कश्मीर : 'मोस्ट वॉन्टेड' मूसा की मौत पर प्रदर्शन क्यों?

  • 25 मई 2019
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Image caption ज़ाकिर मूसा

ज़ाकिर मूसा को कश्मीर घाटी का 'मोस्ट वॉन्टेड' चरमपंथी माना जाता था.

भारत प्रशासित कश्मीर में अल क़ायदा से संबद्ध जिहादी संगठन अंसार ग़ज़ाल अल हिंद (एजीएच) के नेता ज़ाकिर मूसा की सुरक्षा बलों के साथ मुठभेड़ में मौत के बाद घाटी के कुछ हिस्सों में फिर से प्रदर्शनों का दौर शुरू हो चुका है.

भारतीय सेना के अनुसार दक्षिण कश्मीर के त्राल ज़िले में 23 मई को हुई मुठभेड़ में मूसा की मौत हुई. वो एक घर में घिर गए थे.

जुलाई 2017 में अल-क़ायदा समर्थक एक मीडिया आउटलेट ने मूसा के नेतृत्व में घाटी में एक जिहादी संगठन बनने की ख़बर दी थी.

हालांकि ये संगठन घाटी में पहले से मौजूद कई सारे चरमपंथी संगठनों के बीच अपना प्रभाव बनाने के लिए जूझता रहा.

इससे पहले मूसा का संबंध हिज़्बुल मुजाहिदीन संगठन से था. रिपोर्टों के मुताबिक 2016 में सुरक्षा बलों के साथ मुठभेड़ में इस संगठन के मुखिया बुरहान वानी की मौत के बाद मूसा ने ही इसका नेतृत्व किया.

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'कश्मीरी नेताओं का सिर कलम करने की धमकी'

ज़ाकिर मूसा का असली नाम था ज़ाकिर राशिद भट. पढ़े-लिखे परिवार से संबंध रखने वाले मूसा ने 2013 में चंडीगढ़ के एक कॉलेज से इंजीनियरिंग की पढ़ाई बीच में ही छोड़ दी थी.

इसके बाद मूसा का जुड़ाव कश्मीर में हिज़्बुल मुजाहिदीन से हुआ. जल्द ही वह बुरहान वानी धड़े के प्रमुख सदस्य बन गए. यह धड़ा उन युवा लड़ाकों का था जिन्होंने कश्मीरियों की नई पीढ़ी को सोशल मीडिया के ज़रिये हथियार उठाने के लिए प्रेरित किया.

आठ जुलाई 2016 को सुरक्षा बलों के साथ मुठभेड़ में वानी की मौत हुई और उसके बाद मीडिया ने मूसा को कश्मीरी चरमपंथियों का नया चेहरा बताया. बहुत सी रिपोर्टों में बिना किसी प्रामाणिक आधार के वानी का उत्तराधिकारी बताते हुए उन्हें हिज़्बुल मुजाहिदीन का नया नेता क़रार दिया गया.

मगर 13 मई 2017 को मूसा ने इस संगठन से उस समय नाता तोड़ लिया जब उसने मूसा के एक बयान का समर्थन करने से इनकार कर दिया. मूसा ने अलगाववादी नेताओं से कहा था कि अगर उन्होंने कश्मीर मुद्दे को धार्मिक मसले के बजाय 'राजनीतिक' कहा तो उनका सिर कलम कर दिया जाएगा.

मूसा ने ये चेतावनी उस समय दी थी जब 8 मई को अलगाववादी नेताओं ने कहा था कि कश्मीर में चल रहे संघर्ष का तथाकथित इस्लामिक स्टेट समूह या अल-क़ायदा से कोई मतलब नहीं है.

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ख़ुद को कहा 'अल्लाह का सिपाही'

मूसा ने हिज़्बुल की 'स्वतंत्रता या पाकिस्तान के साथ विलय' की नीति से हटते हुए अल-क़ायदा के प्रति समर्थन जताया और कहा, ''मैं एक धर्मनिरपेक्ष देश की स्थापना के लिए अपना बलिदान नहीं दूंगा."

26 जुलाई 2017 को अल क़ायदा के समर्थक एक मीडिया संस्थान- दि ग्लोबल इस्लामिक मीडिया फ्रंट (जीआईएमएफ़) ने मेसेजिंग ऐप टेलिग्राम के माध्यम से एक बयान जारी किया, जिसमें कश्मीर घाटी में अंसार ग़ज़ावत-उल-हिंद नाम के नए जिहादी संगठन का ऐलान किया. इसमें कहा गया था ये संगठन वानी के साथियों ने बनाया है और मूसा के नेतृत्व में काम करेगा.

एजीएच के नेता के तौर पर मूसा ने दोहराया कि कश्मीर मसले के हल के लिए जिहाद ही एकमात्र रास्ता है और इस्लामिक शरिया क़ानून लागू करने के अलावा और कोई भी समझौता या फॉर्मूला स्वीकार न करने की बात कही.

मूसा ने कहा था, "न तो मैं किसी संगठन का कमांडर हूं न मुखिया. मैं अल्लाह का सिपाही हूं जो आपको भारत के कुटिल इरादों से आगाह करना चाहता हूं."

यह बात वानी की मौत के बाद सोशल मीडिया में जारी किए गए वीडियो में कही गई थी.

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जब हिज़्बुल से तोड़ा नाता

12 मई 2017 को वॉट्सऐप पर जारी किए गए एक ऑडियो मेसेज में मूसा ने कहा था, "अगर हुर्रियत को राजनीति करनी है तो उसे हमारे रास्ते में कांटा नहीं बनना चाहिए वरना हम उनके सिर कलम कर देंगे. अगर आप हमारे रास्ते का कांटा बनेंगे तो हम काफ़िरों को छोड़कर पहले आपको मारेंगे. ये एक इस्लामिक संघर्ष है."

हिज़्बुल मुजाहिदीन और अन्य जगहों से आलोचना होने के बाद 12 मई को वॉट्सऐप पर जारी दूसरे ऑडियो में मूसा ने कहा, "आज के बाद मेरा हिज़्बुल मुजाहिदीन से कोई नाता नहीं. मेरा मतलब हुर्रियत के सभी नेताओं का सिर कलम करना नहीं था. सिर्फ़ उनका जो धर्मनिरपेक्षता के लिए काम कर रहे हैं या इसका समर्थन करते हैं."

समूह के मीडिया आउटलेट अल-हूर ने 18 अगस्त 2018 को मेसेजिंग ऐप टेलिग्राम पर वीडियो जारी किया था. उसमें मूसा ने कहा था, "तुम्हारी समस्याओं का हल संयुक्त राष्ट्र के प्रस्तावों में नहीं है बल्कि इसका हल क़ुरान में साफ़-साफ़ बताया गया है और वह है जिहाद."

अप्रैल 2019 को जारी किए गए ऑडियो में मूसा ने भारत के लोगों से चुनावों में हिस्सा न लेने की अपील की थी और साथ ही कहा था,"पाकिस्तान और भारत, दोनों अमरीका के ग़ुलाम हैं और कश्मीर में जिहाद को कमज़ोर करना चाहते हैं. अगर ऐसा होता है तो क़यामत के दिन हमें इसके लिए(बचाने में नाक़ामयाब रहने के लिए) ज़िम्मेदार माना जाएगा."

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पुलिस ने क्या कहा?

जम्मू कश्मीर पुलिस ने 24 मई को ट्वीट किया, "दक्षिण कश्मीर में आतंकवाद के ख़िलाफ बड़़ी क़ामयाबी के तहत जम्मू-कश्मीर पुलिस और सुरक्षा बलों ने बुरहान समूह के इकलौते आतंकवादी और अंसार ग़ज़वातुल हिंद के संस्थापक और मुख्य कमांडर ज़ाकिर राशिद भट को ख़त्म कर दिया है."

भारत प्रशासित कश्मीर के एक पुलिस अधिकारी इम्तियाज़ हुसैन ने 24 मई को "निजी तौर" पर लिखा है, "मूसा ने अल-क़ायदा/आईएसआईएस की ख़तरनाक विचारधारा का प्रतिनिधित्व किया जो मानवता के लिए ख़तरा है."

भारतीय जनता पार्टी के महासचिव राम माधव ने ट्वीट किया है, "ज़ाकिर मूसा कश्मीर घाटी में 18 दिनों के अंदर ख़त्म किया गया 18वां आतंकवादी है. इस साल 89वां. हम देश में चुनावों में व्यस्त थे मगर हमारी जम्मू-कश्मीर पुलिस और सुरक्षा बल घाटी को आतंकवादियों से मुक्त करवाने में व्यस्त थे. इन्हें सलाम है."

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