छत्तीसगढ़ : आयुष्मान योजना पर पीएम का दावा कितना सही?

  • 2 मई 2019
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भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने भाषणों में जिस आयुष्मान योजना को छत्तीसगढ़ में कथित रुप से बंद किये जाने को लेकर कांग्रेस पार्टी की आलोचना की थी और उसे चुनावी मुद्दा बनाया था, अब भारत सरकार के ही राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण ने अपनी रिपोर्ट में तीन अलग-अलग आधार पर छत्तीसगढ़ को इस योजना के लिये नंबर 1 की रैंकिंग दी है.

इस रैंकिंग के बाद जहां कांग्रेस पार्टी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की आलोचना की है, वहीं भारतीय जनता पार्टी ने कहा है कि कांग्रेस पार्टी जनता के मुद्दे पर राजनीति न करे.

राज्य के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल का कहना है कि इस योजना को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शुरु से ही ग़लत बयानी करते रहे हैं.

उन्होंने कहा, " पिछले साल सितंबर में जब यह योजना लागू हुई थी, तब से 17 दिसंबर 2018 तक भाजपा सरकार के कार्यकाल में लगभग 89 हजार मरीजों को इस योजना का लाभ दिया गया था. कांग्रेस पार्टी की सरकार के तीन महीनों में ही लगभग ढाई लाख मरीजों को इस योजना का लाभ मिला. अब आप फ़ैसला करें कि झूठ और भ्रम कौन फैला रहा है."

दूसरी ओर कांग्रेस पार्टी के प्रवक्ता शैलेष नितिन त्रिवेदी ने कहा कि छत्तीसगढ़ में भाजपा के लिए वोट मांगने के लिए 'मोदी जी ने भ्रम फैलाया' और हाल ही में निर्वाचित हुयी छत्तीसगढ़ की कांग्रेस सरकार के खिलाफ 'झूठ बोलने से भी परहेज नहीं किया'.

त्रिवेदी ने कहा,"अपने झूठ के लिये मोदी जी को छत्तीसगढ़ की जनता से माफी मांगनी चाहिये."

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आयुष्मान बनाम यूनिवर्सल हेल्थ केयर

असल में साल 2008 में देश भर में राष्ट्रीय स्वास्थ्य बीमा योजना लागू की गई थी जिसमें गरीब परिवार के लोगों को चिकित्सा सुविधा का लाभ देने का प्रावधान था.

इसके बाद साल 2012 में छत्तीसगढ़ सरकार ने मुख्यमंत्री स्वास्थ्य बीमा योजना शुरु की. इस योजना में उन लोगों को शामिल किया गया, जो राष्ट्रीय स्वास्थ्य बीमा योजना के दायरे से बाहर थे.

पिछले साल 14 अप्रैल को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बीजापुर से प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना 'आयुष्मान भारत' की शुरुआत करते हुये दावा किया था कि इस योजना से इलाज और स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़ी मुश्किलें आसान हो जायेंगी.

इस योजना को बीते साल 15 सितंबर को पूरे राज्य में लागू कर दिया गया था.

लेकिन राज्य में कांग्रेस पार्टी की सरकार बनी तो उसने आयुष्मान भारत योजना की जगह यूनिवर्सल हेल्थ स्कीम लागू करने की योजना पर काम शुरु कर दिया.

राज्य के स्वास्थ मंत्री टीएस सिंहदेव ने अपने सहयोगियों के साथ थाइलैंड का दौरा किया, जहां ये योजना सफलतापूर्वक चल रही है. इसके बाद सिंहदेव ने आयुष्मान भारत योजना को 'दूषित योजना' ठहराते हुये दावा किया कि सितंबर 2019 तक राज्य में यूनिवर्सल हेल्थ स्कीम लागू कर दी जायेगी.

लेकिन राज्य सरकार की इस घोषणा के बाद से ही उसकी आलोचना शुरु हो गई.

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राज्य सरकार से पीएम के सवाल

छत्तीसगढ़ में कांग्रेस की सरकार बनने के बाद इस साल आठ फरवरी को पहली बार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जब रायगढ़ पहुंचे थे तो छत्तीसगढ़ में कथित रूप से आयुष्मान भारत योजना बंद किये जाने को लेकर उन्होंने राज्य की भूपेश बघेल की सरकार को आड़े हाथों लिया.

लोगों को स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध कराने के लिये शुरु की गई आयुष्मान भारत योजना को लेकर प्रधानमंत्री ने आरोप लगाया था कि ऐसी कोई भी योजना जिसमें 'दलाल ना हो, बिचौलिए ना हों, वो कांग्रेस को रास नहीं आती है'.

उन्होंने कहा, "यहां की सरकार ने पहला काम किया, आयुष्मान भारत- पीएमजेएवाई, यानी मोदी कैसे..... छत्तीसगढ़ से हटाने का निर्णय किया...अगर आपके राज्य में गरीब स्वस्थ हो जाए, आयुष्मान योजना का लाभ मिल जाए, गरीब को हर वर्ष 5 लाख रुपये तक का मुफ्त इलाज मिल जाए, आपको तो कुछ देना नहीं है, आप क्यों इस लाभ से उस गरीब को, उस आदिवासी को वंचित करना चाहते हैं?"

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राज्य की कांग्रेस सरकार पर हमला जारी रखा.

अपनी चुनावी सभाओं में भी उन्होंने इस योजना को लेकर कांग्रेस पार्टी की कड़ी आलोचना की.

बालोद में 6 अप्रैल को नरेंद्र मोदी ने कहा," दिसंबर के पहले तक, छत्तीसगढ़ ऐसा राज्य था जहां इस योजना से सबसे अधिक सवा तीन लाख गरीब आदिवासी, दलित, वंचित, पिछले वर्ग के मरीजों ने इलाज पाया. चुनाव के दौरान सैकड़ों लोग अलग-अलग अस्पताल में भर्ती भी थे लेकिन तभी कांग्रेस की सरकार आई और इस योजना से अपने हाथ खींच लिए. इसका कारण जानते हैं आप, कारण ये है कि आयुष्मान भारत योजना मोदी ने शुरू की थी."

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा की सभाओं में आयुष्मान योजना एक बड़ा चुनावी मुद्दा बना रहा.

लेकिन अब राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण ने अपनी रिपोर्ट में छत्तीसगढ़ को सर्वाधिक मरीज़ों को लाभ देने के लिये नंबर वन की रैंकिंग दी है.

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छत्तीसगढ़ नंबर 1

छत्तीसगढ़ में स्वास्थ्य सेवाओं की संचालक शिखा राजपूत तिवारी का दावा है कि राज्य में स्वास्थ्य सेवाओं को और बेहतर करने की कोशिश की जा रही है. उनका कहना है कि योजनाओं से कहीं अधिक उनके विभाग की पहली प्राथमिकता आम जनता को अधिक से अधिक स्वास्थ्य सुविधायें मुहैया कराना है.

शिखा राजपूत तिवारी का कहना है कि इस साल 22 अप्रैल तक के जो आंकड़े उपलब्ध हैं, उसके अनुसार छत्तीसगढ़ में आयुष्मान भारत योजना के तहत कुल 3,78,240 दावे सामने आये हैं, इनमें केवल 37,666 मामले ही लंबित है. अगर रक़म की बात करें तो इनमें 276 करोड़ 51 लाख रुपये से अधिक की धनराशि का क्लेम किया गया है.

वे कहती हैं, "आयुष्मान भारत योजना पूरे राज्य में बेहतर तरीक़े से संचालित है. इस योजना का विरोध कर रहे अस्पतालों ने भी अब इस योजना में अपने को शामिल किया है, यही कारण है कि इस योजना से लाभान्वित होने वाले मरीजों की संख्या बढ़ी है."

राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण की रिपोर्ट के अनुसार भर्ती से पहले बीमारी और चिकित्कीय प्रक्रिया यानी प्री-ऑथराइजेशन के लिये केंद्र सरकार ने प्रति एक लाख की आबादी में 38 लोगों तक इसकी पहुंच का लक्ष्य रखा था. लेकिन पिछले तीन सप्ताह के आंकड़ों को देखें तो छत्तीसगढ़ में यह 95 है.

उत्तराखंड में प्रति एक लाख की आबादी में यह आंकड़ा 26, जम्मू कश्मीर में 29, हिमाचल प्रदेश में 33, झारखंड में 25, हरियाणा में 12, उत्तर प्रदेश में 9, मध्यप्रदेश में 6 और बिहार में यह केवल 2 है.

हालांकि इस योजना के तहत बीमा कंपनियों द्वारा अस्पतालों के भुगतान के मामले में छत्तीसगढ़ दूसरे नंबर पर है. पहले नंबर पर हरियाणा है, जहां अस्पतालों का केवल 3 फीसदी भुगतान लंबित है. छत्तीसगढ़ में 13 फीसदी, जम्मू कश्मीर में 16, झारखंड में 20, उत्तराखंड में 21, उत्तरप्रदेश में 32, हिमाचल प्रदेश में 39, मध्यप्रदेश में 61 और बिहार में 71 फीसदी भुगतान लंबित है.

परिवारों के पास कम से कम 1 ई-कार्ड की उपलब्धता के मामले में सबसे ऊपर उत्तराखंड है, जहां 65 प्रतिशत परिवारों के पास कम से कम 1 ई-कार्ड उपलब्ध है. दूसरे नंबर पर 54 प्रतिशत आंकड़े के साथ जम्मू-कश्मीर है. हिमाचल में यह 47 प्रतिशत, मध्यप्रदेश में 37, झारखंड में 25, हरियाणा में 23, छत्तीसगढ़ में 11, उत्तरप्रदेश में 10 और बिहार में केवल 6 प्रतिशत है.

तीनों मानकों के आधार पर छत्तीसगढ़ को पहली रैंक मिली है, जबकि उत्तराखंड 2 और जम्मू-कश्मीर नंबर 3 पर है. हिमाचल प्रदेश की रैंकिंग 4, झारखंड की 5, हरियाणा की 6, उत्तरप्रदेश की 7, मध्यप्रदेश की 8 और बिहार की रैंकिंग 9 है.

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बना हुआ है विवाद

हालांकि धरातल पर राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण के इन आंकड़ों की हक़ीकत को लेकर बहस हो सकती है. बीमारी के अलग-अलग दावे और उनके भुगतान को लेकर बीमा कंपनियों के नियम-क़ायदे भी उलझाने वाले साबित हो सकते हैं.

यही कारण है कि आयुष्मान भारत योजना को लेकर छत्तीसगढ़ में विवाद अब भी जारी है.

कांग्रेस पार्टी की चिकित्सा प्रकोष्ठ से जुड़े छत्तीसगढ़ हॉस्पिटल बोर्ड के अध्यक्ष डॉ. राकेश गुप्ता का मानना है कि आयुष्मान भारत योजना में भले छत्तीसगढ़ नंबर 1 हो लेकिन देश में यह योजना असफल साबित हुई है.

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डॉ. राकेश गुप्ता कहते हैं,"देश के 10 करोड़ लोगों को इस योजना का लाभ मिलना था लेकिन आज की तारीख़ तक केवल 2 करोड़ 89 लाख लोगों को ही इस योजना का कार्ड बंट सका है. यानी केवल 20 फीसदी लोगों को ही इस योजना का लाभ मिल पाया है. योजना की असफलता का इससे बड़ा सबूत और क्या होगा?"

लेकिन भारतीय जनता पार्टी इस बात से खुश है कि छत्तीसगढ़ सरकार ने इस योजना को बेहतर तरीके से क्रियान्वित किया है.

छत्तीसगढ़ में भारतीय जनता पार्टी के प्रवक्ता संजय श्रीवास्तव कहते हैं, "छत्तीसगढ़ की कांग्रेस पार्टी की सरकार को यह मान लेना चाहिये कि मोदी जी द्वारा शुरु की गई आयुष्मान भारत योजना दुनिया की सबसे बेहतर स्वास्थ्य योजना है. कांग्रेस सरकार को इस योजना को राजनीतिक चश्मे से देखना बंद करना चाहिये."

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