जयंत सिन्हा ने झारखंड में लिंचिंग के अभियुक्तों को मदद पर क्या सफाई दी

  • 2 मई 2019
जयंत सिन्हा
Image caption जयंत सिन्हा

जून 2017 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एक तरफ गाय बचाने के नाम पर हो रही लिंचिंग की कड़ी निंदा करते हुए इसे स्वीकार नहीं करने की बात कर रहे थे, तो दूसरी तरफ झारखंड के रामगढ़ में एक एक मॉब लिंचिंग की घटना हुई थी.

उस दिन अलीमुद्दीन अंसारी नामक एक व्यक्ति को कथित तौर पर गौरक्षकों ने गाड़ी से खींचकर पीट-पीटकर मार डाला था.

इस घटना के बाद मामले की सुनवाई के लिए गठित फास्ट ट्रैक कोर्ट ने 11 अभियुक्तों को दोषी मानकर उन्हें उम्रक़ैद की सज़ा सुनाई थी जिनमें स्थानीय बीजेपी नेता नित्यानंद महतो भी शामिल थे.

लेकिन जब ये मामला रांची हाईकोर्ट पहुंचा तो हाईकोर्ट ने इन लोगों की सज़ा पर स्टे लगाकर उन्हें ज़मानत पर रिहा कर दिया.

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Image caption अभियुक्तों को माला पहनाने के बाद उनके साथ तस्वीरें खिंचवाते जयंत सिन्हा

जेल से छूटने के बाद हज़ारीबाग से बीजेपी के सांसद और केंद्रीय मंत्री जयंत सिन्हा ने अभियुक्तों का माला पहना कर अभिनंदन किया था.

पढ़िए, इस पूरे मसले पर जयंत सिन्हा से बीबीसी की बातचीत

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बीजेपी ने लिंचिंग के आरोपियों की मदद की?

2012 से लेकर अब तक गाय से जुड़ी लिंचिंग की घटनाएं थीं उसमें 2012 से 2014 तक बहुत कम घटनाएं देखने को मिलीं, लेकिन बीजेपी के केंद्र की सत्ता में आने के बाद 2014 से 2018 तक ऐसे मामलों में वृद्धि हुई. झारखंड में ही लगभग 12 घटनाएं हुई हैं. इन घटनाओं का बढ़ना और बीजेपी सत्ता में होना, ये ग्राफ़ क्यों बढ़ रहा है.

आपने फर्ज़ी रिश्ता बनाया है. पूरे देश में गो हत्या बहुत ज़्यादा तेज़ी से चल रही थी. उस पर कोई अंकुश नहीं था. जब हमारी सरकार आई तो हमलोगों ने क़ानून कार्रवाई इन सब अवैध कामों पर किया तो हमने पारदर्शी तरीके से इन्हें उजागर किया. मैंने गो हत्या की बात की, लिंचिंग की बात नहीं की. लिंचिंग का अध्ययन मैंने नहीं किया.

जहां तक लिंचिंग की बात है तो उसे हम बिल्कुल स्वीकार नहीं करते. गैरक़ानूनी काम है. किसी को ये अधिकार नहीं है कोई क़ानून अपने हाथ में ले. ये बिल्कुल ग़लत है. अगर कोई क़ानून हाथ में लेता है तो हमारी सरकार इस पर पूरी शक्ति से क़ानूनी कार्रवाई करेगी. मैं इसके बिल्कुल विरोध में हूं. क़ानून हमारे लोकतंत्र में सर्वोपरि है.

Image caption मरियम खातून

मरियम खातून के पति अलीमुद्दीन अंसारी को झारखंड के रामगढ़ में कथित गौरक्षकों ने गाड़ी से खींचकर पीट-पीटकर मार डाला था. हाल ही में उनका बयान था कि "मुझे लगता है कि मेरे पति की ऐसी मौत से बुरा कुछ नहीं हो सकता. लेकिन फिर आप हत्यारों का अभिनंदन करते हैं जैसे उन्होंने कोई बहादुरी की हो और एक उपलब्धि हासिल की है और उन्हें माला पहनाई जाती है? मैं सोच भी नहीं सकता कि एक मंत्री इस तरह का भयानक काम करेगा." आप पीड़ितों के साथ कभी नहीं दिखे, आपकी कोई तस्वीर उनके साथ नहीं दिखी, आप उनके समर्थन में नहीं दिखे?

जो हुआ बेहद दुखद था. मुझे बहुत सहानुभूति है मरियम खातून और अलीमुद्दीन अंसारी से. लेकिन जो लोग मेरे घर में आए, वो निजी आयोजन था. उसमें आए लोग निर्दोष थे. ये आपने कल्पना कर लिया, जो ग़लत है. मीडिया में बहुत सारे मेरे मित्र हैं जो किसी विचारधारा से जुड़े हैं तो उनका यह मानना होता है कि वो दोषी हैं. कोई भी इस केस का अध्ययन करे, सोचे, विचार करे, हाईकोर्ट का बेल ऑर्डर पढ़े तो स्पष्ट नज़र आएगा कि जो लोग मेरे घर आए वो निर्दोष थे.

जब मैं संपूर्ण न्याय की बात करता हूं तो कहता हूं कि पीड़ित को न्याय तो मिलना ही चाहिए लेकिन जिन्हें एक साल तक ग़लत सज़ा देकर जेल में डाला गया उनके साथ भी न्याय हो. वो इतने ग़रीब थे कि उनके पास पैसे भी नहीं थे कि अपना केस अदालत में सही तरीके से पेश कर सकें. पार्टी के लोग और कुछ लोग जो उनसे जुड़े हुए थे जब उन्होंने सहयोग किया. फिर जब जमानत की सुनवाई अदालत में आई तो अदालत ने जमानत देते हुए कहा कि इनके ख़िलाफ़ कोई प्रमाण नहीं है.

जब वो बाहर आए. हमारे घर आए. तो वो एक निजी कार्यक्रम था जिसमें उनके माता-पिता ने हमसे कहा कि आपने इन्हें नया जीवन दिया है. उन्होंने हमसे उनका अभिनंदन करने के लिए कहा तो मैंने वैसा किया. यह कार्यक्रम पूरी तरह से निजी और 10 मिनट से भी कम का था. लेकिन किसी ने उसको फ़ेसबुक पर डाल दिया जिसे मीडिया ने उठा लिया.

लेकिन वो अभी तक दोषमुक्त करार नहीं दिये गए हैं. क्या उन्हें सम्मानित करने के लिए उनके दोषमुक्त करार दिये जाने तक का इंतज़ार करना क़ानून सम्मत नहीं होता?

हमारे सिस्टम में कई अभियुक्त हैं. विपक्ष की बात करें तो उनके बड़े से बड़े नेता अभियुक्त हैं क्या उन्हें माला नहीं पहनाई जा रही है. पार्टी की तरफ से सहयोग किया गया था, मैंने भी सहयोग किया था. वो मेरे घर आए थे, मैं उनके घर नहीं गया था.

आपने कहा न कि मरियम जी के घर क्यों नहीं गए? अगर मरियम जी यहां आतीं या कोई भी मुझसे सहयोग मांगता तो मैं बिल्कुल सहयोग देता.

अगर भविष्य में ऐसी कोई परिस्थिति आई तो कोई ऐसा ही अभियुक्त आपके घर आता है तो क्या आप उसको माला पहनाएंगे?

मैं अब किसी को माला नहीं पहनाता हूं क्योंकि इस तरह की परिस्थितियों में लोग अपनी विचारधारा के प्रचार के लिए उसका ग़लत फ़ायदा उठाते हैं. लेकिन जो मैंने काम किया हो वो बिल्कुल न्याय के लिए किया है और सही किया है. मार्टिन लूथर ने कहा है कि जहां भी अन्याय है उससे न्याय की पूरी प्रक्रिया भ्रष्ट हो जाती है.

आपने उन लोगों को किस तरह की मदद की? और क्या मरियम खातून के परिवार की भी आपने मदद की?

सहयोग का रूप था कि उनके परिवार के लोगों ने कहा कि आप एक अच्छे अधिवक्ता हैं, आपसे यदि आर्थिक सहयोग हो सकता है तो करें. बहुत सारे लोगों ने उनको आर्थिक सहयोग दिया तो हमने भी दिया. पार्टी के हमारे एक सदस्य थे जिनको सहयोग की ज़रूरत थी और वो ग़रीब थे, तो पार्टी के कई लोगों ने उनकी मदद की और वो आर्थिक मदद सीधे उनके वकील त्रिपाठी जी के फ़ीस के रूप में गई.

मरियम खातून ने मीडिया के जरिए सरकार और मेरी बहुत आलोचना की. मैं वो बात समझता हूं और उनकी पीड़ा भी समझता हूं. मैंने प्रशासन के साथ कई बार बैठ कर इस विषय पर यह देखा है कि किस प्रकार से सरकार की तरफ से मिलने वाले अधिकार उनको मिले क्योंकि वो उनके लिए भी न्याय होगा.

हाल ही में वरिष्ठ बीजेपी नेता लाल कृष्ण आडवाणी ने अपने ब्लॉग में लिखा कि ये बीजेपी की संस्कृति नहीं है कि अपने विरोधी को देशद्रोही कहें. लेकिन प्रधानमंत्री अपने बयान में कहते हैं कि पाकिस्तान और विपक्ष, आतंकवाद और विपक्ष चाहता है कि मैं हार जाऊँ.

हम विपक्ष के सभी साथियों को मान सम्मान देते हैं. जो उनका बयान होता है उस पर फिर हमलोग अपनी प्रतिक्रिया, अपने विचार देते हैं.

लेकिन उन्होंने तो नरेंद्र मोदी को आतंकवादी नहीं कहा, तो ऐसा नहीं लगता कि भाषा सुधर सकती थी.

आप इतिहास में जाएं तो देखेंगे कि विपक्ष ने हमारे प्रधानमंत्री के बारे में क्या क्या कहा है.

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Image caption यशवंत सिन्हा

2014 के समय आपके पिताजी (यशवंत सिन्हां) आपके साथ थे, इस बार हम उन्हें कहीं देख नहीं रहे हैं.

उनका सहयोग, उनका मार्गदर्शन बहुत मिलता था. मैंने उनके साथ कई चुनाव लड़े हैं. लेकिन चुनाव कोई एक प्रत्याशी नहीं लड़ता है, यह एक संगठन लड़ता है.

यशवंत सिन्हा ने अपने एक बयान में कहा था कि मैं अपने बेटे के साथ राजनीति पर चर्चा नहीं करता हूं.

हम बहुत सुलझे हुए लोग हैं. अपने निजी और सार्वजनिक जीवन को हरदम अलग रखते हैं.

Image caption अलीमुद्दीन अंसारी की पत्नी मरियम खातून

जयंत सिन्हा के मदद के बयान पर मरियम खातून क्या कहती हैं?

इस पूरे विवाद पर लिंचिंग का शिकार बने अलीमुद्दीन अंसारी की पत्नी मरियम खातून ने कहा, "आप उन लोगों की मदद कर रहे हैं जिन्होंने बीच चौराहे पर किसी की जान ले ली. किसी का घर बिखर गया और उसके लिए ज़िम्मेदार लोगों की मदद की. जयंत सिन्हा दिला दें मेरे बेटे को नौकरी, एक महीने के भीतर जॉइन करवा दें. तब हम समझेंगे कि उन्होंने हमारी मदद की है. जो भी जयंत सिन्हा कह रहे हैं कि उन्होंने प्रशासन के जरिए मदद पहुंचाई है तो ये सब हम नहीं मानते."

अभियुक्तों के वकील ने आर्थिक मदद पर क्या कहा?

बीबीसी ने आरोपी पक्ष के वकील संजीव अंबष्ठा से भी बात की. उन्होंने कहा, "मेरी जानकारी में नहीं है कि अभियुक्त को जयंत सिन्हा या बीजेपी से कोई आर्थिक मदद मिल रही थी. ट्रायल के दौरान मेरे पास इस तरह का कोई संपर्क नहीं आया. किसी भी नेता का संपर्क मेरे सामने तो नहीं हुआ."

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