पश्चिम बंगाल में बीजेपी के विरोध प्रदर्शन के दौरान हिंसा

  • 12 जून 2019
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पश्चिम बंगाल में चुनाव के बाद शुरू हुई हिंसा का दायरा बढ़ता जा रहा है. पिछले पांच दिनों में हिंसा की घटनाओं में कई लोग मारे गए हैं और कई ज़ख़्मी भी हैं, जिनमें राजनीतिक दलों के कार्यकर्ता हैं.

हिंसा को लेकर आरोप प्रत्यारोप का दौर भी जारी है और इन सबके बीच मंगलवार को भारतीय जनता पार्टी ने राज्यव्यापी बंद का आह्वान किया था. इस दौरान भी हिंसा हुई.

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मंगलवार को पश्चिम बंगाल के राज्यपाल केसरीनाथ त्रिपाठी ने गृहमंत्री अमित शाह से मुलाक़ात की और उन्हें राज्य में चुनावों के बाद पैदा हुए हालात के बारे में बताया.

राज्य में हो रही हिंसा के लिए तृणमूल कांग्रेस ने भारतीय जनता पार्टी को ज़िम्मेदार ठहराया है.

बीजेपी पर माहौल ख़राब करने का आरोप

पार्टी के कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए ममता बनर्जी ने आरोप लगाया कि बीजेपी अपने चुनावी फ़ायदे के लिए पश्चिम बंगाल का माहौल ख़राब कर रही है.

वहीं तृणमूल कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दुलाल चंद्र दास का आरोप है कि बीजेपी ऐसा माहौल बना रही है ताकि यहाँ राष्ट्रपति शासन लगाया जा सके.

बीजेपी के पश्चिम बंगाल इकाई के नेताओं का कहना है कि तृणमूल कांग्रेस तुष्टीकरण और हिंसा का सहारा लेकर विधानसभा के चुनाव जीतना चाहती थी. मगर बीजेपी ने ऐसा नहीं होने दिया और तृणमूल कांग्रेस को लोकसभा चुनावों में काफ़ी नुक़सान हुआ.

तृणमूल कांग्रेस को सिर्फ़ 22 सीटें मिलीं और बीजेपी ने अपनी सीटों की संख्या बढ़ाकर 18 कर लीं.

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हिंसा की चपेट से पश्चिम बंगाल के कई इलाक़े आ गए हैं. जानकारों का कहना है कि ऐसा माहौल पहली बार हुआ है.

ज़्यादातर हिंसा की ख़बरें तृणमूल कांग्रेस और बीजेपी कार्यकर्ताओं के बीच से ही आ रहीं हैं लेकिन कहीं-कहीं वामपंथी दलों का भी नाम भी आ रहा है.

10 लोग मारे गए

ममता बनर्जी ने आधिकारिक रूप से कहा है कि अब तक इस हिंसा में 10 लोगों के मारे जाने की पुष्टि हुई है.

तृणमूल के नेताओं का कहना है कि सबसे ज़्यादा उनके लोग मारे गए हैं जबकि बीजेपी का कहना है कि उनके कार्यकर्ता ज़्यादा मारे गए हैं और घायल हुए हैं.

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बैरकपुर से भाजपा सांसद अर्जुन सिंह का कहना है कि तृणमूल कांग्रेस के नेता भाजपा की जीत से बौखला गए हैं और विधानसभा के चुनावों से पहले पूरे राज्य में दहशत का माहौल बना रहे हैं ताकि आम वोटर वोट डालने ही ना निकले.

पश्चिम बंगाल के जो इलाक़े सबसे ज़्यादा हिंसा से प्रभावित हुए हैं उनमे उत्तरी 24 परगना, कूचबिहार, हावड़ा और पश्चिमी बर्दवान शामिल हैं.

हालांकि केंद्र सरकार ने राज्य में राष्ट्रपति शासन लगाने के कोई संकेत नहीं दिए हैं, लेकिन प्रदेश अध्यक्ष दिलीप घोष ने एक बयान जारी कर कहा, "तृणमूल कांग्रेस हिंसा को खुले आम बढ़ावा दे रही है, अपराधी पुलिस के सामने चौड़े होकर घूम रहे हैं. ऐसे माहौल में आप शांति की उम्मीद नहीं सकते हैं क्योंकि राज्य सरकार ऐसा चाहती ही नहीं है."

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पश्चिम बंगाल की पुलिस और प्रशासन के लिए सबसे बड़ी चुनौती है वो रैलियां जो तृणमूल कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी के कार्यकर्ता और नेता निकाल रहे हैं.

कई स्थानों पर पुलिस और दोनों दलों के कार्यकर्ताओं में झड़पों की भी ख़बरें आ रहीं हैं.

फ़िलहाल पश्चिम बंगाल का माहौल दिन ब दिन बिगड़ता ही जा रहा है.

राज्यपाल केसरीनाथ त्रिपाठी की गृहमंत्री अमित शाह से हुई मुलाक़ात के बाद अटकलों का बाज़ार गरम है कि राज्य में राष्ट्रपति शासन लगाया जा सकता है.

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