वो सीटें जहां कांग्रेस ने सपा-बसपा का खेल बिगाड़ा

  • 25 मई 2019
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लोकसभा चुनावों से पहले और नतीजों से पहले तक इस बात की चर्चा थी कि अगर यूपी में कांग्रेस सपा-बसपा-रालोद के महागठबंधन में शामिल होती तो नतीजों पर असर पड़ सकता था.

लेकिन अब जब नतीजे आ चुके हैं और यूपी की 80 सीटों में से बीजेपी 62 और उसके सहयोगी अपना दल ने 2 सीटें जीत ली हैं.

बहुत उम्मीद लगाए सपा और बसपा गठबंधन को कुल 15 सीटें मिल पाईं और कांग्रेस अपनी पहले की टैली से भी नीचे 01 पर सिमट गई.

महागठबंधन और कांग्रेस के अलग अलग लड़ने से उन सीटों पर प्रभाव पड़ा जहां उनके जीतने की संभावना अधिक थी.

अगर कांग्रेस का साथ मिलता तो महागठबंधन को कम से कम पांच सीटों पर बढ़त हासिल थी.

जबकि शिवपाल सिंह यादव और सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी ने एक एक सीटों पर महागठबंधन को नुकसान पहुंचाया.

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मार्जिन से अधिक कांग्रेस को मिले वोट

सबसे बड़ा उदाहरण पश्चिमी उत्तर प्रदेश की मेरठ सीट है, जहां से बीजेपी के राजेंद्र अग्रवाल ने बसपा उम्मीदवार हाजी ममोहम्मद याक़ूब को 4,729 वोटों से हराया.

राजेंद्र अग्रवाल को 5,86,184 (48.19%) जबकि हाजी याक़ूब को 5,81,455 (47.8%) वोट मिले.

यहां से कांग्रेस पार्टी के उम्मीदवार हरेंद्र अग्रवाल को 34,479 (2.83%) वोट मिले. यानी कांग्रेस समेत महागठबंधन का वोट प्रतिशत 50% से अधिक था.

पूर्वी उत्तर प्रदेश की संतकबीर नगर से बीजेपी के प्रवीन कुमार निषाद ने बसपा के भीष्म शंकर को 35,749 वोटों से हराया.

यहां से निषाद को 4,67,543 (43.97%) जबकि भीष्म शंकर को 4,31,794 (40.61%) वोट मिले. यहां से कांग्रेस के उम्मीदवार भाल चंद्र यादव को 1,28,506 (12.08%) वोट मिले.

महागठबंधन और कांग्रेस के उम्मीदवार का संयुक्त वोट प्रतिशत 52.69 रहा.

पूर्वी उत्तर प्रदेश की एक और बहुचर्चित सीट सुल्तानपुर की रही जहां से केंद्रीय मंत्री मेनका गांधी का मुकाबला बीएसपी उम्मीदवार चंद्र भद्र सिंह से था.

संयुक्त वोट प्रतिशत बीजेपी से ज़्यादा

यहां जीत का अंतर 14,526 था जबकि यहां के कांग्रेस उम्मीदवार संजय सिंह को 41,681 वोट मिले.

मेनका गांधी को 4,49,196 (45.918%), चंद्र भद्र सिंह को 4,44,670 (44.45%) जबकि संजय सिंह को 41,681 (4.17%) वोट मिले. यानी गठबंधन और कांग्रेस का संयुक्त वोट प्रतिशत 48.62% रहा.

बदायूं सीट का हाल भी यही रहा यहां बीजेपी के संघमित्रा मौर्य को 5,11,352 (47.38%), समाजवादी पार्टी के धर्मेंद्र को 4,92,898 (45.59%) और कांग्रेस के उम्मीदवार सलीम इक़बाल शेरवानी को 51947 (4.88%) वोट मिले.

जीत का अंतर 18,454 रहा जबकि महागठबंधन और कांग्रेस का संयुक्त वोट प्रतिशत 50.47 रहा.

बलिया से बीजेपी के हरीश द्विवेदी ने क़रीबी मुकाबले में बसपा के राम प्रसाद चौधरी को 30,354 वोटों से हराया.

द्विवेदी को 4,71,162 (44.68%), चौधरी को 4,40,808 (41.88%) वोट मिले. जबकि कांग्रेस के उम्मीदवार राज किशोर सिंह को 86,9,20 (8.24%) वोट मिले.

यहां महागठबंधन और कांग्रेस का संयुक्त वोट प्रतिशत 50.12 रहा.

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सुहेलदेव पार्टी और शिवपाल से मिला झटका

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र के पास की सीट चंदौली में महागठबंधन का खेल सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी ने बिगाड़ा.

यहां से बीजेपी के महेंद्रनाथ पांडे को 5,10,733 (47.07%) और समाजवादी पार्टी के संजय सिंह चौहान को 4,96774 (45.79%) वोट मिले. जबकि सुहेलदेव पार्टी के रामगोविंद को 18,985 (1.75%) वोट मिले.

अगर सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी का साथ मिलता तो ये सीट महागठबंधन की होती.

एक मुकाबला और दिलचस्प रहा, वो था फ़िरोज़ाबाद का. यहां से बीजेपी के चंद्र सेन जादोन ने समाजवादी पार्टी के यादव परिवार के एक और बड़े नाम अक्षय यादव को 28,781 वोटों से हराया.

जादोन को 495819 (46.09%), अक्षय यादव को 467038 (43.41%) वोट मिले. यहां से अखिलेश यादव के चाचा शिवपाल सिंह यादव को 91869 (8.54%) वोट मिले.

चुनाव से ठीक पहले पारिवारिक कलह के बाद शिवपाल सिंह ने प्रगतिशील समाजवादी पार्टी (लोहिया) बनाई और इसी के टिकट से वो फ़िरोज़ाबाद से खड़े थे.

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181 वोटों से मिली जीत

यूपी में 29 सीटें ऐसी थीं जहां एक लाख से कम अंतर के वोटों से हार-जीत का फैसला हुआ.

सबसे कम अंतर मछलीशहर था जहां बीजेपी के भोलानाथ ने बसपा के त्रिभुवन राम को 181 वोटों के अंतर से हराया.

यूपी में जीत का सबसे बड़ा अंतर ग़ाज़ियाबाद से बीजेपी उम्मीदवार वीके सिंह का रहा, जो 5 लाख से अधिक अंतर से जीते.

फतेहपुर सीकरी से कांग्रेस के दिग्गज नेता और अभिनेता से नेता बने राजबब्बर को बीजेपी के राजकुमार चहर ने 4.95 लाख से अधिक मतों से हराया.

वाराणसी से प्रधानमंत्री नरेंद्र ने महागठबंधन के उम्मीदवार शालिनी यादव को 4.79 लाख से अधिक वोटों से हराया.

इसके अलावा अपने बयानों से चर्चा में आए साक्षी महाराज उन्नाव से 4 लाख से अधिक वोटों के अंतर से जीते.

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