क्या मोदी का पाकिस्तानी रडार से बादलों की वजह से बचने वाला बयान सही?

  • 13 मई 2019
इमेज कॉपीरइट Getty Images

संदर्भः बालाकोट हमला

पत्रकार (एक इंटरव्यू में): जब जवान हमला करने जा रहे थे, तो उस रात आप सो पाए थे?

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदीः मैं दिनभर व्यस्त था. रात नौ बजे रिव्यू (एयर स्ट्राइक की तैयारियों का) किया, फिर बारह बजे रिव्यू किया. हमारे सामने समस्या थी, उस समय वेदर (मौसम) अचानक ख़राब हो गया था. बहुत बारिश हुई थी.

"विशेषज्ञ (हमले की) तारीख बदलना चाहते थे, लेकिन मैंने कहा कि इतने बादल हैं, बारिश हो रही है तो एक फ़ायदा है कि हम रडार (पाकिस्तानी) से बच सकते हैं, सब उलझन में थे क्या करें. फिर मैंने कहा बादल है, जाइए... और (सेना) चल पड़े..."

इमेज कॉपीरइट OfficialDGISPR
Image caption पाकिस्तानी आर्मी ने ये फोटो बालाकोट हमले के बाद ट्वीट किया था और कहा था कि भारतीय विमानों ने खुली जगह पर में बम गिराए.

बच्चों को परीक्षा के टिप्स देने वाले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के इस बयान ने फिजिक्स के छात्रों को दुविधा में डाल दिया है.

दुविधा यह है कि रडार बादलों में काम करता है या नहीं.

प्रधानमंत्री का कहना है कि बालाकोट हमले के दौरान बादलों का फ़ायदा भारतीय सेना ने तकनीक रूप से उठाया और भारतीय मिराज पाकिस्तान रडार से बच सका और लक्ष्य पर हमला करने में कामयाब हुआ.

फिजिक्स में अब तक छात्रों को यह पढ़ाया जाता रहा है कि रडार किसी भी मौसम में काम करने में सक्षम होता है और यह अपनी सूक्ष्म तरंगों (Microwave) के जरिए विमान का पता लगा लेता है.

सोशल मीडिया पर नरेंद्र मोदी के इस बयान की खिल्ली उड़ाई जा रही है, उन्हें फिजिक्स पढ़ने की नसीहत भी दी जा रही है.

विज्ञान मामलों के जानकार पल्लव बागला भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के इस बयान को ग़लत ठहराते हैं.

उन्होंने बीबीसी से कहा, "जहां तक मेरी जानकारी है, रडार को बादलों से फर्क नहीं पड़ता है. इसकी सूक्ष्म तरंगें बादलों को भेद कर जाती है और विमानों का पता लगाती है. प्रधानमंत्री मोदी का यह बयान तकनीकी रूप से बिल्कुल ग़लत है."

पल्लव बागला समझाते हैं कि बादलों की वजह से कौन से सैटेलाइट या तस्वीर लेने वाले उपकरण काम करना बंद कर देते हैं.

वो कहते हैं, "जब अंतरिक्ष में ऑप्टिकल सैटेलाइट (तस्वीर लेने वाले सैटेलाइट) बादलों और रोशनी की कमी की वजह से तस्वीरें लेना बंद कर देते हैं तो रडार इमेजिंग का सैटेलाइट लगाया जाता है, जिससे अंतरिक्ष से एक शक्तिशाली सूक्ष्म तरंगें भेजी जाती हैं, वो रिफ्लेक्ट होकर (लक्ष्य से टकरा कर) वापस जाती है, उससे जो तस्वीरें बनती हैं, उसे देखा जा सकता है."

हालांकि बालाकोट मामले में भारतीय विमान का पता लगाने के लिए जमीन वाले रडार के इस्तेमाल की बात प्रधानमंत्री अपने इंटरव्यू में कर रहे थे.

आख़िर रडार होता क्या है और यह काम कैसे करता है

अब सवाल उठता है कि यह रडार आख़िर काम कैसे करता है और यह विमानों का पता कैसे लगाता है?

RADAR यानि Radio Detection And Ranging.

राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (एनआईटी) पटना के एक प्रोफेसर के मुताबिक रडार का इस्तेमाल विमान, जलयान, मोटरगाड़ियों आदि की दूरी, ऊंचाई, दिशा और गति का पता लगाने के लिए किया जाता है.

इसके अलावा इसकी मदद से मौसम में आ रहे बदलावों का भी पता लगाया जाता है.

यह 'रिफ्लेक्शन ऑफ इलेक्ट्रोमैगनेटिक वेव्स' के नियमों पर काम करता है.

रडार में दो उपकरण होते हैं, सेंडर और रिसीवर.

सेंडर इलेक्ट्रोमैग्नेटिक वेव्स यानी सूक्ष्म तरंगों को टारगेट यानी लक्ष्य की ओर भेजता है, जो उससे टकराकर वापस रिसीवर को मिलती हैं.

भेजने और प्राप्त करने के बीच कितना समय लगा, इसके आधार पर विमान की दूरी, ऊंचाई और गति के बारे में पता लगाया जाता है.

दिल्ली की सड़कों पर सीसीटीवी कैमरे की तरह 'रडार गन' लगाए गए हैं, जो गाड़ियों की स्पीड का पता लगाते हैं. कई इलाक़ों में अगर गाड़ियां तय स्पीड से ज़्यादा तेज़ चलती है तो ये 'रडार गन (स्पीड गन)' उसकी पहचान करती है और ट्रैफिक पुलिस वाहनों का चालान करती है.

बयान की आलोचना

शनिवार को टीवी चैनल न्यूज़ नेशन को दिए इंटरव्यू में नरेंद्र मोदी ने यह भी कहा कि वो विज्ञान बहुत अच्छी तरह नहीं जानते हैं और विशेषज्ञ उन्हें बादलों की वजह से हमले की तारीख़ बदलने की सलाह दे रहे थे.

शिक्षा और विज्ञान जगत से जुड़े लोग प्रधानमंत्री के इस बयान को देश के होनहार वैज्ञानिकों का अपमान समझ रहे हैं. उनका कहना है कि यह उनकी काबिलियत का मज़ाक उड़ाने जैसा है. वे ऐसी बेवकूफी भरी सलाह प्रधानमंत्री को नहीं दे सकते हैं.

भाजपा के आधिकारिक ट्विटर हैंडल से भी प्रधानमंत्री के इस बयान को ट्वीट किया गया था. जब आलोचना बढ़ने लगी तो ट्वीट को डिलीट कर दिया गया.

इमेज कॉपीरइट Dassault Rafale

भारत के पास हैं रडार से बचने वाले विमान?

बालाकोट हमले के बाद भारत ने शुरुआत में दावा किया था कि भारतीय विमान ने पाकिस्तानी सीमा से काफी अंदर घुसकर टारगेट को निशाना बनाया था.

फिर बाद में यह कहा गया था कि भारत ने पाकिस्तान प्रशासित कश्मीर में ही हमला किया था.

भारत ने जिस सिस्टम का इस्तेमाल हमले के लिए किया था वो 'स्टैंडऑफ़ वेपन' कहलाता है.

यह ऐसा सिस्टम होता है जो दूर से ही लक्ष्य को निशाना बना सकता है.

भारतीय मिराज ऐसे ही 'स्टैंडऑफ़ वेपन' सिस्टम से लैस है और ये विमान बादलों के होने पर भी लक्ष्य को निशाना बना सकते हैं.

अब आपके मन में यह सवाल उठ सकता है कि भारतीय मिराज को बादलों से कोई फर्क तो नहीं पड़ता पर क्या भारत के पास ऐसा कोई लड़ाकू विमान है, जो रडार से बच सकता है? क्या रफ़ाल इस तकनीक से लैस होगा?

इस सवाल के जवाब में पल्लव बागला कहते हैं कि रडार से बचने के लिए स्टेल्थ तकनीक (Stealth Technology) का इस्तेमाल किया जाता है या फिर कम ऊंचाई पर उड़ान भरने से."

"जहां तक मेरी जानकारी है भारतीय मिराज में स्टेल्थ तकनीक नहीं है. सिर्फ इसी तकनीक से रडार की मैपिंग से आप बच सकते हैं."

वो बताते हैं कि स्टेल्थ तकनीक के विमान ख़ास कर रूस और अमरीका के पास हैं. भारत जिन रफ़ाल विमानों को खरीद रहा है, उसमें भी यह तकनीक नहीं है. भारत के पास स्टेल्थ तकनीक से लैस कोई भी विमान नहीं है.

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)

बीबीसी न्यूज़ मेकर्स

चर्चा में रहे लोगों से बातचीत पर आधारित साप्ताहिक कार्यक्रम

सुनिए

संबंधित समाचार