मोदी-राहुल का मज़ाक़ उड़ाने के लिए हुई ट्रेन में खिलौने बेचने वाले अवधेश दुबे की गिरफ़्तारी?

  • 1 जून 2019
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ट्रेन में मज़ाकिया अंदाज़ में खिलौने बेचने वाले एक शख़्स का वीडियो वायरल होने के बाद पुलिस ने उसे गिरफ़्तार कर लिया है.

अवधेश दुबे नाम के इस शख़्स का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया था, जिसमें वह राजनीतिक मसलों पर हंसी-मज़ाक करते हुए ट्रेन में खिलौने बेचते दिख रहे थे. उनके चुटकुलों में कई राजनीतिक संदर्भ थे और भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल, कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी और सपा नेता मुलायम सिंह यादव का नाम भी लिया गया था.

शनिवार को खबर आई कि अवधेश को रेलवे पुलिस ने गिरफ़्तार कर लिया है. इसकी वजह समझने के लिए बीबीसी हिंदी ने सूरत रेलवे पुलिस से संपर्क किया.

रेलवे पुलिस इंस्पेक्टर ईश्वर यादव ने बताया कि अवधेश को गिरफ़्तार किया गया है, लेकिन उन्हें किसी वायरल वीडियो के मामले में नहीं बल्कि उन्हें ट्रेन में अनाधिकृत रूप से सामान बेचने के मामले में गिरफ़्तार किया गया है. शुक्रवार सुबह लगभग 9.30 बजे उन्हें सूरत-वापी रूट की ट्रेन में सामान की बिक्री करते पकड़ा गया.

उन्हें रेलवे कोर्ट में पेश किया गया जहां से उन्हें 10 दिन के लिए जेल भेज दिया गया है.

इंस्पेक्टर यादव ने साफ़ किया कि ये बेहद आम मामला है. उन्होंने कहा, "हम हर रोज़ चार-पांच लोगों की गिरफ़्तारी करते हैं, जिन्हें 30 दिन तक की सज़ा होती है."

जब हमने ये पूछा कि क्या इस गिरफ़्तारी का उनके वायरल वीडियो से कोई ताल्लुक है तो इंस्पेक्टर से बताया कि उन्होंने अब तक ऐसा कोई वीडियो नहीं देखा है.

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क्या है वायरल वीडियो में

इसी हफ्ते एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था जिसमें अवधेश दुबे कार्टून किरदार डोरेमॉन से लेकर, राहुल गांधी, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अरविंद केजरीवाल जैसे नेताओं पर मज़ाकिया टिप्पणी करते हुए खिलौने बेचता दिख रहा है. सोशल मीडिया पर इस वीडियो को लाखों बार देखा जा चुका है और कुछ लोग अवधेश को बेहतरीन 'सेल्समैन'बता रहे हैं.

इस वीडियो में इन पंचलाइन के इस्तेमाल से अवधेश खिलौने बेच रहे हैं.

  • नेता हो तो मोदी जैसा, मुलायम तो तकिया भी होता है.
  • जियो का डेटा और सोनिया का बेटा, दोनों सिर्फ मनोरंजन के काम आते हैं. 2024 तक ख़ुद इटली नहीं गए तो यहीं पर इडली बेचना पड़ेगा.
  • लेडीज़ और औरत में अंग्रेज़ी और हिंदी का फ़र्क है. जैसे बराक ओबामा और मोदी में.
  • खिलौना चाहिए बेटा? उधर जाकर अच्छे से रोओ ना, पापा दिला देंगे.
  • और क्या चिपकाऊं साहब आपको?
  • मेरा नाम है अवधेश दुबे, देखे नहीं, पांच-छह जन तो इधर ही ले डूबे.
  • विजय माल्या के नाम में ही प्रॉब्लम था. विजय माल लिया.

अवधेश की गिरफ़्तारी की ख़बर आने के बाद सोशल मीडिया पर कई लोगों ने इसका विरोध किया.

स्टैंडअप कॉमेडियन कुणाल कामरा ने लिखा, "खिलौने बेचते हुए चुटकुले सुनाने वाले इतने मज़ेदार आदमी को गिरफ़्तार कर लिया गया है. दस दिन की जेल और 3500 रुपये का जुर्माना. क़ानून का इस्तेमाल हमेशा ग़रीब को डर के साए में रखने के लिए किया जाता है."

एक अन्य ट्विटर यूज़र @sherkhan007 ने लिखा, "अगर रोजगार दे नहीं सकते तो रोजगार छीनो भी मत."

नील जोशी नाम के ट्विटर यूज़र ने लिखा, "याद है कि प्रधानमंत्री मोदी ख़ुद ट्रेन में चाय बेचा करते थे, वह भी क़ानूनी तौर पर अवैध था. आप ट्रेन में सामान बेचने वालों को कैसे गिरफ़्तार कर सकते हो? थोड़ी तो करुणा दिखाइए."

इस मामले में अवधेश दुबे का परिवार मीडिया से ख़ासा नाराज़ है. हमने सूरत में ही रहने वाले अवधेश के चाचा संतोष दुबे से बात की. उनका कहना है कि ऐसा नहीं है कि वीडियो में सुनाए गए चुटकुलों की वजह से अवधेश को गिरफ़्तार किया गया है. उन्होंने कहा कि ट्रेन में सामान बेचना ग़ैरकानूनी तो है ही और इस तरह की धर-पकड़ होती रहती है.

उन्होंने कहा, "क़ायदे कानून को कोई टाल नहीं सकता. ग़लती तो हुई है. अगर मीडिया ये वीडियो इस तरह नहीं दिखाता तो शायद प्रशासन इतनी सख़्ती नहीं दिखाता. प्रशासन को लगा कि ये लोग रेलवे को मज़ाक़ समझ रहे हैं."

वह कहते हैं कि प्रशासन का काम ही बेचने वालों को पकड़कर केस बनाते रहना है और ऐसा बहुत लोगों के साथ हो चुका है.

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