बिहार की सभी 40 सीटों पर एनडीए की जीत पक्की है: भूपेंद्र यादव

  • 17 मई 2019
भूपेंद्र यादव

बिहार में बीजेपी-जेडीयू-लोजपा गठबंधन की कितनी सीटों पर चुनाव जीतेगी, इस सवाल पर भारतीय जनता पार्टी के महासचिव और बिहार एवं गुजरात राज्य के प्रभारी भूपेंद्र यादव ने बीबीसी हिंदी से ख़ास बातचीत में कहा है कि एनडीए गठबंधन 40 की 40 सीटों पर जीत रही हैं.

चुनाव प्रचार ख़त्म होने से एक दिन पहले पटना साहिब लोकसभा सीट से चुनाव लड़े रहे रविशंकर प्रसाद के लिए बख़्तियारपुर में चुनावी सभा को संबोधित करने से पहले भूपेंद्र यादव ने बीबीसी हिंदी से बातचीत में कई सवालों के जवाब दिए.

सवाल- अब चुनाव का आखिरी चरण बचा है, छह चरण के चुनाव के बाद आपका आकलन क्या है, क्या फ़ीडबैक मिल रहा है?

बिहार में हमारा गठबंधन है, बीजेपी- जेडीयू-लोकजनशक्ति पार्टी मजबूती से काम कर रहा है. बिहार की 40 की 40 सीटों पर जनता का आशीर्वाद इसे मिलने वाला है.

सवाल- बिहार की बात पर आएंगे लेकिन देश भर से क्या रूझान मिल रहे हैं. कितनी सीटें आने की उम्मीद हैं?

भारतीय जनता पार्टी की सीट पिछली बार से ज्यादा सीट आएगी, गठबंधन भी पिछली बार से ज्यादा सीट मिल पाएगी.

इमेज कॉपीरइट Getty Images

सवाल- कई आकलन आ रहे हैं जिसके मुताबिक कहा जा रहा है कि बीजेपी बहुमत से पीछे रह जाएगी, ऐसे में क्या अलायंस बढ़ाने की बात हो रही है.

देखिए अभी तक तो ऐसा कोई अधिकृत सर्वेक्षण आया नहीं है. चुनाव का सातवां चरण भी बाकी है. हमारे पास स्थानीय नेताओं और संगठन की तरफ से जो फीडबैक आ रहा है, मीडिया की जो रिपोर्ट भी रही है, उसके मुताबिक हम निश्चिंत है कि गठबंधन को पिछली बार से ज्यादा सीटें आ रही हैं.

सवाल- अगर किन्हीं वजहों से बहुमत तक नहीं पहुंच पाते हैं तो आपके नए साझेदार कौन हो सकते हैं?

जवाब- अगर का सवाल ही नहीं है क्योंकि पूर्ण बहुमत बीजेपी को मिल रहा है, गठबंधन को पहले से ज्यादा सीटें मिल रही है.

सवाल- बिहार की रणनीति बनाते वक्त, तीन सबसे अहम बातें जिसका आपना ध्यान रखे हैं?

बिहार में हमारी पार्टी एक लंबे समय से जनता दल यूनाइटेड के साथ स्वभाविक गठबंधन में चल रही है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी की संकल्पना, उनका विषय, गरीबों के लिए कल्याणकारी योजना और बिहार के सामाजिक समीकरण को ध्यान में रखा है.

सवाल- सामाजिक समीकरण की बात कर रहे हैं तो महागठबंधन के नेता आरक्षण और संविधान को एक बड़ा मुद्दा बना रहे हैं, उनका कहना है कि आरक्षण को लेकर बीजेपी गंभीर नहीं है.

जनता इसको समझ रही है, जब वे कहते हैं कि संविधान खतरे में है तो उसका मतलब है कि उनका परिवार ख़तरे में हैं. परिवार का अस्तित्व ख़तरे में है. उनके लिए संविधान कोई संकल्पना और प्रतिबद्धता का विषय नहीं है, निजी अभियान का विषय है.

बार-बार पूछ रहे हैं पिछड़े वर्ग के लिए संवैधानिक आयोग बनाने के लिए जब कांग्रेस विरोध कर रही थी, तब ये उनके साथ थे. पिछड़े वर्ग का संवैधानिक आयोग की हानडिक कमेटी की रिपोर्ट तो मनमोहन सिंह के समय में थी, तब क्यों नहीं लागू कराया.

इमेज कॉपीरइट Getty Images

एससी-एसटी-ओबीसी आरक्षण को लेकर हमारे नेताओं ने हमेशा कहा है कि उसे जारी रखेंगे. इसके अलावा सामान्य वर्ग में गरीबी के लिए आरक्षण दिया है तो आरजेडी क्यों विरोध कर रही है.

और कौन बताएगा इनका संविधान. शाहाबुद्दीन के परिवार को टिकट देंगे, बाकी बाहुबलियों को टिकट देंगे ये लोग संविधान पढ़े हुए लोग हैं क्या है, इनकी कथनी और करनी में कोई विश्वसनीयता बची नहीं है.

सवाल- बाहुबली तो आपकी पार्टी में भी हैं, टिकट देते वक्त हर पार्टी जीतने वाले उम्मीदवार का ध्यान रखती है

आज आप ये देखिए कि राष्ट्रीय जनता दल को जो सजा मिली है, वो भ्रष्टाचार के चलते मिली है, सुशासन के चलते नहीं.

सवाल- आरजेडी का कहना है कि उन्हें फंसाया गया है, बाकी लोग बेल पर हैं वो जेल में हैं.

उनके पिता के खिलाफ़ शिकायत करने वाले शिवानंद तिवारी तो उनकी पार्टी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष हैं. जो शरद यादव कहा करते थे कि उन्होंने लालू यादव को जेल भेजवाया है, वे तो उनके उम्मीदवार हैं. वे शिवानंद तिवारी से उपाय क्यों नहीं पूछ लेते हैं.

सवाल- आरजेडी को अगर छोड़ भी दें, तो पांच साल पहले मोदी जी ने सबका साथ सबका विकास के नाम पर जो राजनीति शुरू की थी, वह चुनाव आते तक पाकिस्तान को घर में घुसकर मारेंगे और राष्ट्रवाद तक पहुंच गई है. वे सारे मुद्दे पीछे छुट गए क्या?

ऐसा बिलकुल नहीं है, किसानों की दोगुनी आय के लिए क्या क्या किया ये बिलकुल बताया है, देश के आधारभूत ढांचे के विकास के लिए क्या क्या किया है, ये भी बताया है. देश बड़ी अर्थव्यस्था बने, दुनिया की पांच बड़ी अर्थव्यवस्था में आए हैं, हमेशा बताया है.

प्रशासनिक सुधार, समावेशी विकास के बारे में बताया है.

राष्ट्रवाद और विकास कोई अलग अलग चीजें नहीं है, समानांतर चलने वाली चीजें, एक दूसरे की पूरक हैं. मैं तो ये भी कहता हूं कि राष्ट्रवाद विकास के इंजन के रूप में भी काम करती हैं.

इमेज कॉपीरइट Facebook

सवाल- लेकिन रोजगार का मुद्दा हो, किसानों का मुद्दा हो, शासन व्यवस्था की बात हो, ये सब मुद्दे कहां है.

पहले हिस्से में हमने कहा कि मुद्रा के तहत 17 करोड़ बांटे अब 30 करोड़ बांटेंगे. हमने उच्च शिक्षा के अनुपात को बढ़ाने की बात कही है. नौजवानों को 50 लाख रूपये ऋण की बात कही है. हमने कौशल विकास की बात कही है. स्टार्टअप की बात कही है.

किसानों के मुद्दे पर कौन से 75 कदम समन्वित रूप से किए गए, ये बात हमने की है.

अब आते हैं सुशासन पर, आपको मालूम है कि बिहार में जब तक लालू जी का शासन काल था, 1990 से 2005, उस दौर में पंचायत, विधानसभा और लोकसभा चुनाव के दौरान 691 लोगों की मौत हुई थी.

2005 से 2015 तक, केवल एक व्यक्ति की मौत हुई थी. आप रात में 10 बजे गया में चुनाव प्रचार कर रात में पटना लौट रहे हैं. उस जमाने में गया से पटना तक लोग शाम में नहीं चलते थे, अब हर कोई चल रहा है, ये सुशासन नहीं तो क्या है.

सवाल- बिहार में बीजेपी का जो कोर वोट बैंक है, उसके नेता हैं, उनमें थोड़ी नाराजगी दिख रही है. शायद प्रतिनिधित्व का एक मसला रहा होगा.

भारतीय जनता पार्टी से किसी की कोई नाराजगी नहीं है. हम देश के सभी वर्गों की पार्टी हैं. हम सभी के प्रतिनिधित्व की बात करते हैं. किसी का प्रतिनिधित्व कम रहेगा तो हम उसकी भरपाई करेंगे. नाराज कोई नहीं है.

सवाल- 23 मई को क्या होगा, आप लोग किन तैयारियों में जुटे हैं.

हम लोग तो फिलहाल 19 के चुनाव की तैयारियों में जुटे हैं. 23 मई को जब परिणाम आएगा तो बिहार की 40 सीटों पर एनडीए गठबंधन जीतेगा.

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)

बीबीसी न्यूज़ मेकर्स

चर्चा में रहे लोगों से बातचीत पर आधारित साप्ताहिक कार्यक्रम

सुनिए

संबंधित समाचार