दिल्ली: बेटी के साथ छेड़खानी का विरोध करने गए पिता की हत्या की पूरी कहानी

  • 15 मई 2019
पीड़ित का घर
Image caption पीड़ित का घर

11 मई की रात को जब अर्चना अपने पिता के साथ दवाई लेने निकलीं तो उन्होंने सोचा भी नहीं होगा कि ये उनका अपने पिता के साथ स्कूटर पर आख़िरी सफ़र है.

अर्चना (बदला हुआ नाम) के पिता ने अपनी बेटी की सुरक्षा के लिए आवाज़ उठाई लेकिन बदले में उन्हें जान गंवानी पड़ी. एक कहासुनी हत्या में बदल गई.

पुलिस ने इस मामले में चार लोगों को पकड़ा है. इनमें से एक पिता और बेटा है जिन्हें न्यायिक हिरासत में भेजा गया है. बड़े बेटे ने चाकू से वार किया था. बाकी दो नाबालिग हैं और उन्हें बाल सुधार गृह भेजा गया है.

घटना के बाद से पूरे मामले को सोशल मीडिया पर सांप्रदायिक रंग देने की भी कोशिश की गई है.

ये घटना दिल्ली में चुनाव से एक दिन पहले राजधानी दिल्ली में मोती नगर के पास बसई दारापुर इलाक़े की है. यहां की संकरी गलियों में अगर एक रेहड़ी या दो-तीन लोग भी खड़े हो जाएं तो एक स्कूटर या बाइक निकलने की भी जगह नहीं रह जाती.

कुछ ऐसा ही हुआ था 11 मई (शनिवार) की रात को जब इस इलाक़े में रहने वाले एक कारोबारी सुमित त्यागी (बदला हुआ नाम) अपनी बेटी को अस्पताल से लेकर लौट रहे थे. आधी रात थी. उनकी बेटी अर्चना को माइग्रेन का दर्द हुआ था और वो उसे अस्पताल लेकर गए थे.

Image caption अभियुक्तों का परिवार घर छोड़कर चला गया है.

लौटते वक़्त एक गली में कुछ लड़के खड़े होकर बातें कर रहे थे. सुमित ने उन्हें रास्ता देने के लिए कहा और हॉर्न बजाया. उन लड़कों को ये रास नहीं आया और उनके बीच कहासुनी शुरू हो गई. लड़कों ने रास्ता नहीं दिया और बेटी पर भद्दे कमेंट पास करने लगे. किसी तरह सुमित वहां से निकले और अगली गली में अपने घर पहुंचे.

वो घर तो पहुंच गए थे लेकिन अपनी बेटी के लिए कही गई बातें उन्हें अब भी चुभ रही थीं. अगले ही पल वो घर से निकले और वापस उन लड़कों के घर शिकायत करने पहुंच गए. कमेंट पास करने वाले लकड़े- सभी भाई हैं और सुमित की गली में ही किराए पर रहते हैं.

सुमित ने उन लड़कों के मां-बाप से शिकायत की लेकिन ग़लती मानने की बजाय उन्होंने झगड़ा शुरू कर दिया. लड़कों और उनके पिता ने सुमित से मारपीट शुरू कर दी. ये झगड़ा इतना बढ़ गया कि उन लोगों ने सुमित पर चाकू से हमला कर दिया.

काफी देर तक पिता के न लौटने पर बेटी ने, मां और भाई को रास्ते में हुई कहासुनी के बारे में बताया. भाई ढूंढते हुए निकला तो पिता घायल हालत में मिले. उसने पिता को बचाने की कोशिश की तो लड़कों ने उस पर भी चाकू से वार किए.

अगली सुबह पिता की अस्पताल में मौत हो गई और भाई ज़िंदगी और मौत की लड़ाई लड़ रहा है. उसे रमेश नगर के खेत्रपाल अस्पताल में भर्ती कराया गया है.

Image caption दिल्ली का बसई दारापुर इलाक़ा

मिलनसार थे पिता

इलाक़े के लोग सुमित को बहुत मिलनसार बताते हैं. उनका कहना है कि वो अक्सर दूसरों के मसले सुलझाते थे और शायद इसलिए ही वो अपने मामले में चुप नहीं रह पाए और विरोध किया.

सुमित बिजली के सामान का कारोबार करते थे. अब उनके घर में पत्नी, दो बेटी और एक बेटा हैं. घटना के बाद से ही पत्नी सदमे हैं. उनकी पहले से ही तबीयत ख़राब चल रही थी. अर्चना बड़ी बेटी हैं और एमएनसी में नौकरी करती हैं. छोटी बेटी भी नौकरी करती हैं और बेटा कॉलेज में पढ़ रहा है.

हादसे के बाद दो दिन तक अर्चना अपने भाई के साथ अस्पताल में ही थीं. आज वो हरिद्वार पिता की अस्थियां विसर्जित करने गई हैं.

डीसीपी मोनिका भारद्वाज ने बीबीसी को बताया, ''चार अभियुक्तों को अगले दिन रविवार को ही पकड़ लिया गया था. उनमें से दो नाबालिग हैं और उन्हें बाल सुधार गृह में भेजा गया है. अभियुक्तों ने लड़की पर किसी भी तरह की भद्दे कॉमेंट और लड़ाई की शुरुआत करने से इनकार किया है."

डीसीपी के मुताबिक़, ''हमलावर ने रसोई में इस्तेमाल होने वाले चाकू से वार किया गया था. अभियुक्त नशे में थे और अगले दिन भी पूरी तरह होश में नहीं आया था. उसके ख़िलाफ़ पहले से कोई आपराधिक मामला दर्ज नहीं है. हमने अभियुक्तों की मां को पूछताछ के लिए बुलाया है.''

उसी गली में मौजूद अभियुक्तों के किराए के घर में ताला लगा है और मां और बहन ग़ायब हैं. पीड़ित के परिवार ने एफ़आईआर में मां पर चाकू देने का आरोप लगाया है लेकिन पुलिस का कहना है कि फ़िलहाल इसकी पुष्टि नहीं हुई है.

अभियुक्तों के ख़िलाफ़ हत्या, हत्या की कोशिश और महिला से बदतमीज़ी वाली धाराओं के तहत मामले दर्ज किए गए हैं.

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Image caption डीसीपी मोनिका भारद्वाज

लोग तमाशा देखते रहे

घटना होने के तीन दिन बाद भी मोहल्ले में जगह-जगह लोगों का जमघट लगा है और घटना की रात की चर्चा चल रही है. बसई दारापुर में घुसने पर शायद ही कोई होगा जिसे इसका पता न हो. लोग तुरंत उंगली दिखाकर पीड़ित का घर दिखा देते हैं. जब हम वहां पहुंचे तो मीडिया का जमावड़ा था और मिलने आने वालों का आना-जाना लगा था.

मृतक के बड़े भाई और पिता मीडिया के सवालों का जवाब दे रहे थे. जिसकी भी सुनो उसका कहना था कि इस इलाक़े में ऐसा भी होगा ये सोचा नहीं था.

परिवार को जितनी शिकायत अपराधियों से है उतनी ही आसपास के लोगों से भी, जो पूरी घटना को देखते रहे लेकिन सुमित और उनके बेटे को बचाने की कोशिश नहीं की.

सुमित के बड़े भाई और लड़की के ताऊ देवेंद्र त्यागी बताते हैं, ''वो लोग मार रहे थे और सब तमाशा देख रहे थे. किसी ने उन्हें बचाने की कोशिश नहीं की. उनके परिवार की औरतों ने भी हमारी भतीजी और उनकी मां को मारा. पूरा परिवार लड़ने आ गया. लेकिन, किसी की आवाज़ नहीं निकली. लड़की ख़ुद को ही दोषी मान रही कि उसके कारण ही पिता की जान गई. बिना किसी गलती के उसे ज़िंदगी भर का दुख मिल गया.''

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दिल्ली में मोती नगर के पास बसई दारापुर इलाक़े में एक शख्स की हत्या कर दी गई.

सांप्रदायिक रंग देने की कोशिश

मामले के सामने आने के बाद इस पर राजनीति शुरू हो गई है. पूरे मामले में दो समुदायों के लोग शामिल हैं.

इस पर बीजेपी दिल्ली ने ट्वीट किया, ''देश विदेश के हर मुद्दे पर ट्वीट करने वाले सीएम केजरीवाल, दिल्ली में हुई इतनी बड़ी घटना पर अभी तक चुप हैं. क्या वोटबैंक की राजनीति बोलने नहीं दे रही मुख्यमंत्री जी? ये साफ़ दर्शाता है कि आरोपी का धर्म देखकर ही आप कुछ बोलते हैं. हत्यारों से इतनी हमदर्दी क्यों...?''

इसे री-ट्वीट करते हुए बीजेपी नेता और लोकसभा चुनावों में उत्तर पूर्वी दिल्ली से उम्मीदवार मनोज तिवारी ने भी ट्वीट किया. उन्होंने लिखा, ''दुखद, बेहद निंदनीय. अपनी बेटी की मर्यादा बचाने के लिए पिता ने विरोध किया. एक बहादुर बेटे ने परिवार के लिए अपना फ़र्ज़ निभाया. हमें एकसाथ आकर इसकी निंदा करनी चाहिए. दोषियों को फास्ट ट्रैक कोर्ट में सज़ा दी जानी चाहिए.''

इसी तरह कुछ अन्य ट्वीट भी चले जिनमें अभियुक्तों के नाम लिखकर धार्मिक पहचान पर खासा ज़ोर दिया गया.

दिल्ली महिला आयोग ने भी इस घटना पर स्वत: संज्ञान लिया है. आयोग ने 17 मई तक एफ़आईआर में दर्ज जानकारियों समेत अब तक की जांच की रिपोर्ट मांगी है.

दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने नोटिस को ट्वीट करते हुए पुलिस से एक्शन की मांग की है.

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हालांकि, परिवार और मोहल्ले के लोगों ने किसी भी सांप्रदायिक टकराव से इनकार किया है. उनका कहना है कि ये एक झगड़ा है जो धर्म से अलग किसी के भी साथ हो सकता था.

देवेंद्र त्यागी ने बताया, ''उन लोगों से हमारी कोई रंजिश नहीं थी. पहले कभी झगड़ा नहीं हुआ. एक ही गली में तो हैं लेकिन बातचीत नहीं थीं, न तो बेटी ने कभी कोई शिकायत की थी. इसमें धर्म से जुड़ा कोई मसला नहीं है क्योंकि मेरे भाई और भतीजे को अस्पताल ले जाने वाला भी एक मुसलमान लड़का ही है. वो हमारे परिवार जैसा है और यहां हिंदू-मुसलमान लंबे समय से साथ साथ रह रहे हैं.''

आसपास के लोग भी इस बात से सहमति जताते हैं कि अभी तक इस इलाक़े में धर्म के चलते कभी झगड़ा नहीं हुआ. सब मिल जुलकर रहते हैं.

इस मामले के चश्मदीद और पीड़ितों को अस्पताल ले जाने वाले रियाज़ अहमद ने बताया, ''रोज़े के कारण हमारा परिवार सहरी के लिए जगा हुआ था. तभी हमें औरतों के चीखने की आवाज़ सुनाई दी. मैं भागकर गया तो अंकल और उनके बेटे को चाकू मार दिया गया था. चाकू मारने वाले ने बेटी के बाल पकड़े थे और उसके चेहरे पर पत्थर मारने वाला था. मैंने सबसे पहले लड़की को छुड़ाया. उन्होंने मुझे भी पत्थर मारने की कोशिश की. फिर मैं किसी तरह अंकल और बेटे को अस्पताल ले गया. हालत ज़्यादा ख़राब होने पर उन्हें आरएमल ले जाया गया.''

Image caption रियाज़ अहमद ने मृतक और उनके बेटे को अस्पताल पहुंचाया था.

बाहरियों का मसला

इस घटना के बाद इलाक़े में बाहरियों और मूल निवासियों का मसला भी उठने लगा है. इस इलाक़े में कई लोगों ने मकान किराए पर दे रखे हैं. मकान मालिकों की यहां पर फैक्ट्रीयां या दुकानें हैं जिनमें कई किरायेदार काम भी करते हैं.

लोगों का कहना है कि पिछले कुछ सालों से यहां के हालात बदल गए हैं. लोग किराए पर तो मकान दे देते हैं लेकिन पुलिस से किरायेदारों का वेरिफिकेशन नहीं कराते.

लोगों ने बताया कि आसपास शराब की दुकानें और जुआ चलता है. पुलिस इसमें सुधार को लेकर कुछ नहीं करती.

मृतक की भतीजी दीप्ती उस इलाक़े में 26 साल से रह रही हैं. अभी उनकी शादी हो चुकी है. इलाक़े के बदले हालात के बारे में बताते हुए कहती हैं, "पहले यहां लड़ाई झगड़ा बहुत कम होता था पर अब अक्सर झगड़े होते हैं. लड़कियों के साथ भी बदतमीजी होती है. हत्या जैसी घटना तो मैं पहली बार सुन रही हूं."

रियाज़ अहमद कहते हैं, ''यहां पर महिलाएं, बच्चे, बुजु्र्ग कोई सुरक्षित नहीं हैं. रात को माहौल ऐसा होता है कि अलग-अलग कोने पर लड़के शराब पीते दिखते हैं. पुलिस की रूटीन पेट्रोलिंग की कमी है. मकान मालिक पुलिस वेरिफिकेशन नहीं कराते जिसका खामियाज़ा बाद में भुगतान पड़ता है. जैसा कि इस मामले में भी हुआ है.''

हालांकि, अभियुक्तों का वेरिफिकेशन कराया गया था. उनके मकान मालिक और पुलिस ने इस बात की पुष्टि की है. अभियुक्त मूल रूप से बिहार के रहने वाले हैं और क़रीब 10-12 साल से इलाक़े में रह रहे हैं.

डीसीपी का कहना था कि वो ख़ुद विशेष तौर पर इलाक़े पर नज़र बनाए रखती हैं. इस मामले में भी सभी अभियुक्तों को पकड़ लिया गया है.

(पीड़िता की पहचान गोपनीय रखने के कारण स्टोरी में कुछ नाम बदल दिए गए हैं.)

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