्टि अभी नहीं की जा सकती. श्रीलंका सरकार इन दावों की जांच कर रही है.

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