राजस्थान कांग्रेस का घमासान थमने का नाम नहीं ले रहा है

  • 4 जून 2019
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राजस्थान में लोकसभा की सभी सीटें हारने के बाद सत्तारूढ़ कांग्रेस पार्टी में शुरू हुई अंतर्कलह थम नहीं रही है.

मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने भी अपनी ख़ामोशी तोड़ी है. उन्होंने एक टीवी चैनल के साथ बातचीत में कहा कि पराजय के लिए सभी ज़िम्मेदार हैं.

इसके साथ गहलोत ने जोधपुर का जिक्र आने पर कहा, 'प्रदेश कांग्रेस प्रमुख सचिन पायलट ने जोधपुर में जीत की ज़मानत दी थी, उन्हें जोधपुर सीट की ज़िम्मेदारी लेनी चाहिए.' इस पर पायलट ने कुछ भी कहने से इंकार कर दिया.

गहलोत का यह इंटरव्यू सामने आने के बाद मुख्यमंत्री ने ट्वीट कर कहा, "यह बात उन्होंने कुछ सवालों के जवाब में कही थी. लेकिन मीडिया का एक वर्ग इस बातचीत को संदर्भ से काट कर अनावश्यक मुद्दा बना रहा है."

राज्य में लोकसभा की 25 सीटें हैं. मगर कांग्रेस इनमें एक भी सीट नहीं जीत सकी. इसमें जोधपुर की सीट भी शामिल है. वहां गहलोत के पुत्र वैभव गहलोत पार्टी प्रत्याशी थे.

उधर राज्य के मुख्य विरोधी दल बीजेपी ने कहा है, "सत्तारूढ़ पार्टी के नेताओ की अंतर्कलह से राजकाज ठप हो गया और क़ानून व्यवस्था चरमरा गई है. बीजेपी हालात पर नजर रखे हुए है."

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बयान पर विवाद

मुख्यमंत्री गहलोत से इंटरव्यू करने वाले पत्रकार ने सचिन पायलट के उस बयान का हवाला दिया जिसमें प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष पायलट ने कहा था कि वैभव की जीत की वे ज़मानत देते हैं और वे जरूर जीतेंगे.

मुख्यमंत्री ने इसके उत्तर में कहा, "यह अच्छी बात है कि उन्होंने जीत की ज़मानत दी और 15 दिन पहले भी दोहराया था कि जोधपुर में पार्टी अच्छे मतों से जीतेगी. इस पर उन्हें इस सीट की ज़िम्मेदारी लेनी चाहिए."

इसके बाद गहलोत ने अपनी बात आगे बढ़ाते हुए कहा, "ज़िम्मेदारी राज्य कांग्रेस प्रमुख लें या सीएम, ज़िम्मेदारी तो सभी की होती है. अपने इस इंटरव्यू में गहलोत ने परिणाम के बाद बनी स्थिति पर सफाई भी दी लेकिन कहीं कही वे अपने विरोधियो को निशाने पर लेते भी नजर आए."

गहलोत के इस इंटरव्यू पर पायलट ने आश्चर्य व्यक्त किया. लेकिन इसके आगे कुछ भी कहने से इंकार कर दिया.

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चुनाव में करारी हार के बाद कुछ मंत्रियों की टिप्पणियों पर गहलोत ने कहा, "मंत्रियो को ग़लत ढंग से उद्धृत किया गया है. राजस्थान में कांग्रेस ने चुनाव से पहले कहा था कि पार्टी देखेगी कि राज्य सरकार के मंत्रियों के क्षेत्रो में पार्टी का प्रदर्शन कैसा रहता है और ज़िम्मेदारी तय कर कार्रवाई भी करेगी.

लेकिन राजस्थान में दो मंत्रियों को छोड़ कर सभी मंत्रियों के चुनाव क्षेत्रों में पार्टी को हार का सामना करना पड़ा है. इनमें मुख्यमंत्री गहलोत का सरदारपुरा और प्रदेश कांग्रेस प्रमुख पायलट का टोंक विधानसभा क्षेत्र भी शामिल है.

पिछले दिनों कांग्रेस कार्यसमिति की बैठक में लोकसभा चुनाव परिणामों पर चर्चा के दौरान राजस्थान और मध्य प्रदेश पर भी बात हुई. इसके बाद खबरें छपी कि पार्टी अध्यक्ष राहुल गांधी ने नाम लेकर कहा कि कुछ नेताओं ने अपने बेटों को संगठन से ज्यादा महत्व दिया.

इस इंटरव्यू में गहलोत ने कहा कि कार्यसमिति की एक शुचिता होती है. लेकिन इस मामले में पूरे संदर्भ को परे रखकर बाहर चीज़ें प्रस्तुत की गईं. गहलोत ने कहा, 'जोधपुर में शिकस्त का पोस्टमॉर्टम होना चाहिए. हमें तह तक जाना चाहिए कि ऐसे परिणाम कैसे आए.'

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बीजेपी के राज्य अध्यक्ष मदन लाल सैनी ने बीबीसी के कहा, "सत्तारूढ़ पार्टी में यह कलह विधान सभा चुनावों के वक्त से है. यह पद और प्रतिष्ठा की लड़ाई है. पहले सीएम कौन बने इस पर लड़ाई चली, फिर विभाग क्या हो ,फिर उप मुख्यमंत्री का आवास कौन सा हो, इस पर लड़ाई चली. कांग्रेस नेताओं ने जनता को यह दिखाने की चेष्टा कि वे एक है. पर सच्चाई इसके उलट है. दोनों के बीच दरार है."

सैनी कहते हैं, "हमारी नजर है. हम एक मजबूत विपक्ष के नाते राजस्थान को इन लड़ते हुए नेताओं पर छोड़ने वाले नहीं है. राज्य में क़ानून व्यवस्था गड़बड़ा गई है. दुष्कर्म की घटनाएं बढ़ गई हैं. हम जनता की समस्याओं को लेकर जन आंदोलन खड़े करेंगे. क्योंकि प्रशासन ठप्प पड़ गया है."

बीजेपी फ़ायदा उठा रही है?

बीजेपी के कुछ नेताओं ने सरकार के अन्तर्विरोधों का हवाला देकर कांग्रेस सरकार की स्थिरता पर सवाल खड़े करते रहे हैं. इस पर सैनी कहते हैं, "ये अपने अंतर्विरोधों से टूटे तो टूटे मगर बीजेपी एक मर्यादा में रह कर काम करती है. हम चुनाव की घड़ी में ही अपना घोषणा पत्र लेकर जनता के सामने जाएंगे. लेकिन तोड़फोड़ कर सरकार बनाना हमारी नीति और नीयत में नहीं है. "

कांग्रेस प्रवक्ता अर्चना शर्मा कहती हैं, "बीजेपी का लोकतंत्र में विश्वास नहीं है. हमारी सरकार स्थिर है और उसे बहुमत हासिल है. इसके साथ ही निर्दलीय विधायकों भी समर्थन प्राप्त है. लेकिन बीजेपी नेता इस तरह की बातें कह कर साबित कर रहे हैं कि वे सत्ता लोलुप है और इस तरह सत्ता हासिल करना चाहते हैं."

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शर्मा कहती हैं कि लोकतंत्र में संख्या बल का महत्व है और यह पूरी तरह कांग्रेस के हक में है.

राज्य की राजनीति पर नजर रखने वाले स्थानीय पत्रकार अवधेश अकोदिया कहते हैं, "जो कुछ सत्तारूढ़ कांग्रेस में चल रहा है, वो पार्टी का सत्ता संघर्ष है. एक तरफ मुख्यमंत्री हैं और दूसरी तरफ उप मुख्यमंत्री. इस संघर्ष में कोई एक पक्ष कुछ क्रिया करता दूसरा भी प्रतिक्रिया करेगा."

राजस्थान में विधान सभा चुनावों से पहले ही यह खेमेबंदी सामने आने लगी थी. मगर गहलोत और पायलट दोनों सभा मंचों से कथित गुटबाजी का न केवल प्रतिवाद करते बल्कि यह प्रभाव देने की कोशिश करते थे कि दोनों में बहुत गहरा मेल मिलाप है.

इसी कड़ी में बीते साल सितंबर में पार्टी की करौली में आयोजित संकल्प रैली में गहलोत और पायलट एक मोटरसाइकिल पर सवार होकर पहुंचे. पायलट गाड़ी चला रहे थे और गहलोत उनके पीछे बैठे थे. कांग्रेस ने इस तस्वीर को खूब प्रचारित किया और यह संदेश देने का प्रयास किया कि दोनों एकजुट है. लेकिन कहते है सियासत में जो दिखता है वो होता नहीं है, हो होता है वो दिखता नहीं है.

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