लोकसभा चुनाव 2019- छठे चरण में दिल्ली और छह राज्यों की 59 सीटों पर आज मतदान

  • 12 मई 2019
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रविवार को छठे चरण के चुनाव में छह राज्यों और दिल्ली की 59 सीटों पर मतदाता उम्मीदवारों के चुनावी भविष्य का फ़ैसला करने जा रहे हैं.

इसमें उत्तर प्रदेश की 14, हरियाणा की सभी 10, बिहार की आठ, पश्चिम बंगाल की आठ, मध्य प्रदेश की आठ, दिल्ली की सभी सात और चार सीटें झारखंड की शामिल हैं.

2014 में बीजेपी ने इन 59 सीटों में से कुल 45 सीटें जीती थीं.

किन-किन वीआईपी सीटों पर मतदान

2014 में दिल्ली की सातों सीटों पर बीजेपी को जीत मिली थी. इस बार यहां 164 उम्मीदवारों की किस्मत का फ़ैसला होना है. इस बार चुनावी मैदान में शीला दीक्षित, विजेंदर सिंह, गौतम गंभीर, आतिशी मार्लेना , अजय माकन जैसे दिग्गज नेता मैदान में हैं.

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उत्तर प्रदेश में आज़मगढ़ सीट पर सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव बनाम बीजेपी उम्मीदवार दिनेश यादव उर्फ़ निरहुआ और केंद्रीय मंत्री रहीं मेनका गांधी सुल्तानपुर सीट से चुनावी मैदान में हैं. रविवार को जनता इन उम्मीदवारों पर अपना फ़ैसला देगी.

बिहार में केंद्रीय मंत्री राधामोहन सिंह पूर्वी चंपारण से चुनावी मैदान में है. वह पांच बार सांसद रह चुके हैं.

मध्य प्रदेश की आठ लोकसभा सीटों में भोपाल का मुक़ाबला दिलचस्प है. इसके अलावा गुना, ग्वालियर और विदिशा में भी कांटे की टक्कर मानी जा रही है.

भोपाल सीट पर लड़ाई मज़ेदार बताई जा रही है क्योंकि ये मूलतः भारतीय जनता पार्टी की सीट रही है. मगर कांग्रेस ने यहाँ से दिग्विजय सिंह को खड़ा किया है जो 16 सालों के बाद चुनाव लड़ रहे हैं. पिछली बार वो 2006 में ही यहाँ से चुनाव लड़े थे.

यानी 16 सालों के बाद दिग्विजय के चुनाव लड़ने से कांग्रेस पार्टी बहुत आशान्वित थी. मगर ऐन वक़्त पर भारतीय जनता पार्टी ने साध्वी प्रज्ञा ठाकुर को उतारकर दिग्विजय सिंह के लिए बड़ी चुनौती खड़ी कर दी है. जिस सीट पर बीजेपी का दबदबा 1989 से रहा है उसे यहाँ पर अब मुकाबला करना पड़ रहा है.

साध्वी प्रज्ञा ने चुनावों से सिर्फ 25 दिनों पहले से ही प्रचार शुरू किया. दिग्विजय सिंह का अपना गृह क्षेत्र राजनगर है मगर कांग्रेस ने उन्हें भोपाल से खड़ा कर मध्य प्रदेश में मुकाबले को रोचक बना दिया है.

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गुना सीट स्वाधीनता के बाद से ही सिंधिया राज परिवार का गढ़ ही रहा है. इस सीट पर भाजपा ने चार बार और कांग्रेस ने नौ बार जीत दर्ज की है जबकि एक बार ये सीट जन संघ के पाले में आई थी. इस सीट पर लगातार राजमाता विजयाराजे सिंधिया, माधवराव सिंधिया और ज्योतिरादित्य सिंधिया जीत रहे हैं.

माधवराव सिंधिया की मौत के बाद जब गुना सीट पर वर्ष 2002 में उपचुनाव हुआ, तब से यहाँ ज्योतिरादित्य सिंधिया ही जीतते आये हैं. मगर इस बार भारतीय जनता पार्टी ने अपनी रणनीति बदलते हुए सिंधिया परिवार के क़रीबी माने जाने वाले केपी यादव को अपना उम्मीदवार बनाया है.

पिछले लोक सभा के चुनावों में ज्योतिरादित्य एक लाख 20 हज़ार मतों के अंतर से जीते थे. हालांकि ये सीट उनके परिवार के वर्चस्व वाली ही है मगर क्या भाजपा ने यादव को खड़ा कर ज्योतिरादित्य के लिए वाक़ई चुनौती कड़ी करने की कोशिश की है ? इसपर सबकी नज़र रहेगी.

ग्वालियर सीट को मौजूदा केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने कांग्रेस से 2014 के चुनावों में कांग्रेस के अशोक सिंह झटक ली थी. मगर इस बार भाजपा ने उनकी जगह ग्वालियर के मेयर विवेक शेज्वालकर को टिकट दिया है. अशोक सिंह फिर मैदान में हैं. इस सीट से यशोधरा राजे सिंधिया भी भारतीय जनता पार्टी की सांसद रह चुकी हैं.

विदिशा सीट पर भारतीय जनता पार्टी के बड़े नाम चुनाव लड़ चुके हैं और सांसद रह चुके हैं. इनमे पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी, सुषमा स्वराज और पूर्व मुख्या मंत्री शिवराज सिंह चौहान के नाम प्रमुख हैं. चार दशकों से ये क्षेत्र भाजपा का अभेद किला रहा है.

इस बार उम्मीद की जा रही थी कि सुषमा स्वराज के चुनाव लड़ने से इनकार करने के बाद इस सीट पर शिवराज सिंह चौहान की पत्नी को टिकट मिलेगा. पर ऐसा नहीं हुआ और पार्टी ने सहकारिता अभियान से जुड़े रहे रमाकांत भार्गव को टिकट दिया है.

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