पश्चिम बंगालः क्या है अनुच्छेद 324 जिसका इस्तेमाल चुनाव आयोग ने किया

  • 16 मई 2019

चुनाव आयोग ने कोलकाता में अमित शाह की रैली के दौरान हुई हिंसा के बाद पश्चिम बंगाल की नौ लोकसभा सीटों पर गुरुवार रात 10 बजे के बाद चुनाव प्रचार बंद करने का आदेश दिया है.

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सामान्य स्थिति में इन सीट पर चुनाव प्रचार 17 मई की शाम पाँच बजे ख़त्म होता लेकिन पिछले 24 घंटे के भीतर राज्य में बढ़ते तनाव और हिंसा को देखते हुए चुनाव आयोग ने 19 घंटे पहले ही चुनाव प्रचार रोकने का फ़ैसला लिया.

चुनाव आयोग ने अनुच्छेद 324 का हवाला देते हुए पश्चिम बंगाल के एडीजी (सीआईडी) राजीव कुमार और प्रधान सचिव (गृह) अत्रि भट्टाचार्य को भी हटा दिया है.

चुनाव आयोग कोलकाता में हिंसा और ईश्वरचंद्र विद्यासागर की मूर्ति तोड़ने को दुखद बताया और उम्मीद जताई कि प्रदेश की सरकार दोषियों को जल्द पकड़ लेगी.

लेकिन भारतीय संविधान के जिस अनुच्छेद 324 का चुनाव आयोग ने इस्तेमाल किया है आख़िर वो क्या कहता है.

अनुच्छेद 324 के तहत चुनाव आयोग के अधिकार

  • संविधान के तहत राज्य के विधानमंडल, संसद और राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति के कार्यालयों के चुनाव के संचालन की निगरानी, चुनाव से जुड़े दिशा निर्देश और चुनाव के नियंत्रण का काम चुनाव आयोग करता है.
  • चुनाव आयोग में मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य चुनाव आयुक्तों की तय संख्या होती है, जिसे राष्ट्रपति समय-समय पर तय कर सकता है. और मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति का कानून संसद में बनता है जिसपर राष्ट्रपति की मुहर लगती है.
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  • संसद द्वारा बनाए गए किसी भी कानून के प्रावधानों के अधीन, चुनाव आयुक्तों और क्षेत्रीय आयुक्तों की सेवा और कार्यकाल राष्ट्रपति की नियुक्ति के बाद बदले नहीं जा सकते. मुख्य चुनाव आयुक्त को उनके पद से हटाने के लिए उसी प्रक्रिया का पालन करना होगा जो देश के मुख्य न्यायधीश पर लागू होता है.
  • किसी भी चुनाव आयुक्त और क्षेत्रीय चुनाव आयुक्त को मुख्य चुनाव आयुक्त के सलाह के बिना पद से हटाया नहीं जा सकता.
  • राष्ट्रपति, या किसी राज्य के राज्यपाल, जब चुनाव आयोग द्वारा अनुरोध किया जाता है, तो एक अतिरिक्त चुनाव आयोग या एक क्षेत्रीय आयुक्त चुनाव आयोग को उपलब्ध करा सकते हैं, जो कि चुनाव आयोग द्वारा दिए गए कामों का निर्वहन करता है.

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