महाराष्ट्र: गढ़चिरौली में माओवादी हमला, 15 जवानों और एक ड्राइवर की मौत

  • 1 मई 2019
गढ़चिरौली में नक्सली हमला इमेज कॉपीरइट ANI
Image caption इस हमले में पुलिस के वाहन के परखच्चे उड़ गए

महाराष्ट्र के गढ़चिरौली में एक माओवादी हमले में सुरक्षा बलों के 15 जवानों और एक ड्राइवर की मौत हो गई है.

माओवादियों ने सुरक्षा बलों के एक वाहन को बारूदी सुरंग के ज़रिये निशाना बनाया.

ये जवान महाराष्ट्र पुलिस के सी60 कमांडोज़ थे.

घटना ज़िले की कुरखेड़ा तालुका के पास हुई है.

पुलिस की गाड़ी को उस वक्त निशाना बनाया जब कमांडोज़ उस जगह जा रहे थे, जहां सुबह ही माओवादियों ने करीब 25 से 30 गाड़ियों को आग के हवाले किया था.

गढ़चिरौली महाराष्ट्र के सबसे ज़्यादा माओवाद प्रभावित ज़िले में गिना जाता है.

महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने इसकी पुष्टि करते हुए ट्वीट किया है.

उन्होंने समाचार एजेंसी एएनआई से बात करते हुए कहा, "उस वाहन में सी-60 सुरक्षा बल के हमारे 16 पुलिसकर्मी और ड्राइवर थे. बारूदी सुरंग के धमाके में वो शहीद हो गए. गृह मंत्री ने केंद्र सरकार की ओर से हरसंभव सहायता का आश्वासन दिया है."

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस हमले की निंदा की है. उन्होंने ट्विटर पर लिखा, "महाराष्ट्र के गढ़चिरौली में जवानों पर हुए घिनौने हमले की कड़ी निंदा करता हूं. मैं सभी बहादुर जवानों को सलाम करता हूं. उनका बलिदान भुलाया नहीं जाएगा. मेरी संवेदनाएं पीड़ित परिवारों के साथ हैं. इस हमले के दोषियों को बख़्शा नहीं जाएगा."

गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने भी ट्वीट किया है कि गृह मंत्रालय प्रदेश सरकार के संपर्क में है और उन्हें हर संभव सहायता मुहैया करा रही है.

क्या है सी-60 कमांडो टुकड़ी

माओवादियों की गुरिल्ला रणनीति का मुकाबला करने के लिए महाराष्ट्र पुलिस ने एक विशेष दल की स्थापना की थी, जिसमें स्थानीय जनजाति के लोगों को शामिल किया गया था.

1992 में बने इस विशेष दल में 60 स्थानीय जनजाति समूह के लोगों को शामिल किया गया. धीरे-धीरे दल की ताकत बढ़ती गई और नक्सलियों के ख़िलाफ़ इनके ऑपरेशन भी बढ़ने लगे.

दल में शामिल जनजाति समूह के लोगों को स्थानीय जानकारी, भाषा और संस्कृति की जानकारी के चलते ये गुरिल्ला लड़ाकों से लोहा लेने में सफल रहे.

2014, 2015 और 2016 में में सी-60 के कमाडोज़ को कई ऑपरेशन में सफलता प्राप्त हुई.

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