लोकसभा चुनाव 2019: मोदी के मंत्री राम कृपाल यादव को मीसा भारती ने फिर दी चुनौती

  • 15 मई 2019
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बिहार में लोकसभा की चालीस सीटों में पाटलिपुत्र संसदीय क्षेत्र राजद और भाजपा के लिए प्रतिष्ठा का प्रश्न बनी हुई है.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पालीगंज में बुधवार को अंतिम चुनावी रैली है तो गुरूवार को कांग्रेस के अध्यक्ष राहुल गांधी की सभा विक्रमगंज में होनी है.

यहाँ से लालू प्रसाद की पुत्री और राज्यसभा सांसद डा. मीसा भारती दूसरी बार केंद्रीय मंत्री राम कृपाल यादव के ख़िलाफ़ लड़ रही हैं.

यादव बहुल इस क्षेत्र में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राजद प्रमुख लालू प्रसाद दोनों की साख दांव पर है.

वर्ष 2014 की मोदी लहर में लालू प्रसाद के करिश्मे के सहारे राजद अपने बूते केवल चार सीट जीत पाया था.

पाटलिपुत्र सीट से मीसा भारती 40 हज़ार मतों से चुनाव हार गयी थीं. राम कृपाल यादव के चुनाव जीतने पर भाजपा ने उन्हें इस जीत का पुरस्कार देते हुए पहली बार केंद्र में राज्यमंत्री बनाया था.

राजद को सीपीआई (माले) का समर्थन

जबकि, लगभग 90 हज़ार वोट पाने वाले और तीसरे नंबर पर रहे जदयू के उम्मीदवार रंजन प्रसाद यादव इस बार चुनावी मैदान में नहीं हैं.

इस बार राजद को क्षेत्र में सीपीआई (माले) का समर्थन प्राप्त है. दूसरी तरफ राम कृपाल यादव को रामविलास पासवान की लोजपा और नीतीश कुमार के जदयू का समर्थन हासिल है. उनके पक्ष में भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह सात तारीख को सुरक्षित मसौढ़ी विधानसभा में रोड शो कर चुके हैं.

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एक तरफ लालू की बेटी मीसा भारती के साथ यादव समाज की सहानुभूति जुड़ी है तो दूसरी तरफ पीएम मोदी के मंत्री की प्रतिष्ठा दांव पर है.

लालू प्रसाद को ज़मानत नहीं मिलने से वे चुनाव से दूर हैं.

मीसा के साथ उनकी मां और पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी क्षेत्र का सघन दौरा कर रही हैं और लालू के साथ हुए कथित अन्याय के विरुद्ध लोगों से वोट मांग रही हैं.

दो हाई- प्रोफाइल उम्मीदवार यादव समाज से हैं इसलिए मुकाबला सीधा न होकर है सहानुभूति और प्रतिष्ठा की तराजू पर चढ़ गया है.

विक्रम विधानसभा क्षेत्र के अंधराचौकी गाँव के किसान संजय कुमार चुनाव में विकास को मुख्य पैमाना मानते हैं.

यादव समाज के संजय के अनुसार "राम कृपाल जी को पिछले बार समाज ने बढ़िया वोट दिया था, लेकिन जो उम्मीद थी उस हिसाब से उन्होंने कोई काम नहीं किया है. जब मंत्री बन कर भी कुछ नहीं किये, तो जनता विकल्प तो ज़रुर ढूंढेगी".

विकास है चुनावी मुद्दा?

वर्ष 1924 में स्थापित अखिल भारतीय यादव महासभा के संस्थापक अध्यक्ष रास बिहारी मंडल के प्रपौत्र निखिल मंडल पेशे से वकील हैं और जदयू के कार्यकर्त्ता हैं. वे कहते हैं कि " समाज के सामने विकास पहला पैमाना होना चाहिये ".

राम कृपाल यादव का नाम लिए बगैर वे कहते हैं कि "नेता को प्रगतिशील, क्षेत्र में समय देने वाला और अच्छी छवि का होना चाहिये. इस मापदंड पर देखें तो मीसा भारती की पहचान सिर्फ़ दो पूर्व मुख्यमंत्री की बेटी की ही हैं."

वहीं लालगंज सेहरा, पालीगंज के मूल निवासी हैं और पेशे से ऑटो चालक रमेश कुमार कहते हैं कि "पिछली बार जिस अपेक्षा के साथ मंत्री जी को वोट किये थे वो उस पर खरे नहीं उतरे. इस बार हम लोग बदलाव चाह रहे हैं."

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पटना विश्वविद्यालय में हिंदी के विभागाध्यक्ष प्रो. शरदेन्दु कुमार का मानना है कि "मीसा लालू जी की बेटी हैं और राम कृपाल भी कभी उनका साया हुआ करते थे, लेकिन आज वो दूसरे खेमे में हैं. दोनों प्रत्याशियों का कोई मतलब नहीं है. सवाल लालू जी और लालू जी के वर्ग शत्रु के बीच की लड़ाई की है. समाज के वोटिंग का आधार यही होगा."

वर्ष 2009 में क्षेत्र के सांसद रहे रंजन प्रसाद यादव का मानना है कि कोई भी जाति या धर्म हो चुनाव का पैमाना विकास ही होना चाहिये.

उनके अनुसार " महागठबंधन की उम्मीदवार के माता- पिता 15 साल तक मुख्यमंत्री रहे और कोई विकास नहीं हुआ. राम कृपाल जी ने विकास किया है. इसलिए उनका समर्थन करना चाहिये ".

वर्ष 2008 में परिसीमन के बाद छह विधानसभा क्षेत्रों (दानापुर, पालीगंज, विक्रम, मनेर, फुलवारी शरीफ और मसौढ़ी) को मिलाकर पाटलिपुत्र संसदीय क्षेत्र वर्ष 2009 में अस्तित्व में आया.

गैर-यादव वोट हुआ अहम

भारत निर्वाचन आयोग के वर्ष 2009 के आकड़ों के अनुसार यहाँ कुल मतदाताओं की संख्या लगभग 15 लाख है. सबसे अधिक यादव जाति के करीब पांच लाख मतदाता हैं. इसलिए यादव ही यहाँ के भाग्य का फैसला करते हैं.

यदुवंशियों के जातीय संगठन श्री कृष्ण चेतना परिषद के आजीवन सदस्य और पूर्व सांसद प्रकाश चंद्र मौन हैं.

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Image caption डा. कुमार इंद्रदेव

वहीं इस मुद्दे पर अखिल भारतीय यादव महासभा के प्रांतीय अध्यक्ष डा कुमार इंद्रदेव भी सीधे- सीधे जवाब देने की बजाय पहले तुलसी की चौपाई पढ़ कर अपनी भावना व्यक्त करते हैं "को बड़- छोट कहत अपराधु."

उनके अनुसार "राम कृपाल का व्यक्तित्व और कृत्य अव्वल है तो मीसा भारती का उद्देश्य स्पष्ट है और उनके साथ जुड़ी सहानुभूति की लहर को देख कर समाज के सामने निर्णय करना अभी बड़ी चुनौती है. महासभा फरमान जारी नहीं करती है."

राजद प्रमुख लालू प्रसाद के प्रति सहानुभूति बनाम नरेंद्र मोदी के विकास मॉडल के नाम पर लड़े जा रहे चुनाव पर वरिष्ठ पत्रकार नलिन वर्मा का मानना है कि पाटलिपुत्र क्षेत्र का चुनाव पिछले बार की तरह ही कांटे का है.

वहीं वरिष्ठ पत्रकार एसए शाद इस बार के चुनाव को अलग मानते हैं.

वे कहते हैं, "इस बार यादवों के बीच एक सोच उभरी है कि परिवार को बचाना है यानी लालू प्रसाद को बचाना है. पिछले चुनाव में यादवों ने राम कृपाल यादव के प्रति अपना रुझान दिखाया था. लेकिन, इस बार के रुझान को देखकर लगता है कि यह समाज चुनाव को अपनी और लालू परिवार के अस्तित्व की लड़ाई के रूप में देख रहा है. इससे इलाके में गैर- यादव वोट महत्वपूर्ण हो गया है. माले और जदयू का वोट बैंक भी दोनों प्रत्याशियों के संदर्भ में इस चुनाव को रोचक बना रहा है. पीएम मोदी और कांग्रेस के राहुल गाँधी की सभा का असर वोटरों पर पड़ेगा ".

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