प. बंगाल में छह महीने में सत्ता में आ जाएगी BJP: राष्ट्रीय सचिव राहुल सिन्हा

  • 22 मई 2019
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भारतीय जनता पार्टी ने दावा किया है कि वह पश्चिम बंगाल में दहाई का आंकड़ा पार करके सबसे बड़े दल के रूप में उभरेगी.

भाजपा के राष्ट्रीय सचिव और पश्चिम बंगाल में पार्टी के प्रमुख नेताओं में से एक राहुल सिन्हा ने बीबीसी से बात करते हुए यह भी कहा कि केंद्र में भाजपा सरकार बनने के छह महीनों के भीतर ही प्रदेश में विधानसभा चुनाव होंगे और बीजेपी सत्ता में आ जाएगी.

राष्ट्रीय से लेकर स्थानीय चैनलों तक सबने बंगाल में बीजेपी की बंपर कामयाबी का दावा किया है. तमाम एग्ज़िट पोल्स में बीजेपी को प्रदेश में दस से ज़्यादा सीटें मिलने का दावा किया गया है.

लेकिन मुख्यमंत्री और टीएमसी अध्यक्ष ममता बनर्जी ने कहा है, "मैं एग्ज़िट पोल की अफ़वाह पर भरोसा नहीं करती."

वर्ष 2009 के लोकसभा चुनावों में बीजेपी को महज़ छह फीसदी वोट मिले थे जो वर्ष 2014 के चुनावों में तीन गुना बढ़ कर लगभग 17 फीसदी तक पहुंच गए.

Image caption भाजपा सचिव राहुल सिन्हा

'ममता ने दिए हमें मुद्दे'

अपनी रणनीति पर बात करते हुए राहुल सिन्हा कहते हैं कि प्रदेश में भाजपा ने पहले बूथ पर ध्यान लगाया और फिर संगठन का विस्तार किया.

वह कहते हैं, "इस चुनाव में तृणमूल कांग्रेस का सर्वनाश होने जा रहा है और इसका कारण ममता बनर्जी ख़ुद हैं. उन्होंने ही हमें ढेर सारे मुद्दे दिए."

वह कहते हैं कि संगठन से ही सब कुछ नहीं होता, जनता को लुभाने के लिए मुद्दों की ज़रूरत होती है. वह आरोप लगाते हैं, "ममता बनर्जी ने हिंदू-मुसलमान का कार्ड खेलकर विभाजन पैदा किया और हिंदुओं के मन में भय पैदा कर दिया."

'हम क्या बम लेकर जुलूस निकाल रहे हैं'

हालांकि तृणमूल कांग्रेस और दूसरे दल ये आरोप लगाते हैं कि भाजपा प्रदेश में हिंदू अतिवाद को बढ़ावा दे रही है.

इस आरोप को ख़ारिज़ करते हुए राहुल सिन्हा कहते हैं, "हम लोगों ने कुछ नहीं किया. हमने कोई कार्ड नहीं खेला. उन्होंने जो खेला, हमने उसे जनता के बीच उजागर किया."

तलवार लेकर जुलूस निकाले जाने के सवाल पर वह कहते हैं कि ऐसे जुलूस पहले भी होते थे. वह आरोप लगाते हैं, "हमने कोई बंदूकें या बम लेकर जुलूस निकाला क्या? बम लेकर तो ममता जी के लोग निकालते हैं."

वह कहते हैं, "ममता बनर्जी ने दुर्गा पूजा बंद करके मुहर्रम का जुलूस निकलवाया. क्या यह सांप्रदायिकता नहीं है?"

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हिंसा का दोषी कौन?

वह स्वीकार करते हैं कि यहां से भाजपा को एक मुद्दा मिला. इसके अलावा वह सारदा घोटाले का भी ज़िक्र करते हैं. वह कहते हैं कि सिर्फ़ सांप्रदायिकता मुद्दा नहीं है बल्कि टीएमसी की 'विनाशकारी नीतियां' मुद्दा हैं.

हाल ही में ख़त्म हुए मतदानों के बीच पश्चिम बंगाल से हिंसा की ख़बरें भी आती रहीं. यहां तक कि आख़िरी चरण में चुनाव प्रचार को प्रचार अभियान की समयसीमा तक घटानी पड़ी.

चुनावी हिंसा का दोष तृणमूल कांग्रेस पर लगाते हुए भाजपा नेता राहुल सिन्हा कहते हैं कि हिंसा की एक भी घटना भाजपा कार्यकर्ताओं की ओर से नहीं हुई.

वह कहते हैं, "आरोप तो कोई भी लगा सकता है. सरकार और पुलिस ममता बनर्जी की है. वे आरोप साबित तो करें. सभी मस्तान गुंडे और शस्त्रधारी ममता बनर्जी के साथ हैं. वही लोग लोगों को मार रहे हैं."

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वामपंथी कार्यकर्ता भाजपा के साथ?

क्या पश्चिम बंगाल के वामपंथी कार्यकर्ताओं ने इस बार भाजपा को समर्थन दिया है?

इस सवाल पर राहुल सिन्हा कहते हैं, "वामपंथियों में जो गुंडा तत्व थे वो पहले ही टीएमसी की तरफ़ चले गए थे. बाक़ी लोग जो निराश होकर बैठे थे, वे हमारे साथ आने लगे. तृणमूल कांग्रेस को स्थापित करने वाले कई लोग भी हमारे साथ आए हैं. मोदी जी का प्रगति का मार्ग तो जादू की तरह काम कर ही रहा है बल्कि ममता जी का विनाश का मार्ग भी उनके विनाश के लिए जादू की तरह काम कर रहा है. इसीलिए भाजपा को पश्चिम बंगाल में भयंकर सफलता मिलने वाली है."

वह मानते हैं कि पश्चिम बंगाल में उनके लिए सिर्फ़ तृणमूल कांग्रेस ही एक चुनौती है. कांग्रेस की लड़ाई बचने की और सीपीएम की लड़ाई ज़िंदा रहने की है, जबकि भाजपा जीतने की लड़ाई लड़ रही है.

पश्चिम बंगाल में कुल 42 लोकसभा सीटें हैं जिनमें से 34 पर अब तक ममता बनर्जी की अगुवाई वाली तृणमूल कांग्रेस काबिज़ थी, जबकि भाजपा के पास सिर्फ़ दो सीटें थीं.

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