#MaharanaPratap की जयंती की दो तारीख़ें क्यों हैं? फ़ैक्ट चेक

  • 6 जून 2019
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भारत में आज राजपूत शासक महाराणा प्रताप सिंह की 479वीं जयंती का जश्न मनाया जा रहा है.

गुरुवार सुबह देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ट्वीट कर महाराणा प्रताप को याद किया और लिखा, "देश के महान सपूत और वीर योद्धा महाराणा प्रताप को उनकी जयंती पर शत-शत नमन. उनकी जीवन-गाथा साहस, शौर्य, स्वाभिमान और पराक्रम का प्रतीक है जिससे देशवासियों को सदा राष्ट्रभक्ति की प्रेरणा मिलती रहेगी."

एक महान राष्ट्रनायक के तौर पर महाराणा प्रताप को याद करते हुए लोगों ने सोशल मीडिया पर लाखों संदेश पोस्ट किये हैं.

सुबह से ही #MaharanaPratapJayanti ट्विटर पर टॉप ट्रेंड्स में शामिल है.

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लेकिन कुछ लोगों ने यह सवाल किया है कि विकीपीडिया समेत कुछ सरकारी और ग़ैर सरकारी वेबसाइट्स पर जब महाराणा प्रताप की जन्मतिथि 9 मई 1540 दी गई है, तो उनकी जयंती का जश्न 6 जून को क्यों मनाया जा रहा है?

बीबीसी के कुछ रीडर्स ने भी वॉट्सऐप के ज़रिए हमसे यही सवाल पूछा है कि महाराणा प्रताप की जयंती को लेकर ये भ्रांति क्यों है?

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दो जयंती कैसे?

अपनी मौत के 450 से अधिक वर्ष बीतने के बाद भी महाराणा प्रताप को बहादुरी का प्रतीक माना जाता है.

लेकिन उनकी जन्मतिथि को लेकर लोगों को जो ग़लतफ़हमी है, उसे दूर करने के लिए हमने जयपुर स्थित 'सिटी पैलेस' और उदयपुर स्थित 'हल्दी घाटी म्यूज़ियम' में बात की.

इन दोनों जगह से मिली सूचना के अनुसार महाराणा प्रताप की जयंती का जश्न आज यानी 6 जून को मनाया जाना ज़्यादा सही है क्योंकि हिंदू कैलेंडर (पन्चांग) के मुताबिक़ प्रताप का जन्म हिंदुओं में शुभ माने-जाने वाले गुरुपुष्प नक्षत्र में ज्येष्ठ महीने की तृतीया तिथि को हुआ था.

हिंदू कैलेंडर के लिहाज़ से इस साल ज्येष्ठ महीने की तृतीया तिथि 6 जून होती है.

हर साल तिथियों के इसी गणित के कारण महाराणा प्रताप की एक जयंती 9 मई के अलावा भी मनाई जाती है.

जैसे 2015 में 20 मई को और 2016 में 7 जून को महाराणा प्रताप की जयंती का जश्न मनाया गया था.

ठीक वैसे ही जैसे हर साल रामनवमी और अन्य हिंदू त्योहारों की तारीख़ें बदलती रहती हैं, उसी तरह महाराणा प्रताप की जयंती का दिन भी बदलता है.

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फिर 9 मई कहाँ से आई?

हमने पाया कि जो तारीख़ हर साल हिंदू कैलेंडर के हिसाब से तय की जाती है, उसके अलावा 9 मई को भी महाराणा प्रताप की जयंती मनाई जाती है.

अब उदाहरण के लिए राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को देखिए.

उन्होंने 9 मई 2019 को महाराणा प्रताप की जयंती का संदेश दिया था और 6 जून की सुबह भी उन्होंने #MaharanaPratapJayanti के साथ अपना मैसेज ट्वीट किया.

'हल्दी घाटी म्यूज़ियम' के अनुसार वर्ष 1540 में ज्येष्ठ महीने की तृतीया तिथि 9 मई को पड़ी थी, इसीलिए अंग्रेज़ी कैलेंडर में उनकी जन्म तिथि 9 मई तय की गई.

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महाराणा प्रताप जिन्होंने अकबर के सामने कभी नहीं टेके घुटने

महाराणा प्रताप का सफ़र

इतिहासकारों के अनुसार 21 जून 1576 के दिन मुग़ल बादशाह अक़बर और महाराणा प्रताप की फ़ौजों के बीच राजस्थान के उदयपुर शहर के क़रीब स्थित हल्दी घाटी में जंग की शुरुआत हुई थी.

कई इतिहासकार हल्दी घाटी की लड़ाई को मुग़लों की स्पष्ट जीत नहीं मानते क्योंकि अक़बर इस लड़ाई के परिणाम से ख़ुश नहीं थे. साथ ही ये भी कहा जाता है कि महाराणा प्रताप ने अक़बर के सामने कभी हार नहीं मानी.

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'महाराणा प्रताप - द इनविंसिबिल वॉरियर' की लेखिका रीमा हूजा के अनुसार 28 फ़रवरी, 1572 को राणा उदय सिंह का देहांत होने से पहले उन्होंने अपने नौवें नंबर के पुत्र जगमाल को अपना उत्तराधिकारी बनाया था. हालांकि राणा प्रताप उनके सबसे बड़े पुत्र थे. ये अलग बात है कि मेवाड़ के मंत्रियों और दरबारियों ने अंतत: राणा प्रताप को ही गद्दी पर बैठवाया था.

साल 1596 में शिकार खेलते हुए महाराणा प्रताप को चोट लग गई थी जिससे वो कभी उबर नहीं पाये और 19 जनवरी, 1597 को मात्र 57 वर्ष की आयु में उनका देहांत हो गया था.

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