ट्रेन लेट होने से 500 छात्रों की NEET परीक्षा छूटी, केंद्र सरकार ने कहा-दोबारा मिलेगा मौक़ा

  • 6 मई 2019
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उत्तर कर्नाटक के ज़िलों में कम से कम 500 छात्र ट्रेनों के देरी से चलने के कारण नीट की परीक्षा नहीं दे सके और अब उनके सामने एक साल खराब होने का संकट है.

ये छात्र रविवार को नीट की परीक्षा में इसलिए हाज़िर नहीं हो सके क्योंकि ट्रेन वक्त पर बेंगलूरू नहीं पहुंच सकी. अब इन छात्रों को या तो अपनी शिक्षा योजना को बदलना होगा या वे पाठ्यक्रम में एक साल पीछे हो जाएंगे.

ये छात्र पूर्वोत्तर के ज़िलों बेल्लारी, राइचुर, कोप्पल, हुबली, गडग से रविवार को बेंगलूरू मेडिकल की प्रवेश परीक्षा नीट देने पहुंचना चाहते थे. लेकिन हुबली से बेंगलूरू तक जाने वाली हम्पी एक्सप्रेस ना सिर्फ़ एक या दो घंटे की देरी से बल्कि पूरे आठ घंटे देरी से बेंगलूरू पहुंची. इस ट्रेन को सुबह 6 बजकर 10 मिनट पर बेंगलूरू पहुंचना था लेकिन ये दोपहर बाद ही बेंगलूरू पहुंच सकी.

इस पूरे मामले पर केंद्रीय शिक्षा मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने कहा है कि इन बच्चों को दोबारा मौका दिया जाएगा.

उन्होंने सोमवार को ट्वीट किया, '' कर्नाटक के जिन बच्चों की नीट परीक्षा ट्रेन की दोरी के कारण छूट गई है उन्हें एक और मौका दिया जाएगा.''

बच्चों के अभिभावक हैं परेशान

एक छात्र के पिता वेंकट रेड्डी ने बीबीसी हिंदी को बताया, '' हम जब एग्ज़ाम सेंटर पर पहुंचे तो दूसरी घंटी बज चुकी थी. हमें वहां 12 बजकर 30 मिनट पर पहुंचन था लेकिन हम 2 बजकर 30 मिनट पर पहुंचे. ''

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रेड्डी ख़ुद कोप्पल के एक सरकारी जूनियर कॉलेज के प्राध्यापक हैं. वह अपने 17 साल के बेटे सुहास के साथ बेंगलूरू आए थे. वह कहते हैं, '' हमने देरी की वजह बताते हुए निवेदन भी किया. लेकिन हम असहाय हैं और कुछ नहीं कर सकते. सुहास 17 साल का है. उसने 12वीं में 87.75 फ़ीसदी हासिल किए, वो नीट की तैयारियां कर रहा है. अगर सरकार ने उसे परीक्षा देने का दूसरा मौका नहीं दिया तो उसका साल बर्बाद हो जाएगा.''

कार्तिक नायडू 17 साल के हैं. वह नीट की कोचिंग के लिए होसपेट से बेल्लारी जाया करते थे. वह कहते हैं, ''मैं 45 दिनों तक कोचिंग जाता रहा. मुझे यकीन है कि अगर मैंने परीक्षा दी होती तो मेरे अच्छे नंबर आते. अगर परीक्षा दोबारा कराई जाएगी तो मुझे भरोसा है कि अच्छे नंबर लाऊंगा. ''

कार्तिक ने 12वीं में 80 फ़ीसदी अंक हासिल किए हैं.

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आर एस रोहित नाम के शख़्स का मामला और भी चौंकाने वाला है. वह बेल्लारी से बेंगलूरू नीट की कोचिंग के लिए आए थे. इसके बाद वो राज्य सरकार के प्रतियोगी परीक्षा कॉमन एंट्रेंस टेस्ट (सीईटी) के लिए बेल्लारी वापस चले गए.

रोहित कहते हैं, ' मुझे पता था ट्रेन लेट होगी. लेकिन मुझे लगा की ये देरी कुछ घंटों की ही होगी और हम वक़्त पर बेंगलरू पहुंच जाएंगे, लेकिन ट्रेन बेहद देरी से पहुंची.''

रोहित कहते हैं कि अगर उनको तुरंत नीट देने का मौका नहीं मिला तो वे इंजीनियरिंग की ओर जाएंगे. लेकिन वो कहते हैं, ''ट्रेन में कई ऐसे लोग थे जो नीट को लेकर बेहद गंभीर थे और वे मेडिकल ही करना चाहते हैं. उन्होंने परीक्षा की तैयारी भी काफ़ी अच्छी तरह से की थी. ''

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इनमें से कई छात्रों की समस्या और भी जटिल थी. उनका परीक्षा केंद्र उत्तरी बेंगलुरू से लगभग 40 किलोमीटर की दूरी पर दक्षिण बेंगलुरू में ट्रांसफ़र कर दिया गया था.

रेड्डी कहते हैं, ''हमने अपना मेल चेक किया था और हम कॉलेज (दक्षिण बेंगलुरू में) गए थे. कई को तो बदलाव की जानकारी तक नहीं थी. तब भी सुहास परीक्षा नहीं दे पाए क्योंकि हमें काफ़ी देर हो गई थी.''

कर्नाटक के मुख्यमंत्री एचडी कुमारस्वामी ने केंद्र सरकार से अनुरोध किया था कि वो इस मामले में दखल दें और उत्तरी कर्नाटक के जिन छात्रों की परीक्षा छूट गई है उन्हें दोबारा परीक्षा देने का मौका दिया जाए.

कर्नाटक से आने वाले केंद्रीय मंत्री सदानंद देवगौड़ा ने भी शिक्षा मंत्री प्रकाश जावड़ेकर से मामले में दखल देने को कहा था.

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