BJP नेता के दलित युवक को पीटने का सच: फ़ैक्ट चेक

  • 2 मई 2019
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सोशल मीडिया पर एक लड़के की पिटाई का वीडियो इस दावे के साथ शेयर किया जा रहा है कि भारतीय जनता पार्टी के किसी नेता ने एक दलित युवक की सरेआम पिटाई की.

इस वीडियो में दिखाई देता है कि कुछ लोग एक युवक को पकड़कर, डंडों से उसकी पिटाई कर रहे हैं.

बीबीसी के कई पाठकों ने वॉट्सऐप के ज़रिए हमें यह वीडियो फ़ॉरवर्ड किया है और इसकी सच्चाई जानने की कोशिश की है.

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Image caption हमें मिले अधिकांश संदेशों में वायरल वीडियो के साथ यही बात लिखी है

क़रीब डेढ मिनट के इस वीडियो के साथ हमें जो मैसेज मिले हैं, उनमें लिखा है कि "बीजेपी विधायक अनिल उपाध्याय की इस हरक़त पर क्या कहेंगे पीएम मोदी. दलित, पिछड़े आलीशान कार में भी नहीं घूम सकते हैं?"

हमने पाया कि 29 अप्रैल के बाद से यह वीडियो फ़ेसबुक पर भी कई बड़े ग्रुप्स में शेयर किया गया है.

जिन लोगों ने इस वीडियो को फ़ेसबुक पर पोस्ट किया है, उनका दावा है कि बीजेपी नेता अनिल उपाध्याय ने अपने गुंडों सहित दलित युवक की पिटाई कर दी क्योंकि वो युवक एक आलीशान गाड़ी में घूम रहा था.

लेकिन अपनी पड़ताल में हमने पाया कि ये दावा बिल्कुल ग़लत है.

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वीडियो की हक़ीक़त

रिवर्स इमेज सर्च से पता चलता है कि ये दो साल पुराना वीडियो है.

4 अप्रैल 2017 को कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में इस वीडियो का इस्तेमाल किया गया था.

इन रिपोर्ट्स के अनुसार वीडियो में जिस शख़्स की पिटाई हो रही है, वो गुजरात के अहमदाबाद शहर में रहने वाले हार्दिक भरवाड़ हैं.

हार्दिक को पारिवारिक विवाद के चलते उनके ससुराल पक्ष के लोगों ने पीटा था. साथ ही उनकी गाड़ी भी तोड़ दी थी.

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इस मामले की पूरी जानकारी लेने के लिए हमने गुजरात पुलिस से बात की.

गुजरात पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने हमें बताया कि ये वीडियो गांधीनगर में स्थित सेक्टर-7 का है.

उन्होंने बताया, "ये पूरा मामला घरेलू हिंसा का था जिसमें लड़की ने अपने पति हार्दिक भरवाड़ पर घरेलू हिंसा और दहेज माँगने का आरोप लगाया था."

उन्होंने बताया कि जब लड़की ने अपने घर जाकर उसके साथ हुई हिंसा के बारे में बताया था तो लड़की के घरवालों ने हार्दिक भरवाड़ की पिटाई कर दी थी.

पुलिस अधिकारी के अनुसार इस मामले में दोनों पक्षों ने एक दूसरे के ख़िलाफ़ केस दर्ज कराये थे और ये मामला अभी भी कोर्ट में लंबित है.

गुजरात पुलिस ने यह साफ़ किया कि युवक की पिटाई पारिवारिक विवाद के कारण की गई थी और इसका किसी पॉलिटिकल पार्टी से कोई संबंध नहीं है.

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