सुप्रीम कोर्ट ने बनाई यौन उत्पीड़न कमेटी: चार सवाल

  • 24 अप्रैल 2019
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सुप्रीम कोर्ट के जजों ने मिलकर ये फ़ैसला लिया है कि मुख्य न्यायाधीश के ख़िलाफ़ यौन उत्पीड़न के आरोप की जांच एक तीन सदस्यीय कमेटी करेगी.

मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई पर उनके दफ़्तर में जूनियर असिस्टेंट के तौर पर काम कर चुकी महिला ने यौन उत्पीड़न का आरोप लगाया है और कोर्ट के 22 जजों से उसकी जांच प्रक्रिया तय करने की मांग की है.

उनकी मांग पर जांच के लिए सुप्रीम कोर्ट की अपनी 'इंटर्नल कम्प्लेंट्स कमेटी' से अलग जस्टिस बोबड़े, जस्टिस रामना और जस्टिस इंदिरा बैनर्जी की एक विशेष कमेटी तो बना दी है पर ये क़ानून में तय कई नियमों का पालन नहीं करती जिससे चार सवाल खड़े होते हैं.

कमेटी के गठन से जुड़े इन सवालों के अलावा पीड़ित महिला ने सुप्रीम कोर्ट को चिट्ठी लिखकर कहा है कि कमेटी के सदस्य जज रमन्ना मुख़्य न्यायाधीश के क़रीबी हैं जिस वजह से उन्हें ये शंका है कि उनकी शिकायत की निष्पक्ष सुनवाई नहीं होगी.

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पहला सवाल - कमेटी के सदस्य

तीन जजों की इस कमेटी में वरिष्ठता की हैसियत से मुख्य न्यायाधीश के ठीक बाद आने वाले जस्टिस बोबड़े और जस्टिस रामना हैं. साथ ही एक महिला जज, जस्टिस इंदिरा बैनर्जी हैं.

ये सभी जज मुख्य न्यायाधीश से जूनियर हैं.

जब यौन उत्पीड़न की शिकायत किसी संस्थान के मालिक के ख़िलाफ़ हो तो 'सेक्सुअल हैरेसमेंट ऑफ़ वुमेन ऐट वर्कप्लेस (प्रिवेन्शन, प्रोहिबिशन एंड रिड्रेसल) ऐक्ट 2013' के मुताबिक़ उसकी सुनवाई संस्थान के अंदर बनी 'इंटर्नल कम्प्लेंट्स कमेटी' की जगह ज़िला स्तर पर बनाई जाने वाली 'लोकल कम्प्लेंट्स कमेटी' को दी जाती है.

मुख्य न्यायाधीश सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठतम पद पर हैं, इसीलिए पीड़ित महिला ने ही जांच कमेटी में रिटायर्ड जजों की मांग की थी.

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दूसरा सवाल - कमेटी के अध्यक्ष

क़ानून के मुताबिक़ यौन उत्पीड़न की शिकायत की जांच के लिए बनी 'इंटर्नल कम्प्लेंट्स कमेटी' की अध्यक्षता वरिष्ठ पद पर काम कर रहीं एक महिला को करनी चाहिए.

सुप्रीम कोर्ट की बनाई विशेष कमेटी के अध्यक्ष जस्टिस बोबड़े हैं और उन्हें ये काम मुख्य न्यायाधीश ने ही सौंपा है.

तीसरा सवाल - कमेटी में महिला प्रतिनिधित्व

क़ानून के मुताबिक़ जांच के लिए बनाई गई 'इंटर्नल कम्प्लेंट्स कमेटी' की कुल सदस्यों में कम से कम आधी औरतें होनी चाहिए.

मौजूदा कमेटी में तीन सदस्य हैं जिनमें से सिर्फ़ एक महिला हैं (यानी एक-तिहाई प्रतिनिधित्व). जस्टिस इंदिरा बैनर्जी बाक़ी दोनों सदस्यों से जूनियर हैं.

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चौथा सवाल - कमेटी में स्वतंत्र प्रतिनिधि

क़ानून के मुताबिक जांच के लिए बनी कमेटी में एक सदस्य औरतों के लिए काम कर रही ग़ैर-सरकारी संस्था से होनी चाहिए. ये प्रावधान कमेटी में एक स्वतंत्र प्रतिनिधि को लाने के लिए रखा गया है.

मुख्य न्यायाधीश के ख़िलाफ़ आरोप की जांच के लिए बनाई गई कमेटी में कोई स्वतंत्र प्रतिनिधि नहीं है.

सुप्रीम कोर्ट की बनाई तीन सदस्यीय कमेटी शुक्रवार से यौन उत्पीड़न की शिकायत की सुनवाई शुरू करेगी.

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रिश्वत देने की पेशकश

इस बीच एक वकील उत्सव बैंस ने सुप्रीम कोर्ट में हलफ़नामा दायर कर दावा किया है कि उन्हें मुख्य न्यायाधीश पर आरोप लगाने वाली महिला का केस लड़ने और उनके लिए प्रेस कॉन्फ्रेंस करने के लिए रिश्वत की पेशकश की गई थी.

उनका दावा है कि ये सब मुख्य न्यायाधीश के ख़िलाफ़ साज़िश के तहत किया गया है, ताकि वो इस्तीफ़ा दे दें.

उत्सव बैंस के दावे की जांच बुधवार को अरुण मिश्रा, रोहिंटन नरीमन और दीपक गुप्ता की एक अलग बेंच ने शुरू की.

उत्सव बैंस के वकील ने सुप्रीम कोर्ट को सीलबंद लिफ़ाफों में कुछ सामग्री सौंपी जिसके बाद सीबीआई निदेशक, दिल्ली पुलिस कमिश्नर और आईबी प्रमुख को कोर्ट आने का समन दिया गया.

इस मामले पर गुरुवार को आगे सुनवाई होगी. कोर्ट ने ये विश्वास दिलाया है कि इस सुनवाई का यौन उत्पीड़न के आरोप की जांच कर रही कमेटी पर कोई दुष्प्रभाव नहीं पड़ेगा.

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