मोदी के बाद ग़रीब नेता इंटरव्यू के लिए उदय चोपड़ा से संपर्क करें - व्यंग्य

  • 25 अप्रैल 2019
बीबीसी कार्टून, मोदी इंटरव्यू, अक्षय कुमार, नरेंद्र मोदी

पत्रकार अपने रोज़गार पर मंडरा रहे ख़तरों को नहीं समझ पा रहे हैं. जो चैनल अक्षय कुमार को अफोर्ड नहीं कर पाएगा, वह ग़रीबों के अक्षय कुमार यानी निरहुआ को ले आएगा.

कांग्रेस वाले राहुल गांधी का इंटरव्यू करने के लिए एकता कपूर के भाई तुषार कपूर से करा सकते हैं. तुषार कपूर, अभिषेक बच्चन या उदय चोपड़ा को बुलाने से देश की बेरोज़गारी की समस्या भी अपने-आप हाइलाइट हो जाएगी.

हालांकि अभिषेक बच्चन के पापा अमिताभ बच्चन की हालत देखकर एक हद तक यह भी समझा जा सकता है कि नौजवानों को रोज़गार क्यों ना मिल रहा है, बच्चन साहब सुबह क्रीम पाउडर से लेकर देर रात तक हेयर ऑयल समेत इतना कुछ बेचे दे रहे हैं कि बाकी क्या बेचें?

ज्योति कलश में अपार संभावनाएं

पीएम मोदी ने साक्षात्कार में कहा है कि 'ज्योति कलश छलके' जैसे गाने सुनते हैं, उनकी पार्टी की समर्थक सपना चौधरी-'तेरी आख्या का यो काजल' सुना रही हैं. मुझे डर है कि सपना चौधरी ज्योति कलश छलकाते हुए अपना सिग्नेचर नृत्य ना कर डालें, ज्योति कलश पर सपना चौधरी के डांस की कल्पना करके देखें, सारी नकारात्मकता अपने-आप दूर हो जाएगी.

खैर ज्योति कलश में अपार संभावनाएं हैं, राहुल गांधी फौरन कह सकते हैं कि चौकीदार सिर्फ चोर ही नहीं, गैर ज़िम्मेदार भी है. चौकीदार ज्योति कलश वाला गाना सुनता है. ज्योति कलश जिस फिल्म 'भाभी की चूड़ियां' का गीत है, वह 1961 में आई थी, तब कांग्रेस का शासन था. यह गीत हमीं लाए हैं, मोदी फोकट में क्रेडिट न लें.

बताया गया एकदम अ-राजनीतिक बातचीत, मानो कोई राजनेता होने से शर्मिंदा हो. आप देखें, डॉक्टर कभी ना कहता कि मैं जो बयान दे रहा हूं, उसे एक डॉक्टर का बयान ना माना जाए. एक अध्यापक कभी न कहता कि जो बात मैं कह रहा हूं, उसे अध्यापक का बयान न माना जाए. पर नेता बोलता है तो कई बार कह उठता है कि बतौर नेता नहीं कह रहा मैं.

डॉक्टर डॉक्टर होकर ना शर्मा रहा, इंजीनियर इंजीनियर होकर ना शर्मा रहा, पर नेता नेता होने में शर्माता सा दिखता है, तो कहता है कि अ-राजनीतिक बात है जी.

अ-राजनीतिक के मायने

अ-राजनीतिक बात ही सुननी है, तो हम बिरजू महाराज की बात सुन लेंगे हालांकि इन दिनों तो बिरजू महाराज के नृत्य की थाप के राजनीतिक मायने निकाले जा सकते हैं, कोई टीवी एंकर चीख कर कह सकता है -बिरजू महाराज ने बायां पैर उठाकर बताया है कि वामपंथी क्रांति होने वाली है. दूसरा एंकर बिरजू महाराज का दायां उठा हुआ पैर दिखाकर बता रहा है कि दायें यानी दक्षिणपंथ के बिना काम नहीं चलने वाला.

पीएम मोदी का साक्षात्कार धुआंधार बंट रहा है इन दिनों, अमिताभ बच्चन अगर मिलने भी चले गए मोदीजी से तो भी पीएम मोदी पूछ सकते हैं- पहले तेल-साबुन बेचोगे या पहले मेरा साक्षात्कार लोगे.

अक्षय कुमार पत्रकार हो रहे हैं, राजनेता नरेंद्र मोदी अ-राजनीतिक हो रहे हैं, सपना चौधरी राजनेता होने की राह पर हैं, जिसे जो होना चाहिए था, वह वही बनकर राजी नहीं है. वैसे यह तो पहले से ही चल रहा है कि संन्यासी-ब्रह्मचारी बता रहे हैं कि कितने बच्चे पैदा करना चाहिए.

गंभीर समस्या है कि क्रिकेटर गौतम रन बनाने के बदले चुनावी रण में हैं, कांग्रेसी पीछे नहीं हैं ढाई किलो के फ़िल्मी घूंसे की जगह, असली घूंसेबाज़ विजेंदर को ले आए हैं. हंसराज हँस रहे हैं, उदित राज कुपित राज हो गए हैं.

अपने-अपने संसाधनों के हिसाब से नेताओं को चंकी पांडे, सुदेश बेरी या हेमंत बिरजे जैसे अभिनेताओं से संपर्क करना चाहिए, इस स्कीम से नेता-अभिनेता दोनों का भला हो सकता है.

इसी तरह कुछ टीवी एंकरों को भी फ़िल्मों में भूमिका तलाश करनी चाहिए, बॉलीवुड में काफ़ी हाहाकारी फ़िल्में बनती हैं जिनमें मुख्य हाहाकारी की भूमिका में कई एंकर फ़िट हो सकते हैं.

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