क्या अब नहीं उठेगा VVPAT और EVM का मामला?

  • 24 मई 2019
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लोकसभा चुनाव के परिणाम आ चुके हैं और भारतीय जनता पार्टी ने 300 से ज़्यादा सीटें जीतकर पूर्ण बहुमत हासिल किया है.

लोकसभा की 542 सीटों पर हुए चुनाव के परिणाम 23 मई को जिस तरह आए उससे बिल्कुल स्पष्ट हो गया कि सरकार किसकी बनने जा रही है.

इस चुनाव में पहली बार VVPAT (वोटर वेरिफ़ियेबल पेपरऑडिट ट्रायल) का इस्तेमाल किया गया. मतगणना में वीवीपैट पर्चियों की भी गिनती और मिलान किया गया.

मतगणना पूरी होने के बाद वीवीपैट की पर्चियों का मिलान 23 मई की रात 11 बजे तक किया गया और चुनाव आयोग के अनुसार इसमें कोई गड़बड़ नहीं मिली.

मतगणना के पहले देशभर के कई हिस्सों में ईवीएम मिलने की खबर सामने आईं थीं. कई जगह कहा गया कि मशीनों में छेड़छाड़ की गई है. इसलिए वीवीपैट को लाया गया ताकि दोनों के वोटों की गिनती कर जांच की जा सके.

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चुनाव से पहले हर समय ईवीएम वीवीपैट के मिलान पर सवाल उठते रहे. विपक्ष इस बात पर कायम रहा कि ईवीएम वीवीपैट पर्चियों का मिलान हो ताकि यदि कोई गड़बड़ हो तो साफ़ हो जाए.

ईवीएम और वीवीपैट मिलान के लिए विपक्षी पार्टियां चुनाव आयोग से भी मिली और ये मुद्दा सुप्रीम कोर्ट भी ले जाया गया.

21 विपक्षी दलों ने सर्वोच्च न्यायालय में अर्ज़ी देकर मांग की थी कि प्रत्येक निर्वाचन क्षेत्र के 50 प्रतिशत वोटों को वीवीपैट के साथ मिलाया जाए. लेकिन चुनाव आयोग का कहना था कि पचास फ़ीसदी ईवीएम और वीवीपैट को मैच करने में कम कम पांच दिन लग जाएंगे जिससे नतीजे आने में देरी हो जाएगी.

सुप्रीम कोर्ट ने अपने फ़ैसले में कहा कि प्रत्येक लोकसभा क्षेत्र में पांच ईवीएम और वीवीपैट में पड़े वोटों की जांच की जाए.

चुनाव आयोग ने फ़ैसला किया कि प्रत्येक लोकसभा क्षेत्र से पांच-पांच वीवीपैट का चयन 'रैंडमली' यानी बिना किसी क्रम के किया जाएगा और ईवीएम और वीवीपैट के नतीजों को मैच किया जाएगा.

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इस काम के लिए हर काउंटिंग हॉल में वीवीपैट बूथ बनाया गया. किसी तरह के विवाद या तकनीकी रुकावट की स्थिति में ये रिटर्निंग ऑफ़िसर पर ज़िम्मेदारी थी कि वो चुनाव आयोग को इस बारे में तत्काल रिपोर्ट करे.

लोकसभा चुनाव में क़रीब 39.6 लाख ईवीएम और 17.4 लाख वीवीपीएटी मशीनें इस्तेमाल हुईं, जिनमें रिज़र्व मशीनें भी शामिल थीं.

पूर्व चुनाव आयुक्त एस वाई क़ुरैशी वीवीपैट के मिलान की जानकारी लगातार सोशल मीडिया पर अपडेट कर रहे थे.

उन्होंने बीबीसी से कहा कि अब वीवीपैट मामला और ईवीएम के साथ छेड़छाड़ का मुद्दा खत्म हो जाना चाहिए.

क़ुरैशी कहते हैं, ''20,000 से भी ज्यादा मतदान केंद्रों पर वीवीपैट की 'रैंडमली' यानी बिना किसी क्रम के जांच और मिलान किया गया जिसमें किसी भी तरह की गड़बड़ नहीं मिली. ये बहुत ही बड़ी सफलता है.''

हालांकि वो मानते हैं कि आंध्र प्रदेश में एक वीवीपैट का मिलान ईवीएम से सही नहीं बैठ रहा था, जिसका ज़िक्र उन्होंने अपने ट्विटर अकाउंट पर भी किया है.

इस मामले में बाद में जांच की गई और पता चला कि पहले हुई भूल को बाद में सही कर लिया गया और ये प्रक्रिया एक दम साफ़ और विश्वसनीय हैं.

एसवाई क़ुरैशी के मुताबिक़, '' ईवीएम से वोटों की गिनती के बाद वीवीपैट से मिलाया जाता है. यदि कोई गड़बड़ निकली या ईवीएम वीवीपैट की पर्चियों से मिलान सही नहीं होता तो चुनाव आयोग को इसकी सूचना तुरंत दी जाती है और आगे की कारवाई की जाती है या वहां चुनाव दुबारा करवाने की ज़रूरत होती है वहां दोबारा चुनाव कराए जाते हैं."

क़ुरैशी कहते हैं कि हर लोकसभा क्षेत्र से पांच-सात रैंडमली मतदान केंद्रों की वीवीपैट पर्चियों का मिलान किया गया यानी प्रत्येक संसदीय क्षेत्र से लगभग 35 वीवीपैट की जांच की गई. ऐसे में आंध्र प्रदेश को हटा दें तो कहीं कोई गड़बड़ नहीं निकली.

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आम आदमी पार्टी के प्रवक्ता सौरभ भारद्वाज ने चुनाव से पहले कई बार चुनौती दे चुके हैं कि ईवीएम को हैक किया जा सकता है. उन्होंने इसके लिए मई 2017 में एक लाइव डेमो भी दिया.

लाइव डेमो में सौरभ भारद्वाज की मुख्य बातें

  • विधानसभा में 'ईवीएम हैकिंग' का डेमो दिया
  • कहा सीक्रेट कोड से मशीन हैकिंग संभव
  • चुनाव से पहले मशीन मिल जाए तो गुजरात चुनाव में जीतने का दावा

सौरभ भारद्वाज ने कहा था कि सिर्फ़ मदरबोर्ड को बदलने भर से मशीनों में छेड़छाड़ की जा सकती है.

उन्होंने चुनौती देते हुए कहा था, "मैं चैलेंज करता हूँ कि हमें गुजरात चुनाव से पहले सिर्फ़ तीन घंटे के लिए ईवीएम मशीनें दे दें, उनको वोट नहीं मिलेगा. कुछ लोग शायद विदेशी ताकतों के हाथों में खेल रहे हैं."

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बीबीसी ने भारद्वाज से जानना चाहा कि जब लोकसभा चुनाव के नतीजे स्पष्ट रूप से आ चुके हैं जिसमें वीवीपैट में किसी तरह की कोई गड़बड़ न मिलने पर वे क्या कहना चाहेंगे.

उन्होंने सबसे पहले पीएम मोदी को बधाई दी और कहा, ''जो भी जनादेश आया है हम उसका सम्मान करते हैं और मोदी जी को उसकी बधाई देते हैं.''

भारद्वाज ने कहा, ''ये एक तकनीकी मामला है. इसके ऊपर किसी जांच और विश्लेषण के बाद ही कुछ कहा जा सकता है. लेकिन अगर हमें मौका मिलेगा वीवीपैट को और उसके आर्किटेक्चर देखने का तो इसके ऊपर ज़रूर टिप्पणी की जा सकती है.''

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भारद्वाज का कहना है, ''मशीनी सुधार होना अच्छी बात है लेकिन पूरे संसार के विकसित देश पेपर बैलेट पर विश्वास करते हैं. मसलन, अमरीका, जापान, जर्मनी, इसराइल. ये सभी देश इस तकनीति पर विश्वास नहीं करते क्योंकि बहुत कुछ मशीन के अंदर हो रहा होता है. उसके अंदर क्या चल रहा है ये किसी को देखने को मिलता नहीं है, इसे एक तरह से ब्लैक बॉक्स कहा जा सकता है. हमारे पास अभी इस तरह की कोई जानकारी नहीं और न ही कोई रिसर्च है इसलिए कोई टिप्पणी करना सही नहीं है.''

वहीं पूर्व चुनाव आयुक्त क़ुरैशी का मानना है कि अब विपक्षी पार्टियों को वीवीपैट मामले पर शांत बैठ जाना चाहिए क्योंकि ईवीएम के साथ वीवीपैट के जुड़ने से इसकी व्यवस्था और दुरुस्त हो गई.

क़ुरैशी कहते हैं कि विपक्ष के बार-बार सवाल उठाने पर ही वीवीपैट को लाया गया ताकि विश्वसनीयता बनी रहे लेकिन जांच में कुछ आया नहीं.

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